Leader Of Opposition: 10 साल बाद गांधी परिवार को तीसरी बार मिल रहा ये खास पद
Leader Of Opposition: देश की 18वीं लोकसभा कई मायनों में अहम है। इसको लेकर स्वयं पीएम मोदी (PM Narendra Modi) भी कई बार अपने संबोधन में कह चुके हैं। क्योंकि इस बार न केवल ये राष्ट्र के लिए एक युवा आंकड़ा है बल्कि इस बार संसद में सबसे अधिक युवा सांसद भी पहुंचे हैं। सत्ता पक्ष के लिए तो यह लोकसभा खास है ही क्योंकि लगातार तीसरी बार राष्ट्र में एनडीए की गवर्नमेंट बनी है। लेकिन विपक्ष के लिए भी ये मौका कुछ कम नहीं है खास तौर पर गांधी परिवार के लिए 18वीं लोकसभा कुछ अलग है। एक तोर इस बार कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन बीते दो चुनावों को मुकाबले अच्छा रहा वहीं दूसरा इस बार के प्रदर्शन ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को संजीवनी देने का काम किया है।

राजनीतिक करियर में राहुल गांधी के लिए ये प्रदर्शन काफी अर्थ रखता है, कांग्रेस पार्टी जिस बुरे दौर से गुजर रही थी उसमें उनके शीर्ष नेता या यूं कहें गांधी परिवार की वापसी महत्वपूर्ण थी। राहुल गांधी के नेतृत्व में 10 वर्ष बाद कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में सम्मानजनक आंकड़ा छुआ है। स्वयं राहुल गांधी दो लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और जीते।
यह जीत भी छोटी नहीं बल्कि बड़े अंतर वाली रही। खास तौर पर पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र से जहां डेढ़ लाख के इर्द-गिर्द वोटों से जीते तो वहीं राहुल गांधी ने रायबरेली और वायनाड दोनों सीटों पर 4 लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की। यानी कुल मिलाकर राहुल गांधी के लिए ये लोकसभा काफी अहम है। लेकिन इन सबके साथ-साथ गांधी परिवार के लिए ये मौका कुछ खास है।
गांधी परिवार का तीसरे सदस्य को खास पद
लोकसभा में नेता विपक्ष के रूप में चुने जाने के बाद राहुल गांधी अपनी फैमिली के तीसरे ऐसे सदस्य बन चुके हैं जिन्हें ये पद मिला है। इससे पहले राजीव गांधी और सोनिया गांधी इस अहम किरदार में नजर आ चुके हैं। आपको बता दें कि ऐसे चार बार मौके आए जब नेता विपक्ष का पद खाली रहा। इसमें 1980, 1989, 2014 और 2019 प्रमुख रूप से शामिल हैं।
क्या कहता है नियम
लोकसभा में नेता विपक्ष बनने के लिए एक खास नियम है। इसके अनुसार कोई नेता विपक्ष तब बन पाता है जब उसे कुल सीटों का 10 प्रतिशत यानी 54 सांसद हासिल हों। कांग्रेस पार्टी के लिए यह आंकड़ा बीते 10 सालों में हासिल करना काफी कठिन साबित हुआ। लेकिन इस बार पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा और इस आंकड़े के दम पर कांग्रेस पार्टी नेता प्रतिपक्ष बनाने में सफल रही।
राहुल गांधी के पास क्या होंगे अधिकार
राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद उनके पास कुछ खास अधिकार होंगे। जैसे वह लेखा समिति के प्रमुख होंगे। इसके साथ ही वह गवर्नमेंट के सभी आर्थिक मामलों की समीक्षा कर सकेंगे। यही नहीं राहुल गांधी अब सरकारी खर्चों पर अपनी टिप्पणी कर सकेंगे। यूं कह सकते हैं नेता प्रतिपक्ष बनने पर राहुल गांधी के एक कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल जाएगा। राहुल गांधी लोकपाल से लेकर CBI प्रमुख और इलेक्शन कमीश्नर समेत चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों में भी अहम दखल रख पाएंगे। यही नहीं केंद्रीय सतर्कता आयोग, सूचना आयोग और एनएचआरसी चीफ के सलेक्शन पर भी उन्हें पैनल में शामिल किया जाएगा।
पीएम पद के भी बन सकेंगे दावेदार
इसके साथ ही उन्हें छवि और कद में भी बढ़ोतरी होगी। इससे एक और लाभ भविष्य में यह होगा कि राहुल गांधी पीएम पद के उम्मीदवार भी सरलता से बन सकते हैं। यदि नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी मौजूदगी दमदार रही तो निश्चित रूप से विपक्ष एक जुट उन्हें अपना नेता चुन सकता है।

