जानें, किन उद्देश्यों से चलते भारतीय भेड़ियों को पहनायें जाएंगे रेडियो कॉलर…
Indian Wolf : मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार भारतीय भेड़ियों को रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा। इससे उनके रहवास, खानपान और व्यवहार पर अध्ययन किया जाएगा। NTCA से अनुमति मिलने के बाद नौरादेही के तीन भेड़ियों को रेडियो कॉलर पहनने की तैयारी है। यहां पर एसएफआरआई जबलपुर द्वारा भेड़ियों पर 2 वर्ष का रिसर्च किया जा रहा है। इसमें तीन भिन्न-भिन्न झुंड के भेड़िये चुने जाएंगे, जिनसे इनकी और पूरे झुंड की गतिविधियों पर शोध किया जाएगा।

दरअसल, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले की सीमाओं में फैले नौरादेही टाइगर रिजर्व भेड़ियों का प्राकृतिक आवास है। 1975 में यहां पर भेड़ियों के संरक्षण के लिए प्रदेश का सबसे बड़ा अभ्यारण भी बनाया गया था। इस अभ्यारण के 50 वर्ष पूरे हो गए हैं। मध्य प्रदेश में सबसे अधिक भारतीय भेड़िए हैं। इसकी वजह से स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट जबलपुर द्वारा 2 वर्ष के प्रोजेक्ट में इनकी रिसर्च की जा रही है। इस पर 45 लाख का खर्च है।
अनुमति मिलने का इंतजार
साल 2024 में प्रारम्भ हुई रिसर्च का प्राथमिक सर्वे पूरा हो चुका है। अब आगे की गतिविधियों को जानने के लिए रेडियो कॉलर पहनाए जाएंगे। ताकि उनकी गतिविधियों के बारे में पता करके इनके संरक्षण के लिए और भी बेहतर कार्य किए जा सकें। इनकी संख्या में वृद्धि हो फूड चेन साइकलिंग में यह अहम हिस्सा होते हैं। फिलहाल, इसके लिए अनुमति मांगी गई है। पत्र का प्रतीक्षा किया जा रहा है।
इन चीजों पर होगा रिसर्च
वीरांगना रानी दुर्गावती नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाक्टर एए अंसारी ने कहा मध्य प्रदेश शासन वन विभाग के द्वारा एसएफआरआई के लिए एक योजना दो साल के लिए स्वीकृत की थी। जिसमें तीन भेड़ियों को कॉलर कर मॉनिटरिंग किया जाना है। इसका उद्देश्य नौरादेही या बुंदेलखंड में भेड़िया, उसका बिहेवियर कैसा है, बाय हंटिंग (शिकार) कैसे करता है, हंटिंग का फ्रीक्वेंसी क्या है, इनके रहवास कहां पर हैं, ग्रुप में कैसे रहते हैं, एक साथ कितने रहते हैं, दिनचर्या कैसी होती है, क्या दिन में भी शिकार करते हैं। इसका शोध करने के लिए हमारे मैनेजमेंट का इंर्पोटेंस इसलिए आ रहा है।

