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जानें, गुरुग्राम और नोएडा में कैसे पड़ता है एक ही बारिश का अलग-अलग प्रभाव…

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दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों खूब झमाझम बारिश हो रही है भारतीय मौसम विभाग ने आज यानी बुधवार को दिल्ली और आसपास के इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है इस कारण कई जगहों पर जलजलाव और ट्रैफिक जाम की परेशानी हो सकती है वैसे इन काली घटाओं को देखकर दिल्ली से सटे दो शहरों का रंग अलग ही हो जाता है झमाझम बारिश से जहां नोएडा का समा सुहाना हो जाता है, वहीं गुरुग्राम में लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती है

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कुछ ऐसी ही तस्वीर सोमवार को दिखी, जब दिल्ली-एनसीआर में एक ही दिन में करीब 100 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई इस दौरान गुरुग्राम में मुख्य सड़कों पर कई किलोमीटर लंबे जाम लग गया इस कारण से कार्यालय से लौट रहे लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे वैसे गुरुग्राम में हर वर्ष लगभग ऐसा ही नजारा दिखता है, जहां थोड़ी सी बारिश में भी शहर थम जाता है इस जलभराव ने एक बार फिर गुरुग्राम की शहरी प्लानिंग और विकास पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं

पहले बना नोएडा शहर, फिर बसे लोग

वहीं दूसरी ओर नोएडा की तस्वीर कुछ और दिखी यहां बारिश के दौरान ऐसे हालात न के बराबर देखने को मिलते हैं 1975 में आपातकाल के दौरान जब तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी ने दिल्ली से उद्योगों को बाहर शिफ्ट करने की योजना बनाई, तब नोएडा की नींव रखी गई नोएडा को यूपी इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट एक्ट, 1976 के अनुसार एक औद्योगिक टाउनशिप के रूप में विकसित किया गया और आज यह राज्य की आर्थिक ताकत के तौर पर उभर चुका है

शहरी नियोजन के जानकार बताते हैं कि नोएडा पूरी तरह से ग्रीनफील्ड योजना के अनुसार विकसित किया गया था यानी एक बार में जमीन अधिग्रहण कर सड़कें, सीवर, नाले, स्ट्रीट लाइट और पैदल मार्ग जैसे पूरी अवसंरचना पहले से ही बना दिए गए इसके बाद निजी डेवलपर्स ने आकर इसी ढांचे से जुड़कर निर्माण कार्य प्रारम्भ किया

करीब 50 वर्ष पहले नोएडा के लिए 50 गांवों की 14,915 हेक्टेयर (36,841 एकड़) जमीन अधिग्रहित की गई थी आज यह क्षेत्र 81 गांवों और 20,316 हेक्टेयर तक फैल चुका है शहरी शोधकर्ता मुक्ता नाइक के अनुसार, यही कारण है कि यहां का सड़क और ड्रेनेज नेटवर्क संतुलित और टिकाऊ साबित हुआ

नोएडा से एकदम अलग गुरुग्राम के जन्म की कहानी

गुरुग्राम की कहानी एकदम अलग है यहां शहर का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर हुआ हरियाणा गवर्नमेंट ने 1970 के दशक से कई कानून बनाए, जिनके अनुसार निजी कंपनियों ने भिन्न-भिन्न जगहों से जमीन लेकर टाउनशिप बनाई सबसे बड़ा नाम डीएलएफ का है लेकिन इस प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण एकसमान ढंग से नहीं हुआ नतीजा यह हुआ कि शहर में जगह-जगह असमान प्लॉट बने, कई सड़कें अधूरी रह गईं और बुनियादी ढांचे में निरंतरता नहीं रही

गुरुग्राम की भौगोलिक स्थिति भी बारिश के दौरान परेशानी को बढ़ा देती है अरावली पहाड़ियां शहर के दक्षिणी छोर पर प्राकृतिक ऊंचाई पर हैं और वहां से पानी उतरकर उत्तर की ओर बहता है, जो अपेक्षाकृत निचला क्षेत्र है यह पानी आगे चलकर पश्चिमी दिल्ली के नजफगढ़ झील तक पहुंचता है लेकिन अनियोजित शहरीकरण और प्राकृतिक नालों के गायब होने से पानी रुकने लगा है

शहर का सड़क नेटवर्क भी परेशानी बढ़ाता है यहां साफ-सुथरा ग्रिड नहीं है, जिससे ट्रैफिक जाम आम बात हो जाता है और बारिश में पानीभराव इस परेशानी को और विकराल बना देता है जानकारों का बोलना है कि जहां नोएडा की कामयाबी का राज़ उसके योजनाबद्ध विकास में छिपा है, वहीं गुरुग्राम आज अपनी जल्दबाजी और अव्यवस्थित विस्तार की सजा भुगत रहा है

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