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शराब घोटाले के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज हो सकती है सुनवाई, जानें किस दिशा में जाएगी सुनवाई…

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा दाखिल याचिका पर बुधवार को उच्चतम न्यायालय सुनवाई करेगा. सिसोदिया ने जमानत की शर्त में ढील देने की मांग की है, जिसके अनुसार उन्हें हर छह महीने में जांच अधिकारी के सामने पेश होना होता है.

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सर्वोच्च कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित वाद सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ 11 दिसंबर को सिसोदिया की याचिका पर सुनवाई करेगी. सोमवार को, न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा उल्लेख किए जाने के बाद सिसोदिया द्वारा प्रस्तुत याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की थी.

सिंघवी से बोला था, एक दिन बाद (परसों) सुनवाई होगी. इसमें सिसोदिया की याचिका पर तुरन्त सुनवाई की मांग की गई थी. उन्होंने जमानत की शर्तों में छूट की मांग की है. जिसके अनुसार उन्हें हर सोमवार और गुरुवार को जांच अधिकारी के समक्ष हाजिरी देनी होती है.

इस वर्ष अगस्त में, सर्वोच्च कोर्ट ने वरिष्ठ आप नेता को यह कहते हुए जमानत दे दी थी कि कथित आबकारी नीति मुद्दे में मुकदमे को तेजी से पूरा करने की आशा में उन्हें असीमित समय तक सलाखों के पीछे नहीं रखा जा सकता.

सिसोदिया की जमानत याचिका पर निर्णय सुनाते हुए न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बोला था: मौजूदा मुद्दे में, प्रवर्तन निदेशालय के साथ-साथ CBI मुद्दे में, 493 गवाहों के नाम दर्ज किए गए हैं और मुद्दे में हजारों पन्नों के डॉक्यूमेंट्स और एक लाख से अधिक पन्नों के डिजिटाइज्ड डॉक्यूमेंट्स शामिल हैं.

इस प्रकार यह साफ है कि निकट भविष्य में मुकदमे के खत्म होने की दूर-दूर तक कोई आसार नहीं है. हमारे विचार में, मुकदमे के शीघ्र पूरा होने की आशा में अपीलकर्ता को असीमित समय तक सलाखों के पीछे रखना उसे संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार दिए गए स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार से वंचित करना है.

न्यायमूर्ति विश्वनाथन की पीठ ने बोला था- लगभग 17 महीने तक कारावास में रहने और केस प्रारम्भ न होने के कारण सिसोदिया को शीघ्र सुनवाई के अपने अधिकार से वंचित किया गया है.

इस तर्क को खारिज करते हुए कि सिसोदिया को जमानत मिलने पर वे सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं, उच्चतम न्यायालय ने बोला था कि अभियोजन पक्ष का मुद्दा मुख्य रूप से दस्तावेजी सबूतों पर आधारित है, जिन्हें CBI और प्रवर्तन निदेशालय ने पहले ही बरामद कर लिया है.

सुप्रीम न्यायालय ने केंद्रीय एजेंसियों की इस दलील को भी अस्वीकार कर दिया था जिसमें मांग थी कि सिसोदिया को दिल्ली के सीएम कार्यालय या दिल्ली सचिवालय में जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

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