मूल ओबीसी से आने वाले मदन राठौड़ को बीजेपी का बनाया प्रदेशाध्यक्ष
राजस्थान में इस महीने के आखिर में विधानसभा की 5 सीटों पर उपचुनाव की तारीख की घोषणा हो सकती है. इससे ठीक पहले बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ने सोशल इंजीनियरिंग को साधने के लिए कई राजनीतिक परिवर्तन किए हैं.

दोनों पार्टियों में हाल ही में प्रदेश प्रभारी, प्रदेशाध्यक्ष से लेकर उपनेता प्रतिपक्ष तक कई नियुक्तियां की हैं. इन नियुक्तियों में जातिगत कॉम्बिनेशन इस तरह बैठाया गया है कि आने वाले उपचुनाव में उन वर्गों को साधा जा सके.
भाजपा ने क्या किए बदलाव
दिसंबर-2023 में प्रदेश में बीजेपी की गवर्नमेंट बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष, दोनों पदों पर ब्राह्मण समुदाय से आने वाले भजनलाल शर्मा और सी। पी। जोशी कार्यरत थे. अप्रैल में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी 25 में से 11 सीटें हार गई. जबकि पिछले दो चुनावों में पार्टी ने सभी 25 सीटें जीती थीं. ऐसे में पार्टी के भीतर यह मामला लगातार चर्चा में था कि अन्य जातियों-समुदायों को भी बड़े पदों पर अगुवाई मिलना चाहिए. ऐसे में पार्टी ने हाल ही में दो बड़े पदों पर जरूरी परिवर्तन किए.
1. प्रदेशाध्यक्ष बदला
भाजपा ने हाल ही मदन राठौड़ को प्रदेशाध्यक्ष बनाया है. यह पद अप्रैल-2023 से सी। पी। जोशी के पास था. मदन राठौड़ राज्यसभा सांसद हैं और मूल ओबीसी वर्ग (तेली घांची समाज) से आते हैं. इस नियुक्ति को राजनीतिक जानकार आनें वाले उपचुनाव से जोड़कर देख रहे हैं. एक्सपट्र्स का बोलना है कि ओबीसी मूल एक बड़ा मतदाता वर्ग है और बीजेपी इस वर्ग की बड़ी जातियों माली, कुमावत, तेली, यादव, चारण आदि में पार्टी के प्रति आकर्षण पैदा करना चाहती है. इसलिए प्रदेशाध्यक्ष चुनते समय सोशल इंजीनियरिंग का खास ध्यान रखा गया.
2. प्रदेश प्रभारी बदला
पार्टी में लंबे समय से अरुण सिंह प्रदेश प्रभारी का पद संभाल रहे थे. वे राजपूत समाज से आते हैं. मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष की तरह ही उप सीएम और प्रदेश प्रभारी पदों पर एक ही जाति राजपूत के प्रतिनिधि थे. ऐसे में पार्टी ने संगठन में अब प्रदेश प्रभारी का पद सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल को दे दिया है. इससे पार्टी वैश्य समाज को आकर्षित कर सकती है.
अरुण सिंह की स्थान सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल को राजस्थान का प्रभारी नियुक्त किया गया है.
भाजपा का कॉम्बिनेशन है 5 बड़े समाजों पर
भाजपा के पास अब मुख्यमंत्री और दो डिप्टी मुख्यमंत्री पदों पर ब्राह्मण, राजपूत और एससी वर्ग के नेता हैं. संगठन में प्रदेशाध्यक्ष मूल ओबीसी और प्रदेश प्रभारी वैश्य समाज के प्रतिनिधि हैं. राजस्थान में ये पांचों वर्ग सबसे बड़े 7 मतदाता समूहों में से माने जाते हैं. ये पांचों समाज यदि बीजेपी के पक्ष में मतदान करें तो पार्टी को बहुत बड़ी ताकत मिल सकती है. पार्टी इसे अपने लिए संतुलित टीम मान रही है.
भाजपा की कमजोरी
राजनीतिक एक्सपर्ट वेद माथुर बताते हैं- सभी बड़े 5 समाजों को साध लेने के बावजूद बीजेपी में जाट, गुर्जर और मीणा समाज का अगुवाई दिखाई नहीं देता. जबकि तीनों ही समाज की गिनती राजस्थान के बड़े मतदाता वर्गों में होती है.
विधानसभा और लोकसभा चुनाव के परिणामों में जाट बहुल वाली सीटों पर बीजेपी अधिक बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई थी. बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और तत्कालीन उप नेता प्रतिपक्ष डाक्टर सतीश पूनिया तक चुनाव हार गए थे.
भाजपा ने मुख्यमंत्री और डिप्टी मुख्यमंत्री के पदों पर भजनलाल शर्मा, डाक्टर प्रेमचंद बैरवा और दीया कुमारी को नियुक्त कर ब्राह्मण, एससी और राजपूत समाज को अगुवाई दिया था.
हालांकि बीजेपी ने 4 जाट विधायकों को मंत्री बनाया है और डाक्टर पूनिया को हरियाणा का प्रभारी बनाया है, लेकिन राजस्थान में कोई बड़ा पद सीधे तौर पर नहीं दिया गया है. हाल ही लोकसभा चुनाव में जाट बहुल वाली सीटें सीकर, बाड़मेर, चूरू, नागौर और झुंझुनूं बीजेपी हार चुकी है. इनके अतिरिक्त मीणा और गुर्जर बहुल वाली सीटें दौसा, करौली-धौलपुर, भरतपुर और टोंक-सवाईमाधोपुर भी बीजेपी हार गई थी.
ऐसे में इस बड़े वर्ग का साथ यदि बीजेपी को नहीं मिला तो 5 सीटों पर उपचुनाव जीतना बहुत कठिन होगा.
कांग्रेस ने क्या किए हैं बदलाव
कांग्रेस ने दिसंबर-2023 में बीजेपी की गवर्नमेंट बनने के बाद टीकाराम जूली को नेता प्रतिपक्ष बनाया. जूली कांग्रेस पार्टी की तरफ से एससी समुदाय से आने वाले पहले नेता प्रतिपक्ष बने. विधानसभा के मौजूदा सत्र में कई बार उन्होंने सत्ता पक्ष को विभिन्न मुद्दों पर घेरकर अपनी ताकत भी दिखाई.
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष पद पर गोविंद सिंह डोटासरा और प्रदेश प्रभारी पर सुखजिंदर सिंह रंधावा पहले से ही कार्यरत हैं. हाल ही में दो नियुक्तियां भी कांग्रेस पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग को दिखाती हैं.
एससी समुदाय के टीकाराम जूली को कांग्रेस पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष जैसे पद की बड़ी जिम्मेदारी दी है.
1. विधानसभा में मुख्य सचेतक
अब उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने लगातार दूसरी बार जयपुर की आदर्श नगर सीट से विधायक बने रफीक खान को विधानसभा में मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाया है. खान कांग्रेस पार्टी के परंपरागत रूप से समर्थक माने जाने वाले मुसलमान समुदाय से आते हैं. जिन पांच सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से झुंझुनूं, खींवसर, देवली-उनियारा और दौसा में मुसलमान समुदाय पहले से चौथे नंबर का सबसे बड़ा मतदाता समूह माना जाता है. राजनीतिक जानकार इस नियुक्ति को मुसलमान वर्ग साधने से जोड़कर देख रहे हैं.
विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के मुख्य सचेतक रफीक खान, उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात करते हुए. (फाइल फोटो)
2. उपनेता प्रतिपक्ष
कांग्रेस ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत के सलाहकार रहे रामकेश मीणा को उपनेता प्रतिपक्ष के पद पर नियुक्ति दी है. मीणा संसदीय सचिव भी रह चुके हैं. पूर्वी राजस्थान की दो सीटों दौसा और देवली-उनियारा पर उपचुनाव होने हैं. इन दोनों सीटों पर मीणा समुदाय पहले-दूसरे नंबर का मतदाता समूह माना जाता है.
कांग्रेस का कॉम्बिनेशन है 4 बड़े समुदायों पर
कांग्रेस के इस कॉम्बिनेशन में जाट, एससी, मुसलमान और मीणा समाज का अगुवाई शामिल है. जिन पांच सीटों पर उपचुनाव (दौसा, झुंझुनूं, खींवसर, देवली-उनियारा और चौरासी) हैं, उनमें ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत जैसे बड़े मतदाता समूहों की तुलना में जाट, मुस्लिम, मीणा और एससी मतदाता अधिक हैं. इनमें से किसी भी सीट पर पिछले 4 चुनावों में ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत नेताओं की जीत नहीं हुई है. सियासी एक्सपर्ट नारायण बारेठ के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो कांग्रेस पार्टी में जो वर्तमान कॉम्बिनेशन है वह बीजेपी के मुकाबले अधिक सोशल नजर आता है.
कांग्रेस की कमजोरी : क्या मूल ओबीसी का वोट बैंक साथ आएगा
इन पांचों सीटों के संदर्भ में कांग्रेस पार्टी ने राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य को अगुवाई नहीं दिया है. कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव में 25 में से किसी भी सीट पर वैश्य समुदाय के एक भी आदमी को टिकट ही नहीं दिया था. कांग्रेस पार्टी गठबंधन के 11 सीटें जीतने के बावजूद एक भी राजपूत उम्मीदवार नहीं जीता था.
अब विधानसभा में नेता-उपनेता प्रतिपक्ष या फिर संगठन में मूल ओबीसी का भी कोई प्रतिनिधि नहीं है. ऐसे में उपचुनाव वाली इन पांचों सीटों पर राजपूत, वैश्य, ब्राह्मण के साथ ही मूल ओबीसी के बड़े वोट बैंक को कांग्रेस पार्टी कैसे आकर्षित कर पाएगी, यह पार्टी के लिए चिंता का विषय है. इनमें से चौरासी सीट के अतिरिक्त शेष सभी चार सीटों पर ये सब मिलकर एक बहुत बड़ा वोट बैंक है.
टिकट वितरण में दोनों पार्टियां क्या अपना रहीं रणनीति
कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों ने पांचों सीटों पर उपचुनाव के संबंध में अपनी-अपनी कार्ययोजना प्रारम्भ कर दी है. बीजेपी के नव नियुक्त प्रदेश प्रभारी राधा मोहन अग्रवाल अगले हफ्ते तक इन सभी सीटों पर प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के साथ दौरा करेंगे. उधर, कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी मीटिंग लेंगे. कांग्रेस पार्टी एक बार फिर खींवसर और चौरासी सीट पर क्षेत्रीय स्तर पर सियासी गठबंधन करने के कोशिश में भी है. यह आरएलपी और बीएपी के साथ संभव हो सकता है.
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का बोलना है कि पीएम नरेंद्र मोदी और राजस्थान में बीजेपी की गवर्नमेंट के काम-काज की बदौलत उपचुनाव में बीजेपी सभी सीटों पर बहुत बढ़िया प्रदर्शन करेगी.
वहीं कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का बोलना है कि पार्टी ने हाल ही लोकसभा की जिन सीटों को जीता है, वहीं विधानसभा के उपचुनाव होने हैं. पार्टी इन सभी सीटों को जीतेगी.

