बजट पेश होने के बाद वित्त मंत्री पर भड़के मल्लिकार्जुन खरगे
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बोला कि जो कल बजट पेश हुआ, उसमें किसी स्टेट को कुछ नहीं मिला मतलब सबकी थाली, बस दो राज्यों की थाली में पकौड़ा और जलेबी। खरगे ने बोला कि न तमिलनाडु को मिला, न केरल, न कर्नाटक, न महाराष्ट्र, न पंजाब, न हरियाणा, न छत्तीसगढ़… दिल्ली और ओडिशा को कुछ नहीं दिया। ये केवल कुर्सी बचाने के लिए किसी को खुश करने के लिए हुआ है। हम इसकी निंदा करते हैं।

उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ इशारा करते हुए तंज कसा कि वह कर्नाटक से आए हैं। मेरी तो अपेक्षा यही थी कि सबसे अधिक मुझे ही मिलेगा। लेकिन हमको तो कुछ नहीं मिला। हम इसके विरुद्ध प्रोटेस्ट करेंगे। कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक करेंगे। खरगे ने आगे बोला कि जिस-जिस स्थान विपक्षी पार्टी चुनकर आ गई, जिस स्थान आपको नकार दिया, उस स्थान कुछ नहीं मिला। यदि आप ऐसा करते गए, यदि बैलेंस नहीं होगा तो गवर्नेंस कैसे होगा।
इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण खड़ी हुईं और कहना प्रारम्भ ही कर रही थीं कि विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे। कुछ विपक्षी सदस्य अपनी सीट से उठकर चले गए।
इससे पहले विपक्षी INDIA गठबंधन के घटक दलों के सांसदों ने केंद्रीय बजट में विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के साथ किए गए ‘भेदभाव और अन्याय’ के विरुद्ध संसद परिसर में प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए।
विपक्षी सांसदों ने गवर्नमेंट के विरुद्ध जोरदार नारेबाजी की। कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इल्जाम लगाया कि यह बजट जनविरोधी है। उन्होंने कहा, ‘किसी को इन्साफ नहीं मिला है। बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा तो मिला नहीं।‘
यह पूछे जाने पर कि क्या विपक्षी दल बजट पर चर्चा में भाग लेंगे तो खरगे ने कहा, ‘हम प्रदर्शन करेंगे फिर देखते हैं।‘ खरगे के आवास पर मंगलवार शाम ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों के सदन के नेताओं की बैठक में इस मामले को लेकर संसद के बाहर और भीतर विरोध जताने का निर्णय किया गया था।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसी मामले को लेकर बोला था कि 27 जुलाई को नीति आयोग की होने वाली बैठक का कांग्रेस पार्टी शासित राज्यों के सीएम बहिष्कार करेंगे। उन्होंने यह इल्जाम भी लगाया था कि कानूनी सिद्धांतों के प्रति इस गवर्नमेंट का रवैया पूरी तरह से ‘अनैतिक’ है। इससे पहले तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने भी नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार करने की घोषणा की थी।

