मानहानि मामले पर ममता बनर्जी के वकील ने राज्यपाल पर साधा निशाना, कहा…
पश्चिम बंगाल के गवर्नर चिकित्सक सीवी आनंद बोस ने 28 जून को सीएम ममता बनर्जी के विरुद्ध मानहानि का केस दाखिल किया था, जिसके एक दिन बाद बनर्जी ने दावा किया था कि स्त्रियों ने उनसे कम्पलेन की थी कि वे वहां होने वाली गतिविधियों के कारण राजभवन जाने से डरती हैं. हालाँकि, कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के गवर्नर द्वारा मानहानि के मुकदमे की सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी. स्थगन के बाद, ममता बनर्जी के कानूनी सलाहकार संजय बसु ने गवर्नर पर निशाना साधा. बोस द्वारा दाखिल मानहानि का केस न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था.

संजय बसु ने बोला कि गवर्नर का मानहानि मुद्दा उनके द्वारा अन्य सियासी मुद्दों को प्रचारित करने का एक कोशिश भी प्रतीत होता है, जैसे कि निर्वाचित सदस्यों को मानहानि की आड़ में अध्यक्ष के समक्ष शपथ लेने से इंकार करना. हम इन आरोपों का मुनासिब बचाव करेंगे. हमें पता चला है कि तृणमूल प्रमुख के कथित बयानों पर सीएम और अन्य के विरुद्ध मानहानि का केस दाखिल किया गया है कि महिलाएं राजभवन में असुरक्षित महसूस करती हैं. हाल की घटनाओं को देखते हुए, जहां स्त्रियों ने राजभवन से संबंधित आरोपों के साथ कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क किया है, उन्होंने बोला कि स्त्रियों की पीड़ा बताना मुनासिब होगा, खासकर तब जब सीएम स्वयं एक स्त्री हों.
राज्यपाल बोस ने हाई कोर्ट का रुख किया था, जिसने उन्हें ममता बनर्जी के विरुद्ध अपना मानहानि का केस वापस लेने और फिर से दाखिल करने का निर्देश दिया था. राज्य सचिवालय में एक प्रशासनिक बैठक के दौरान, बनर्जी ने 27 जून को बोला था, स्त्रियों ने मुझे सूचित किया है कि वे वहां हाल की घटनाओं के कारण राजभवन जाने से डरती हैं. बनर्जी की टिप्पणी के बाद, गवर्नर ने बोला था कि जन प्रतिनिधियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे “गलत और निंदनीय धारणा” पैदा न करें.

