राष्ट्रीय

पीएचडी प्रवेश परीक्षा में प्रथम स्थान पाने वाले माओवादी नेता अर्नब दाम का जल्द होगा दाखिला

पश्चिम बंगाल के बर्दवान यूनिवर्सिटी में पीएचडी प्रवेश परीक्षा में प्रथम जगह पाने वाले नक्सली नेता अर्नब मूल्य के जल्द ही दाखिला लेने की आसार है. क्योंकि राज्य की तृणमूल गवर्नमेंट ने कुछ प्रशासनिक मुद्दों को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप किया है, जिसके कारण उनका दाखिला रुका हुआ था.Download 11zon 2024 07 14t211329. 849

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हुगली से बर्दवान सुधार गृह में किया जा रहा स्थानांतरित

मामले में राज्य के सुधार प्रशासन मंत्री अखिल गिरि ने बोला कि कई हमलों और हत्याओं के मामलों में आरोपी अर्नब मूल्य को हुगली जिले के सुधार गृह से बर्धमान स्थानांतरित किया जा रहा है और शहर में यूनिवर्सिटी परिसर में उनके दौरे के लिए सुरक्षा प्रदान की जाएगी. मंत्री ने बताया, कि हमने उन्हें हुगली से बर्दवान सुधार गृह में स्थानांतरित करने का निर्णय किया है.

कई हमलों और हत्याओं में आरोपी हैं अर्नब दाम

 

अर्नब मूल्य वर्ष 2010 में झारग्राम जिले के सिलदाह में ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स कैंप पर हमले में अपनी किरदार के लिए जीवन भर जेल की सजा काट रहे हैं. वहीं 2011 में एनकाउंटर में मारे गए नक्सली नेता किशनजी के कथित करीबी सहयोगी होने के साथ उन पर 2010 तक दक्षिण बंगाल के जंगल महल क्षेत्र में कई हमले और मर्डर के मुद्दे दर्ज हैं. अर्नब मूल्य 2012 में अरैस्ट किया गया था.

 

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने किया समर्थन 

 

वहीं नक्सली अत्याचार पीड़ित की मां की तरफ से यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता के रूप में अर्नब मूल्य के नामांकन की सुविधा की मांग का तृण मूल काँग्रेस नेता कुणाल घोष ने समर्थन किया और बोला कि उन्हें यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए नामांकित होने की अनुमति दी जाए, इसके साथ ही साफ किया कि आपराधिक मामलों में कानून के मुताबिक उनके विरुद्ध केस जारी रहना चाहिए. कुणाल घोष एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- हम मर्डर की राजनीति के विरुद्ध हैं. हम अर्नब मूल्य की रिहाई की मांग नहीं कर रहे हैं. लेकिन यदि कोई कारावास में बंद होने के बावजूद उच्च शिक्षा पाना चाहता है, तो क्या यह समाज में आशा की किरण नहीं है?

 

पीएचडी प्रवेश परीक्षा में हासिल किए 75% अंक

 

हुगली जिले के एक सुधार गृह में बंद अर्नब मूल्य ने 26 जून को कड़ी सुरक्षा के बीच परिसर में आयोजित इतिहास में पीएचडी प्रवेश परीक्षा में 75 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए थे. वहीं यूनिवर्सिटी के अंतरिम कुलपति गौतम चंद्र ने कहा- हम अर्नब को पीएचडी स्कॉलर के रूप में अपने यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलाना चाहते हैं, क्योंकि वह प्रवेश परीक्षा में प्रथम जगह पर आया था. लेकिन हमें यूजीसी के कुछ दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. उन्होंने बताया, हमने सुधार गृह के ऑफिसरों को एक मेल भेजा था. जैसे ही हमें उनकी सकारात्मक स्वीकृति मिल जाएगी, हम उसे पीएचडी स्कॉलर के रूप में दाखिला दे देंगे.

बता दें कि हुगली के एक कारावास में बंद नक्सली नेता अर्नब मूल्य ने सुधार गृह में ही रहकर स्नातक और स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की थी.




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