सेवर केंद्रीय कारागृह में माता रानी के भजनों और जयकारों की उठी गूंज
भरतपुर: शारदीय नवरात्र का पर्व इस बार सेवर केंद्रीय कारागृह में विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। कारावास की ऊँची दीवारों के बीच जब माता रानी के भजनों और जयकारों की गूंज उठी, तो परिसर भक्ति में रंग गया। कैदी मां दुर्गा की आराधना और उपवास में लीन नजर आए। कारागृह में इस समय लगभग 800 कैदी निरुद्ध हैं। इनमें से 153 पुरुष और 11 स्त्री कैदी नवरात्र का व्रत रख रहे हैं। प्रशासन ने इन कैदियों के लिए पूजा-पाठ और व्रत की विशेष प्रबंध की है।

कैदियों को फलाहार और व्रत सामग्री मौजूद कराई जा रही है ताकि वे धार्मिक परंपराओं का पालन सरलता से कर सकें। कारावास अधीक्षक परमजीत संधू ने कहा कि नवरात्र के अवसर पर कैदियों को भोजन की अलग प्रबंध की गई है। जिन कैदियों ने उपवास रखा है, उन्हें फल, दूध और अन्य सामग्री दी जा रही है। कारावास कैंटीन में भी पूजा और व्रत की सामग्री मौजूद कराई गई है। कैदी अपनी-अपनी बैरकों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं, वहीं मंदिर परिसर में सामूहिक भजन-कीर्तन और प्रार्थना का आयोजन किया जा रहा है।
कैदियों और प्रशासन की सहभागिता
अधिकारियों के मुताबिक नवरात्र व्रत रखने वाले 153 कैदियों में से 99 अंडरट्रायल हैं, जबकि 54 सजा काट रहे हैं। सभी ने अपने स्तर पर माता की आराधना का संकल्प लिया है। स्त्री बंदियों के लिए भी अलग से व्यवस्थाएं की गई हैं। कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी सहयोग दिया और कैदियों को पूजा सामग्री और फल मौजूद कराए। प्रशासन इन सामग्रियों की जांच कर नियम मुताबिक ही वितरित करता है।
सकारात्मकता का संचार
पूरे कारागृह में नवरात्र का माहौल खास बना हुआ है। दिनभर जयकारे और भजन गूंजते रहते हैं। कैदियों का बोलना है कि ऐसे आयोजनों से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। प्रशासन का मानना है कि धार्मिक गतिविधियों से कैदियों में अनुशासन और आत्मिक शाँति की भावना मजबूत होती है, जिससे उनके व्यवहार में सुधार आता है और वे समाज में लौटने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो पाते हैं। सेवर कारागृह में नवरात्र का यह उत्सव भले ही दीवारों के भीतर मनाया जा रहा हो, लेकिन इसकी गूंज दूर तक सुनाई दे रही है। यह घटना दिखाती है कि धार्मिक आस्था किसी भी सीमा में नहीं बंधती।

