राष्ट्रीय

मायावती ने यूं ही गठबंधन में न जाने का न किया फैसला

सीयासी गलियारों में इस समय मायावती की ओर से किसी भी सियासी दल से गठबंधन न किए जाने की चर्चा सबसे अधिक हो रही है कुछ दिन पहले मायावती ने आने वाले लोकसभा चुनाव में किसी भी सियासी पार्टी और बड़े गठबंधन के साथ चुनाव न लड़ने की बात कही थी ऐसे में सियासी पार्टियों और राजनीति को करीब से समझने वालों के लिए मायावती का यह बयान बड़ी पहेली बना हुआ है दरअसल पहेली इसलिए भी क्योंकि मायावती जब-जब गठबंधन के साथ राजनीतिक मैदान में उतरी हैं तो हमेशा उनका राजनीतिक लाभ ही हुआ है प्रश्न यही उठता है कि आखिर इस राजनीतिक लाभ के बावजूद भी मायावती ऐसा कहकर राजनीति में कौन सा “सेफ गेम” खेल रहीं हैंNewsexpress24. Com bsp download 2023 08 27t135043. 466
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मायावती ने तीन दिन पहले यूपी की राजधानी लखनऊ में आयोजित पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ जब किसी भी सियासी दल के साथ गठबंधन न करने की बात कही तो यह बात सियासी पार्टियों समेत राजनीतिक जानकारों के गले नहीं उतरी सियासी विश्लेषक देवप्रताप सूर्य कहते हैं कि मायावती ने यह बयान पहली बार नहीं दिया है इससे पहले भी वह लगातार किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन में न जाने की बात करती रही है उनका बोलना है कि ऐसा करके मायावती न केवल अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को संदेश दे रही है बल्कि आने वाले चार विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी की हैसियत का भी आकलन करने का पूरा रोड मैप तैयार कर रही हैं सियासी जानकारों का बोलना है कि मायावती इन विधानसभा के चुनावों में मिलने वाले अपने वोट के आधार पर अगली राजनीति की राह बनाने की पुख्ता योजना बना चुकी हैं

सियासी जानकार बताते हैं कि मायावती ने यूं ही गठबंधन में न जाने का निर्णय नहीं किया है जानकारों का मानना है कि बीएसपी की इस समय जो राजनीतिक हैसियत है वह अन्य क्षेत्रीय दलों की तुलना में उतनी मजबूत नहीं है इसीलिए बसपा की बड़ी रणनीति यही है कि अगले कुछ महीनो में होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिलने वाली सीटों और मत फीसदी को बड़ा आधार बनाया जाए राजनीतिक जानकारी का बोलना है कि ऐसा करके मायावती के पास किसी भी बड़े राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने के लिए मजबूत बैकग्राउंड तैयार हो सकेगा सियासी विश्लेषक बलवीर सिंह कहते हैं कि यूपी में बसपा का महज एक विधायक है जबकि एक दौर में मायावती की यूपी में पूर्ण बहुमत की गवर्नमेंट हुआ करती थी बलवीर सिंह कहते हैं कि ऐसी दशाओं में मायावती के पास बड़े राजनीतिक गठबंधन के सामने अपनी शर्तों के आधार पर किसी भी तरह के समझौते की आशा कम नजर आ रही है यदि मायावती के पास इन चार राज्यों में मजबूत जनाधार तैयार होता है तो संभव है कि बसपा अपने वोट बैंक और चार राज्यों में मिलने वाले जनाआधार पर अपनी शर्तों के साथ प्रमुखता से बात कर सके

 

वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र शुक्ला कहते हैं कि मायावती भले ही गठबंधन में न जाने की बात कर रही हूं लेकिन बीएसपी को हमेशा गठबंधन में लाभ ही हुआ है वह कहते हैं 1993 में जब बीएसपी ने सपा के साथ गठबंधन किया तो 12 सीटों से मायावती की पार्टी 67 सीटों पर पहुंच गई 1996 में बसपा में पंजाब में अकाली दल के साथ गठबंधन किया तो तीन लोकसभा सीटें जीत ली 2022 में भी मायावती ने अकाली दल के साथ गठबंधन कर विधानसभा चुनाव में अपने वोट फीसदी के साथ एक प्रत्याशी जिताया पंजाब के अतिरिक्त मायावती ने 2018 में अजीत जोगी के साथ छत्तीसगढ़ में चुनाव लड़ा इस गठबंधन में भी मायावती को लाभ हुआ और दो विधायक जीत गए जबकि कर्नाटक में जेडीएस के साथ बीएसपी ने साझेदारी की और वहां भी एक विधायक की जीत के साथ लाभ के सौदे में रही इसी तरह बिहार में भी गठबंधन की राह पर चलते हुए एक विधायक बीएसपी की झोली में आया शुक्ल कहते हैं कि बीते तीन दशक की राजनीति में बसपा जब-जब गठबंधन के साथ चली है तब तक उसको लाभ हुआ है इसीलिए मायावती का यह बोलना कि वह इन लोकसभा चुनाव में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे सीधे तौर पर गले से बात नीचे नहीं उतर रही है

बहुजन समाज पार्टी से ताल्लुक रखने वाले नेता भी दबी जुबान से मानते हैं कि उनका वोट फीसदी भले कम न हुआ हो लेकिन वह अकेले दम पर लोकसभा के चुनाव में कोई बहुत बड़े उलटफेर करने की हैसियत में नहीं दिख रहे हैं इसलिए अंदर खाने यह बात जरूर उठ रही है कि लोकसभा चुनावों से पहले गठबंधन की नींव रखी जाए हालांकि, गठबंधन पर मायावती अपना रुख अभी पहले ही साफ कर चुकी हैं लेकिन राजनीतिक गलियारों में बोला यही जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले मायावती गठबंधन के रास्ते खोल सकती है सियासी विश्लेषण जीएल वर्मा कहते हैं कि मायावती आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले बहुत ही फूंक फूंक कर राजनीतिक कदम रख रही हैं इसलिए न केवल अपने मतदाताओं को किसी गठबंधन में जाने का संदेश दे रही है बल्कि एक बड़े जनाधार का खाका भी खींच रही हैं


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