राजस्थान के बारां में गहराया मेडिकल संकट, 30 डॉक्टर्स ने एक साथ दिया इस्तीफा
राजस्थान के बारां जिला हॉस्पिटल में राजमेस और सेवारत डॉक्टरों के बीच चल रहा टकराव अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मेडिकल कॉलेज में पदनामित सहायक प्रोफेसर डॉक्टरों ने अनुभव प्रमाण पत्र जारी नहीं होने सहित कई समस्याओं को लेकर सामूहिक रूप से त्याग-पत्र दे दिया है। गुरुवार को बारां मेडिकल कॉलेज में पदनामित सभी 30 डॉक्टरों ने प्रिंसिपल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। टकराव का यदि जल्द कोई निवारण नहीं निकाला गया तो इससे जिले में स्वास्थ्य सेवाएं गड़बड़ाने का अंदेशा हो गया है।

सेवारत डॉक्टर संघ के जिलाध्यक्ष डॉ देवीशंकर नागर ने कहा कि मेडिकल कॉलेज को मान्यता दिलाने के लिए जिला हॉस्पिटल से डॉक्टरों को विभिन्न पदों पर पदनामित कर वहां पदस्थापित किया गया था। लेकिन लंबे समय से उन्हें अनुभव प्रमाण पत्र तक मौजूद नहीं कराया जा रहा है। सिर्फ़ पदनामित कर खानापूर्ति की जा रही है। जबकि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने गाइडलाइन जारी कर रखी है कि डॉक्टरों को नियमानुसार प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के स्थाई पदों पर नियुक्त किया जाए।
मरीजों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं
चिकित्सकों ने इल्जाम लगाया कि हाल ही में राजमेस के माध्यम से नियुक्त हुए डॉकर्क्स के पास क्लिनिकल अनुभव तक नहीं है और उन्हें विभागाध्यक्ष (HOD) बना दिया गया है। वहीं राजमेस के प्रोफेसर और अन्य पदों पर लगे डॉक्टर जिला हॉस्पिटल में ड्यूटी भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद बारां जिले के रोगियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर संकट खड़ा हो सकता है
सेवारत डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे से मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर संकट खड़ा हो सकता है। आनें वाले दिनों में नया शैक्षणिक सत्र प्रारम्भ होने वाला है। ऐसे में कॉलेज प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुलझी तो मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ सकता है। डॉक्टर्स के सामूहिक इस्तीफे से अब मेडिकल विभाग में हड़कंप मचा हुआ है

