राष्ट्रीय

मोदी सरकार ने दिया बयान, किसी राज्य को नहीं मिलेगा स्पेशल स्टेट का दर्जा

लोकसभा चुनाव में ठीकठाक ‘बार्गेनिंग पावर’ हासिल करने के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू फिर से राज्य को स्पेशल स्टेट का दर्जा देने की मांग पर बल दे रहे हैं उनकी इस मांग में बिहार के अन्य दलों ने भी साथ दिया है एनडीए की सहयोगी लोजपा (रामविलास) ने भी बिहार को स्पेशल स्टेट का दर्जा देने की मांग की है लेकिन, केंद्र की मोदी गवर्नमेंट ने साफ तौर पर कह दिया है कि मौजूदा प्रावधानों के अनुसार किसी राज्य को स्पेशल स्टेट का दर्जा नहीं दिया जा सकताPm modi with nitish kumar during election rally 1717573152

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बिहार को स्पेशल स्टेट का दर्जा देने की मांग बहुत पुरानी है साल 2000 में बिहार से अलग झारखंड बनने के बाद से यह मांग हो रही है दरअसल, इसके पीछे का लॉजिक यह है कि बिहार के बंटवारे के समय 90 प्रतिशत उद्योग-धंधे झारखंड के हिस्से में चले गए बिहार के हिस्से में खेती और बाढ़ वाले क्षेत्र आए इससे इसकी आर्थिक स्वास्थ्य पर बड़ा असर पड़ा इस आर्थिक क्षति की भरपाई के लिए केंद्र गवर्नमेंट को बिहार को आर्थिक सहायता करने की आवश्यकता है इन तथ्यों में 100 प्रतिशत सच्चाई है लेकिन, बिहार के बंटवारे और फिर राज्य और केंद्र की सरकारों के बीच सामंजस्य के अभाव की वजह से विशेष राज्य की मांग एक सियासी मामला बन गया

झारखंड की स्थापना और विशेष राज्य
बात आरंभ से करते हैं 15 नवंबर 2000 को झारखंड बनने के समय बिहार में राजद और केंद्र में दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की गवर्नमेंट थी उस समय भी बिहार की तत्कालीन गवर्नमेंट और सीएम राबड़ी देवी ने इसकी मांग उठाई लेकिन, कहीं न कहीं सियासी श्रेय लेने के चक्कर में यह मांग पूरी नहीं हुई फिर 2005 में राज्य में राजद के शासन का अंत हुआ और नीतीश कुमार की प्रतिनिधित्व में जेडीयू-भाजपा की गवर्नमेंट बनी लेकिन, उधर केंद्र में भी सत्ता बदल गई और एनडीए की गवर्नमेंट चली गई 2004 के लोकसभा चुनाव में वाजपेयी के नेतृत्व वाले एनडीए की हार हुई थी फिर मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केंद्र में यूपीए की गवर्नमेंट बनी यहां भी वही पुराना खेल प्रारम्भ हो गया नीतीश मनमोहन गवर्नमेंट से बिहार के लिए विशेष राज्य का दर्जा मांगते रहे लेकिन सियासी श्रेय की लड़ाई में यह मांग कभी पूरी नहीं हुई

मोदी का दौर और विशेष राज्य
2014 में राष्ट्र और बिहार दोनों की राजनीति ने फिर करवट बदली केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की गवर्नमेंट बनी लेकिन, बिहार में जेडीयू का बीजेपी के साथ गठबंधन टूट गया फिर 2015 के विधानसभा में जेडीयू और राजद साथ आ गए इसके बाद नीतीश कुमार कभी बीजेपी तो कभी राजद के साथ पाला बदल-बदलकर अपनी गवर्नमेंट बनाते रहे लेकिन, उनकी विशेष राज्य की मांग को कोई रेट नहीं मिला क्योंकि उस समय केंद्र की मोदी गवर्नमेंट के लिए सहयोगी दलों के समर्थन की कोई अहमियत नहीं थी

ढाई दशक में पहला संयोग
बिहार के बंटवारे के बाद से अब तक करीब ढाई दशक का समय बीत चुका है लेकिन, ऐसा पहली बार कारगर संयोग बना जब लगा कि केंद्र की गवर्नमेंट बिहार के लिए कुछ स्पेशल करने को विवश होगी सियासी परिस्थियों से भी इस मांग में दम दिख रहा था लेकिन, बजट से एक दिन पहले ही केंद्र गवर्नमेंट ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में साफ रूप से कह दिया कि मौजूदा प्रावधानों में किसी राज्य को विशेष दर्जा देने की कोई प्रबंध नहीं है

बिहार की राजनीति में हंगामा
विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने के केंद्र गवर्नमेंट के बयान के बाद बिहार में बवाल मचा हुआ है राजद सुप्रीमो लालू यादव ने सीएम नीतीश कुमार से इस्तीफे तक की मांग कर दी है वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्त केसी त्यागी ने बोला है कि विशेष राज्य का दर्जा बिहार की जनता का अधिकार है उन्होंने बोला कि जेडीयू ने केंद्र गवर्नमेंट को मांग पत्र नहीं, अधिकार पत्र भेजा है हमने बोला है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष सहायता मिलना ही चाहिए ऐसे में प्रश्न उठ रहा है कि ऐसी स्थिति में जेडीयू की राजनीति अब किस करवट बैठेगी

बिहार एनडीए में खटास!
इससे बिहार एनडीए के भीतर भी खटास बढ़ेगी केंद्र की मोदी कैबिनेट में भी जेडीयू को न तो मनचाहा मंत्रालय और न ही मनचाहा मंत्री पद मिला ऐसे में नीतीश के सामने एक ही विकल्प है अपनी पार्टी को मजबूत कर 2025 के विधानसभा की तैयारी इस चुनाव में वह बीजेपी के साथ बराबरी की डील करने पर बल देगी वह 2020 में हुए हानि की भरपाई करना चाहेंगे साथ ही बिहार गवर्नमेंट में वह अधिक ताकत के साथ अपनी जेडीयू की मौजूदगी दर्ज करवाएंगे

फिलहाल की सियासी हालात में नीतीश के एनडीए से अलग होने की आसार काफी कम है क्योंकि उनके निकलने मात्र से मोदी गवर्नमेंट की स्वास्थ्य पर असर नहीं पड़ेगा दूसरी तरफ उनके अलग होने के बावजूद इण्डिया गठबंधन केंद्र में गवर्नमेंट बनाने की स्थिति में हैं

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