मोदी सरकार ने मराठी और बांग्ला सहित पांच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दिया दर्जा
Classical Languages Status: ऐसे मौके बहुत कम देखने को मिलते हैं गवर्नमेंट के विरोधी खेमे के नेताओं की तरफ से गवर्नमेंट के अगुआ यानि पीएम को खुलकर धन्यवाद दिया जाता है। लेकिन लोकतंत्र की यही खूबी है। अब ताजा मुद्दा देखिए मोदी गवर्नमेंट ने मराठी और बांग्ला सहित पांच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया तो उसका धन्यवाद भी गवर्नमेंट के खाते में आया। असल में हुआ यह कि पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई बड़ी योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। साथ ही केंद्रीय कैबिनेट ने पांच और भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की स्वीकृति दे दी है। इनमें मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाएं शामिल हैं।

शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया
असल में मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है। इससे पहले तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है। हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने 12 अक्टूबर 2004 को शास्त्रीय भाषाओं के रूप में भाषाओं की एक नयी श्रेणी बनाने का निर्णय किया था, जिसके अनुसार तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। गवर्नमेंट ने शास्त्रीय भाषा के अनुसार दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे।
चेन्नई मेट्रो परियोजना के लिए स्टालिन ने बोला थैंक्स
इसके अतिरिक्त कैबिनेट की बैठक में तमिलनाडु के लिए भी कुछ घोषणा हुए तो मुख्यमंत्री स्टालिन की तरफ से भी धन्यवाद आ गया। बैठक में चेन्नई मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण के अनुसार तीन गलियारों के निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। परियोजना की लागत 63,246 करोड़ रुपये होगी और इसे 2027 तक पूरा करने की योजना है। दूसरे चरण के पूरी तरह से प्रारम्भ होने के साथ चेन्नई शहर में कुल 173 किलोमीटर का मेट्रो रेल नेटवर्क होगा। निर्णय के बाद स्टालिन ने सोशल मीडिया ओर इसके लिए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया।
ममता बनर्जी ने लिखा कि खुशी है
वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिखा कि खुशी है कि बांग्ला को आखिरकार हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने शास्त्रीय भाषा का दर्जा दे दिया है। हम संस्कृति मंत्रालय, हिंदुस्तान गवर्नमेंट से यह मान्यता प्राप्त करने की प्रयास कर रहे थे। केंद्र गवर्नमेंट ने आज शाम हमारे शोधपूर्ण दावे को स्वीकार कर लिया है और हम आखिरकार हिंदुस्तान में भाषाओं के समूह में सांस्कृतिक शिखर पर पहुंच गए हैं।
पीएम मोदी ने भी जताई ख़ुशी
कैबिनेट के इस निर्णय पर पीएम ने भी खुशी जताई। उन्होंने मराठी, बांग्ला और असमिया सहित पांच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने पर खुशी जताई और बोला कि उनके नेतृत्व वाली गवर्नमेंट क्षेत्रीय भाषाओं को लोकप्रिय बनाने की अपनी प्रतिबद्धता पर अटूट रही है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कई सिलसिलेवार पोस्ट किए और सभी भाषाओं की प्रशंसा भी की।
अब 11 शास्त्रीय भाषाएं, कैसे मिलता है ये दर्जा
बता दें कि केंद्र गवर्नमेंट ने मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषा को ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा दिया। इसके साथ ही अब 11 शास्त्रीय भाषाएं हो जाएंगी। ये दर्जा दिए जाने के कई नियम भी हैं। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार सालों से अधिक का इतिहास देखा जाता है। इसके अतिरिक्त प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के अनुसार नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा जानकार समिति का भी गठन किया था।

