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Mohan Bhagwat: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण को लेकर फिर से दिया सबसे बड़ा बयान

Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को संघ के शताब्दी साल कार्यक्रम के दौरान उनसे जाति आरक्षण को लेकर प्रश्न किया गया , जिसके उत्तर में भागवत ने समाज में जाति आधारित भेदभाव को खत्म करने की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा, संघ पहले से ही संविधान द्वारा प्रदत्त आरक्षण का समर्थन करता है और हमेशा करता रहेगा. और जब तक आरक्षण के लाभार्थियों को यह महसूस नहीं होता कि अब इसकी जरूरत नहीं है, उनका बोलना है कि लोगों को जब तक यह एहसास न हो जाए कि समाज में भेदभाव खत्म हो गया है और वे अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं, तब तक वे आरक्षण का समर्थन करेंगे.

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कमजोर वर्गों को आरक्षण का फायदा यह सुनिश्चित करने के लिए संघ कोशिश करता रहेगा

आगे उन्होंने बोला कि जब बालासाहेब देवरस आरएसएस प्रमुख थे, तब संघ ने आरक्षण के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित किया था. भागवत ने कहा, “जब प्रस्ताव लाया गया था, तो इसे लेकर एकदम भिन्न-भिन्न विरोधी विचार थे. हमारे तत्कालीन आरएसएस प्रमुख बालासाहेब जी ने पूरे सत्र के दौरान विचारों को सुना और कहा, ‘कल्पना कीजिए कि आप ऐसे लोगों के परिवार में पैदा हुए हैं जिन्होंने एक हजार वर्ष तक जातिगत भेदभाव का दर्द झेला है.‘” भागवत ने बोला कि समाज के ऐसे कमजोर वर्गों को आरक्षण का फायदा मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए संघ हमेशा कोशिश करता रहा है. “लेकिन जब हम ऐसा करते हैं, तो लोग कहते हैं कि आरएसएस बीजेपी का वोट बैंक बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहा है. ऐसा नहीं होना चाहिए.

स्वयंसेवक वंचित वर्ग के लोगों के साथ खड़े हैं- भागवत

भागवत से आगे प्रश्न किया गया कि वंचित जाति पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध संघ मजबूती से क्यों नहीं खड़ा दिखता है? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, आरएसएस के स्वयंसेवक वंचित वर्ग के लोगों के साथ खड़े हैं. ‘‘जहां भी ऐसी घटनाएं होती हैं, स्वयंसेवकों का वहां जाना चाहिए. उन्हें सत्य और इन्साफ के लिए खड़ा होना चाहिए और पीड़ितों को इन्साफ सुनिश्चित करना चाहिए. साथ ही ऐसी घटनाओं से समाज में झगड़े न हों, यह सुनिश्चित करना चाहिए. स्वयंसेवकों से यही सब अपेक्षित है और हम इसे हमेशा से करते भी आ रहे हैं. लेकिन, यदि किसी कारणवश ऐसा नहीं होता है, तो यह हमारी गलती है. संघ के क्षेत्रीय स्वयंसेवकों के ध्यान में यह बात लाएं. इसका ध्यान रखा जाएगा.

‘हर कोई समाज का हिस्सा है, कोई ऊंच-नीच नहीं है’- भागवत

मनुस्मृति में वर्ण प्रबंध को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में भागवत ने बोला कि 1972 में कर्नाटक के उडुपी शहर में एकत्रित “सभी धार्मिक नेताओं” ने बोला था कि हिंदू धर्मग्रंथों में छुआछूत के लिए कोई स्थान नहीं है. “यदि ऐसा कोई संदर्भ है, तो हम उसे स्वीकार नहीं करते. हिंदुस्तान में लोग जो चाहते हैं, वही होता है.” उन्होंने बोला कि “हर कोई समाज का हिस्सा है. कोई ऊंच-नीच नहीं है. सबका समान सम्मान है. सब अपने हैं. यह भावना जागृत करनी होगी. यह करना ही होगा. संघ यह कर रहा है.

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