राष्ट्रीय

मॉनसून ने दक्षिण भारत में मचाया हाहाकार

जहां एक तरफ दक्षिण हिंदुस्तान में मॉनसूनी बारिश से त्राहिमांम मचा हुआ है तो वहीं राष्ट्र के पूर्वोत्तर राज्यों में कम बारिश दर्ज की गई है. हालांकि पूर्वोत्तर राज्यों में भी बाढ़, भूस्खलन के कारण 100 से अधिक मौतें हो चुकी हैं. इसके बावजूद, पूर्वोत्तर के अधिकतर राज्यों में इस वर्ष जून और जुलाई में सामान्य से कम बारिश हुई. ये महीने मॉनसून सीजन का पहला भाग कहे जाते हैं.

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भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगस्त और सितंबर में भी यही प्रवृत्ति जारी रहने की आसार है. अगस्त और सितंबर को मॉनसून सीजन का दूसरा भाग बोला जाता है. यदि ऐसा ही रहा तो इससे फसल की पैदावार और बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है. जुलाई के अंत तक अरुणाचल प्रदेश में सामान्य से 19% कम वर्षा हुई. वहीं असम में 5% कम, नागालैंड में 26% कम, मणिपुर में 48% कम तथा मिजोरम और त्रिपुरा में क्रमशः 32% और 11% कम वर्षा हुई.

मेघालय एकमात्र ऐसा पूर्वोत्तर राज्य रहा, जिसने इस वर्ष मॉनसून के पहले दो महीनों में सामान्य से 1% अधिक बारिश दर्ज की. आईएमडी ने इस मौसम में नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम में हुई बारिश को कम बारिश की श्रेणी में रखा है. वहीं अन्य 4 राज्यों में हुई बारिश को सामान्य श्रेणी में रखा है.

गुवाहाटी में आईएमडी कार्यालय के वैज्ञानिक सुनीत दास ने कहा, “पूर्वोत्तर में सामान्य बारिश के आंकड़े हिंदुस्तान के बाकी हिस्सों से अधिक हैं. इसलिए, यदि थोड़ी कम बारिश होती है, तो भी आंकड़े उसे दर्शाते हैं. मई में जारी किए गए मॉनसून के हमारे दीर्घकालिक पूर्वानुमान में पहले ही पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश की भविष्यवाणी की गई थी. इसलिए, यह अपेक्षित था.

आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में सभी पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य से कम बारिश हुई. मेघालय में पिछले महीने 19% कम बारिश दर्ज की गई, मणिपुर में 42% कम, अरुणाचल प्रदेश में 31% कम, असम में 21% कम और मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा में 26% कम बारिश हुई.

दास ने कहा, “आमतौर पर, मॉनसून के कम दबाव के कारण पूर्वोत्तर में सबसे अधिक बारिश होती है. इस सीजन में ऐसा कम हुआ है. यही कम बारिश का एक कारण हो सकता है. ला नीना के असर के कारण अगस्त और सितंबर में भी यह प्रवृत्ति जारी रहेगी.” आईएमडी ने बोला कि अगस्त और सितंबर में राष्ट्र के अधिकतर हिस्सों में सामान्य और सामान्य से अधिक बारिश होने की आशा है, लेकिन पूर्वोत्तर में कम बारिश की प्रवृत्ति जारी रहने की आसार है. गुरुवार को जारी आईएमडी की एक विज्ञप्ति में बोला गया, “पूर्वोत्तर के कई हिस्से और पूर्वी हिंदुस्तान के आसपास के इलाके, लद्दाख, सौराष्ट्र और कच्छ और मध्य और प्रायद्वीपीय हिंदुस्तान के कुछ भिन्न-भिन्न इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने की आसार है.

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