बचपन से ही तंगी और गरीबी में पले एमपी के विधायक डोडियार ने अपनी कहानी की बयां
हिंदुस्तान आदिवासी पार्टी (बाप) और कमलेश्वर डोडियार। हाल ही में संपन्न हुए मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दोनों ही नामों को शायद ही कोई जानता था। लेकिन बीजेपी और कांग्रेस पार्टी के बाद कोई तीसरा दल जीता है तो वो है बाप और इसके प्रत्याशी डोडियार।![]()
रतलाम जिले के सैलाना से आदिवासी सीट पर बाप से कमलेश्वर डोडियार ने जीत हासिल की है। जीत के बाद वे पहली बार भोपाल आए। आए भी तो 350 किमी बाइक चलाकर। बाइक इसलिए क्योंकि कार का व्यवस्था नहीं कर सके। बचपन से ही तंगी और गरीबी में पले डोडियार ने अपनी कहानी News18 Hindi से बयां कीं। वह बताते हैं कि सात वर्ष पहले दिल्ली में कानून की पढ़ाई कर रहा था। पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए पार्टटाइम वेटर की जॉब दिल्ली के आलीशान होटल में की। वहां पार्टियों और शादियों के लिए अलग से लोग बुलाए जाते थे। मेरे पास मौजे नहीं थे। इसलिए बिना मौजे जूते पहनकर चला गया। मैनेजर ने मुझे इस हालात में देखा तो दो थप्पड़ जड़ दिए। मुझे पढ़ाई पूरी करनी थी, इसलिए मैंने चुपचाप अन्याय सहन कर लिया। प्रस्तुत है उनसे वार्ता के अंश सवाल-जवाबों में…
- इतनी भयंकर गरीबी में पढ़ाई कैसे की?
कक्षा 5 तक अपनी स्कूली शिक्षा अपने पैतृक गांव राधाकुवां से की। फिर मैंने पास के शहर सैलाना से कक्षा 8 तक और 2013 तक रतलाम से डिग्री हासिल की। फिर मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी। बीच-बीच में माता-पिता कोटा, अहमदाबाद आदि स्थान मजदूरी करने जाते थे, तो हमें भी जाना होता था। तब भी पढ़ाई ऐसी छूट जाती थी। बाद में शादी और अन्य समारोहों में खानपान सेवाओं के लिए वेटर के रूप में काम किया। लेकिन पढ़ने की ललक थी तो फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। परेशानियां आती रहीं और मैं पढ़ता रहा। फिर भी, एलएलबी के दो पेपर अभी भी क्लीयर नहीं हुए है।
- विधायक बनने का ख्याल कैसे आया?
साल 2009 में बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे। उनके जीवन का देखकर विधायक बनने का ख्याल आया। लेकिन मैंने यह बात किसी को बताने की हौसला नहीं की। मैंने कहीं पढ़ा था कि बराक ओबामा ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एलएलएम किया था। इसलिए 2016 में मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा पास कर एडमिशन ले लिया।
- पढ़ाई के लिए पैसों का व्यवस्था कैसे हुआ
हमारी आदिवासी परंपरा नोतरा मेरे काम आई। इसमें कुछ लोगों ने मुझे पढ़ाई के लिए पैसे दिए। साथ ही मैंने छोटे-मोटे काम भी किए। जैसे नोएडा में सुबह टिफिन बॉक्स बांटना। शनिवार और रविवार को पॉश होटलों में वेटर के रूप में काम करना आदि।
- चुनावी तैयारी कब प्रारम्भ की?
मैं जयस से जुड़ चुका था। इससे पहले, कॉलेज में भी कई संगठनों से जुड़ा था। हम प्रदर्शन करते रहते थे। 2018 में भी चुनाव लड़ा। तब 18 हजार वोट मिले थे। इसके बाद मैं फिर तैयारी में जुट गया। लेकिन मेरे साथ काफी राजनीति हुई।
- आपके विरुद्ध क्या षड्यंत्र हुई?
विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण मेरे पास कई मुद्दे हैं। सबसे लंबे समय तक मैं 2020 में इंदौर कारावास में चार महीने तक रहा हूं। तब मैंने दुष्कर्म की शिकार एक आदिवासी लड़की के लिए विरोध प्रदर्शन किया था। इसमें मुझ पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अनुसार मुद्दा दर्ज किया गया था। बाद में इसे रद्द कर दिया गया। मैं कारावास गया और वहां ऑफिसरों को यह नहीं कहा कि मैंने 2018 में चुनाव लड़ा था, मुझे डर था कि मुझे पीटा जाएगा। मैंने धैर्य बनाए रखा और किसी तरह वहां अपना समय गुजारने में सफल रहा।
- चुनाव प्रचार कैसे किया?
मैंने आपको हमारी परंपरा नोतरा के बारे में कहा था। इसके जरिए लगभग 500 लोगों से 2.38 लाख रुपए एकत्रित किए। दान भी मांगा। किसी ने 5 रुपए दिए तो किसी ने 10 रुपए। इस तरह, 30 हजार रुपए आए। प्रचार में जब थक जाता था तो उसी गांव में सो जाता था। गांव के लोगों से खाना मांगता था और अगले दिन आगे बढ़ जाता था। पूरे अभियान के दौरान मैंने सिर्फ़ 5-7 बार खाना खाया और यहां तक कि 4-5 बार ही नहा पाया। गांव के सभी युवा जो जयस के साथ थे, उन्होंने मेरे लिए काम किया।
- रेप के मुद्दे में मुद्दा क्यों दर्ज हुआ?
मेरी सगाई जिस लड़की से तय हुई थी उसके परिजन कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। वे मेरे जयस के साथ काम करने के विरुद्ध थे, इसलिए विवाह टूट गई। बाद में मैंने दूसरी लड़की से विवाह की तो उसने मुझ पर बलात्कार का मुद्दा दर्ज कर दिया। मैं कारावास में रहा। लेकिन मेरी पत्नी ने पूरा साथ दिया। अग्रिम जमानत के लिए जब मैं इधर-उधर भाग रहा था। तब का एक वाक्या मुझे हिला देता है। जंगल में छिपा हुआ था। तब एक दिन मैंने अपनी पत्नी से कुछ सामान मंगाया। वह वहां आई। तभी यह अफवाह फैल गई कि पुलिस वहां है। मैं नदी में कूद गया। मेरी पत्नी भी बिना डरे मेरे साथ कूद गई।
- चुनाव जीतने पर माता-पिता की क्या प्रतिक्रिया थी?
मां ने बोला कि यह अच्छा है अब मुझे मजदूर के रूप में काम नहीं करना पड़ेगा। और पिता ने बोला कि जीत गए हो, इसलिए अब लोगों की सेवा करो।
- राजनीति में आप क्या करना चाहते हैं?
हमारी पार्टी का मुख्य उद्देश्य अलग भील राज्य की मांग है। मैं पेसा एक्ट, संविधान की अनुसूची 5 और आदिवासी अधिकारों के कार्यान्वयन के लिए काम करूंगा।

