राष्ट्रीय

खतरनाक चक्रवातों से आँख मिलाने का दम रखता है नया पंबन ब्रिज, इतनी आएगी खपत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रामनवमी के अवसर पर तमिलनाडु में नए पंबन ब्रिज – राष्ट्र का पहला वर्टिकल-लिफ्ट समुद्री पुल – का उद्घाटन किया. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने तटरक्षक जहाज को भी हरी झंडी दिखाई – जो पुल के नीचे से गुजरा – और नयी रामेश्वरम-तांबरम (चेन्नई) ट्रेन को भी रवाना किया. श्रीलंका की तीन दिवसीय यात्रा के बाद तमिलनाडु पहुंचे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने रामेश्वरम में रामनाथस्वामी मंदिर में पूजा भी की और राज्य में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न रेल और सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखी.
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नया पंबन ब्रिज
नया पम्बन ब्रिज, 1914 में अंग्रेजों द्वारा निर्मित मूल कैंटिलीवर ब्रिज की स्थान लेगा. 108 सालों से अधिक समय तक, पुराना पम्बन ब्रिज, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और माल परिवहन के लिए एक जरूरी संपर्क के रूप में कार्य करता रहा है, जो अक्सर चक्रवातों और संक्षारक समुद्री मौसम से प्रभावित रहने वाले क्षेत्र में था. दिसंबर 2022 में बंद होने वाले इस मूल पुल में शेरज़र रोलिंग लिफ्ट स्पैन था और इसका रखरखाव करना लगातार कठिन होता जा रहा था. भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचे की जरूरत को समझते हुए, हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने 2019 में नए वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज को स्वीकृति दी.
आरवीएनएल के निदेशक (संचालन) एमपी सिंह ने कहा, “इस पुल के हर पहलू की विस्तार से जाँच की गई. इसे अगले 100 सालों तक 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ट्रेनें चलाने के लिए संरचनात्मक रूप से सुरक्षित घोषित किया गया है.
पुल हिंदुस्तान की इंजीनियरिंग क्षमता और दूरदर्शी बुनियादी ढांचे के विकास का प्रमाण
रेल मंत्रालय के अनुसार, तमिलनाडु में पाक जलडमरूमध्य पर बना 2.07 किलोमीटर लंबा यह पुल हिंदुस्तान की इंजीनियरिंग क्षमता और दूरदर्शी बुनियादी ढांचे के विकास का प्रमाण है. रामनाथपुरम जिले में स्थित यह पुल रामेश्वरम द्वीप को मुख्य भूमि पर मंडपम से जोड़ता है. रेल मंत्रालय के अनुसार एक नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम – रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित इस पुल में 72.5 मीटर का नौवहन विस्तार है जिसे लंबवत रूप से 17 मीटर तक उठाया जा सकता है, जिससे जहाज सुरक्षित रूप से नीचे से गुजर सकते हैं.
शक्तिशाली चक्रवातों का सामना कर सकता है पंबन ब्रिज?
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बोला नया पंबन ब्रिज 1964 के चक्रवात से भी ज़्यादा ताकतवर चक्रवातों का सामना कर सकता है, जिसने पुराने पुल को काफ़ी हानि पहुँचाया था. रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के निदेशक (संचालन) एमपी सिंह ने बोला कि इस पुल को 230 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा की गति और भूकंपीय भार को झेलने के लिए डिज़ाइन किया गया है. उन्होंने मीडिया से कहा, “1964 के चक्रवात की हवा की गति लगभग 160 किलोमीटर प्रति घंटे थी और इसने पुराने पुल को काफ़ी हानि पहुँचाया था. हालाँकि, शेरज़र स्पैन, जिसे जहाज़ों की आवाजाही के लिए खोला जाता था, चक्रवात से बच गया और उसे कोई हानि नहीं पहुँचा.” उन्होंने कहा, “और हमने यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त तरीका किए कि उच्च तीव्रता वाले चक्रवात पुल को कोई हानि न पहुँचा सकें.” आरवीएनएल इस तरह के पहले वर्टिकल लिफ्ट स्पैनर ब्रिज की योजना, डिजाइन, क्रियान्वयन और कमीशनिंग के लिए उत्तरदायी है. सिंह ने बोला कि यह उन प्रमुख कारकों में से एक था जिसने डिजाइन चरण में हमें चुनौती दी.
लिफ्ट स्पैनर हर समय बैठी हुई स्थिति में रहेगा
इसके अलावा, कुछ सुरक्षा प्रोटोकॉल भी हैं. उदाहरण के लिए, लिफ्ट स्पैनर हर समय बैठी हुई स्थिति में रहेगा और सिर्फ़ जहाजों की आवाजाही के समय ही उठाया जाएगा. सिंह ने बोला कि कंक्रीट के खंभों पर रखे गए गर्डर समुद्र के जल स्तर से 4.8 मीटर ऊंचे हैं, इसलिए उच्च ज्वार की स्थिति में भी, गर्डर तक पानी के स्तर के पहुंचने की आसार लगभग नगण्य है. उन्होंने कहा, “पुराने पुल का गर्डर समुद्र के जल स्तर से 2.1 मीटर ऊंचा था, इसलिए उच्च ज्वार के दौरान, पानी न सिर्फ़ गर्डरों पर बल्कि कभी-कभी ट्रैक पर भी छलकता था.

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