नई तकनीक! अब माता-पिता डिजाइन कर सकते हैं खुद का बच्चा
आज विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि बिना पारंपरिक ढंग से एग (Egg) और शुक्राणु (Sperm) निकाले भी बच्चा पैदा किया जा सकता है। यह क्रांतिकारी तकनीक इन-विट्रो गेमेटोजेनेसिस (IVG) कहलाती है। इसमें आदमी की त्वचा, बाल या खून से स्टेम सेल लिए जाते हैं और इन्हें एग या शुक्राणु में बदल दिया जाता है। फिर इन्हें निषेचित कर भ्रूण (Embryo) बनाया जाता है, जिसे किसी स्त्री के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस तरह बिना प्राकृतिक प्रक्रिया के भी बच्चा जन्म ले सकता है।

बांझपन से जूझ रहे दंपतियों को मिलेगी राहत
यह तकनीक उन दंपतियों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जो संतान पैदा करने में असमर्थ हैं। साथ ही, जिन मर्दों में शुक्राणु की संख्या कम होती है या जिन स्त्रियों के एग कमजोर होते हैं, वे भी अपनी स्वयं की संतान प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में स्टेम सेल स्वयं को दोहरा सकते हैं और किसी भी तरह की कोशिका का रूप ले सकते हैं। यह तकनीक परंपरागत आईवीएफ (IVF) से भी अधिक कारगर हो सकती है।
‘डिजाइनर’ बच्चों का सपना होगा साकार?
अगर यह सब कल्पना जैसा लगता है, तो बता दें कि जापान के क्यूशू यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक चूहों पर इस तकनीक को सफलतापूर्वक आजमा चुके हैं। ब्रिटेन के फर्टिलिटी वॉचडॉग, ह्यूमन फर्टिलाइजेशन एंड एंब्रायो अथॉरिटी का मानना है कि अगले तीन वर्षों में इंसानों पर भी इसका परीक्षण संभव हो सकता है। हिंदुस्तान में जानकारों की इस तकनीक पर मिली-जुली प्रतिक्रिया है, क्योंकि यह मौजूदा आईवीएफ तकनीक से काफी अलग है।
क्या हिंदुस्तान में IVG से बच्चा पैदा करना संभव होगा?
इंदिरा आईवीएफ समूह के सीईओ डाक्टर क्षितिज मुरडिया के अनुसार, यह तकनीक हिंदुस्तान के लिए बहुत जरूरी साबित हो सकती है। एक शोध के मुताबिक, भारतीय स्त्रियों की प्रजनन उम्र पश्चिमी राष्ट्रों की स्त्रियों की तुलना में छह वर्ष अधिक हो गई है, वहीं मर्दों में शुक्राणु की संख्या भी तेजी से घट रही है। ऐसे में IVG उन राष्ट्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जो जनसंख्या गिरावट से जूझ रहे हैं।
मां बनने की उम्र पर नहीं रहेगा दबाव
IVG तकनीक से स्त्रियों को अपने जीवन में किसी भी समय संतान उत्पन्न करने की आजादी मिलेगी। सामान्यतः एक स्त्री की उम्र बढ़ने के साथ एगओं की गुणवत्ता और संख्या घट जाती है। लेकिन IVG में स्टेम सेल से किसी भी उम्र में उच्च गुणवत्ता वाले एग बनाए जा सकते हैं। इससे बार-बार हार्मोनल इंजेक्शन लेने की आवश्यकता नहीं होगी और एक ही बार में अधिक स्वस्थ भ्रूण तैयार किए जा सकेंगे

