राष्ट्रीय

Pahalgam Attack में मौजूद निकला ISI, सबूतों की तलाश में जुटे हैं अधिकारी…

एनआईए ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद से आतंकवादी षड्यंत्र का पता लगाने के लिए सबूतों की तलाश तेज कर दी थी और अब जो तथ्य सामने आ रहे हैं वह इस हमले के पीछे पाक की आईएसआई का हाथ होने की ओर पूरा इशारा कर रहे हैं. हम आपको बता दें कि पहलगाम नरसंहार के पीछे पाकिस्तानी आतंकी हाशिम मूसा का हाथ होने की बात सामने आई है. वह पाक सेना की स्पेशल फोर्सेज का पूर्व पैरा कमांडो हैं.
27 04 2025 pahalgam attack 1 23926789
WhatsApp Group Join Now
हाशिम मूसा अब पाक आधारित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के साथ काम कर रहा एक कट्टर आतंकी हैं. उसको LeT के मास्टरमाइंड्स ने एक विशेष मिशन पर कश्मीर भेजा था ताकि गैर-स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों पर आतंकी हमले किए जा सकें. सुरक्षा प्रतिष्ठान के एक अधिकारी ने कहा, “यह संभव है कि उन्हें पाक की स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) जैसी स्पेशल फोर्सेज द्वारा लश्कर-ए-तैयबा को अस्थायी रूप से सौंपा गया हो.
हम आपको बता दें कि SSG के पैरा-कमांडो असाधारण युद्ध कौशल में प्रशिक्षित होते हैं और गुप्त अभियानों में विशेषज्ञता रखते हैं. उनका सख्त और सघन प्रशिक्षण शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और रणनीतिक सोच पर केंद्रित होता है. SSG कमांडो अत्याधुनिक हथियारों के संचालन और हाथों-हाथ मुकाबले में माहिर होते हैं और उनमें उच्च स्तर की नेविगेशन और जीवित रहने की क्षमता होती है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मूसा की पाक सेना की पृष्ठभूमि की पुष्टि उन 15 कश्मीरी ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) से पूछताछ के दौरान हुई है, जो पहलगाम हमले की जांच में प्रमुख संदिग्ध बनकर सामने आए हैं. इन OGWs ने पाकिस्तानी हमलावरों को लॉजिस्टिक्स मौजूद कराए और रेकी (जासूसी) में सहायता की थी. इसे पहलगाम आतंकवादी हमले में ISI की किरदार के सबूत के रूप में देखा जा रहा है, साथ ही कश्मीर में पहले हुए हमलों में भी ISI की संलिप्तता के प्रमाण के तौर पर देखा जा रहा है. इन हमलों में अक्टूबर 2024 में गगनगीर, गांदरबल में हुआ धावा शामिल है जिसमें 6 गैर-स्थानीय नागरिक और एक चिकित्सक मारे गए थे. इसके अतिरिक्त बारामुला में हुआ हमले में भी उनकी संलिप्तता बताई जा रही है जिसमें दो सैनिक और सेना के दो पोर्टर मारे गए थे.
मूसा इन तीनों हमलों में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया है. इसके अलावा, जावेद अहमद भट और अरबाज़ मीर दो अन्य क्षेत्रीय आतंकी जो पाक में प्रशिक्षित थे, वह भी गगनगीर और बारामूला हमलों में शामिल थे, लेकिन उन्हें नवंबर और दिसंबर 2024 में सुरक्षा बलों के साथ भिन्न-भिन्न मुठभेड़ों में मार गिराया गया. मूसा इसके बाद से कश्मीर में गैर-स्थानीय लोगों को निशाना बनाने के अपने आतंकवादी मिशन को आगे बढ़ाने में जुट गया था और बैसरन में 26 नागरिकों जिनमें 25 पर्यटक शामिल थे, की मर्डर कर बड़ी वारदात को अंजाम दिया.
हम आपको यह भी बता दें कि पहलगाम हमले की जांच से दक्षिण कश्मीर में OGWs और आतंकी मददगारों के एक क्षेत्रीय नेटवर्क की संलिप्तता का भी खुलासा हुआ है, जिन्होंने हमलावरों का मार्गदर्शन किया, उन्हें आश्रय मौजूद कराया और संभवतः हमले में प्रयुक्त हथियारों को लाने ले जाने में भी सहायता की. कहा जा रहा है कि हमले की स्थान का विस्तृत सर्वेक्षण क्षेत्रीय लोगों की सहायता से किया गया. इस दौरान आतंकियों के हमले से पहले और बाद में छिपने के स्थानों की पहचान की गई. हम आपको बता दें कि अब तक की जानकारी में दो पाकिस्तानी आतंकवादियों- हाशिम मूसा और अली भाई और दो क्षेत्रीय आतंकियों- आदिल ठोकर और आसिफ शेख की किरदार की पुष्टि हुई है, जबकि OGWs से पूछताछ के दौरान और भी पाकिस्तानी आतंकियों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं.
हम आपको यह भी बता दें कि एनआईए की एक टीम सबूत जुटाने के लिए गत बुधवार से ही आतंकवादी हमले वाली स्थान पर डेरा डाले हुए हैं. एनआईए के एक बयान में बोला गया, ‘‘एनआईए की टीम आतंकियों के बारे में सुराग हासिल करने के लिए प्रवेश और निकास बिंदुओं की गहन जांच कर रही हैं. फॉरेंसिक और अन्य जानकारों की सहायता से टीम पूरे क्षेत्र की गहन जांच कर रही हैं, ताकि उस आतंकवादी षड्यंत्र का भंडाफोड़ किया जा सके, जिसके कारण यह भयावह धावा हुआ. इस हमले ने राष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है.’’ हम आपको बता दें कि कश्मीर में हुए सबसे भयंकर आतंकी हमलों में से एक को अंजाम देने वाले घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों से भी बारीकी से पूछताछ की जा रही है.
अधिकारियों ने कहा कि एनआईए ऑफिसरों की भिन्न-भिन्न टीम आतंकी हमले में जीवित बचे लोगों से जानकारी लेने के लिए राष्ट्र भर का दौरा कर रही हैं. कहा जा रहा है कि यह धावा पाक स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) द्वारा कराया गया था. उन्होंने कहा कि एनआईए की टीम ने महाराष्ट्र, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में पीड़ितों के परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए हैं. उन्होंने कहा कि इस बेरहमी से आतंकी हमले की प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि इसमें शामिल आतंकियों की संख्या पांच से सात तक थी. ऑफिसरों ने कहा कि हमलावरों को पाक में प्रशिक्षण प्राप्त कम से कम दो क्षेत्रीय आतंकियों से भी सहायता मिली थी.
सुरक्षा एजेंसियों ने हमले में संलिप्तता के शक में तीन आतंकियों के रेखाचित्र जारी किए हैं. उन्होंने कहा कि तीनों पाकिस्तानी हैं और इनके नाम आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबू तल्हा हैं. जम्मू और कश्मीर पुलिस ने आतंकियों के बारे में सूचना देने वाले को 20-20 लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है. ऑफिसरों ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा कि जांच से पता चला है कि आतंकियों ने अपने बर्बर कृत्य को रिकॉर्ड करने के लिए ‘बॉडी कैमरों’ का इस्तेमाल किया था.

Back to top button