राष्ट्रीय
पहलगाम आतंकी हमला : आतंकवादियों ने निहत्थे पर्यटकों को बनाया निशाना
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की वजह से राष्ट्र में गुस्सा और गम है. इस आतंकवादी हमले में 28 आम नागरिक मारे गए हैं. आतंकियों ने निहत्थे पर्यटकों को निशाना बनाया और अपनी कायराना हरकत को अंजाम दिया. इसके बाद से राष्ट्र के हर कोने में पाक के विरुद्ध नफरत और भी बढ़ गया है. इस हमले को अंजाम देने के लिए पाक समर्थित आतंकियों का नाम सामने आ रहा है. हालांकि भारतीय सुरक्षा बलों के जवान अब इस हमले का बदला लेने के लिए पूरी ढंग से जुट गए हैं. वह लगातार कश्मीर के भिन्न-भिन्न हिस्सों में एंटी टेरर ऑपरेशन चला रहे हैं.

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इस आतंकवादी हमले ने कश्मीर को एक बार फिर से पीछे धकेलने का काम किया है. यह केवल एक धावा नहीं बल्कि आम कश्मीरी की पेट पर लात है. जिन कश्मीरियों की जीवन पर्यटन के भरोसे चलती थी, उन्हें अब परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद से ही घाटी के भिन्न-भिन्न हिस्सों में उपस्थित हजारों की संख्या में जो पर्यटक थे, उन में डर व्याप्त हो गया है. वह हर हाल में अपने घर को लौटना चाहते हैं. इतना ही नहीं, जो घाटी कल तक पर्यटकों से गुलजार थी, आज वहां वीरानगी है. होटल खाली पड़े हैं। ढाबे खाली पड़े हैं. आम कश्मीरी भी अपना दर्द बताते दिखाई दे रहे हैं.
स्थानीय निवासी उमर ने कहा, “हम इस समय संकट में हैं… हमें हानि हुआ है. यह सभी का हानि है. हम उन लोगों के लिए बहुत दुखी हैं जिन्होंने अपनी जान गंवाई, हम भी परेशान हैं, हमारे मेहमान भी परेशान हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए था.” क्षेत्रीय निवासी मोहम्मद उमर ने बोला कि यह हमारे लिए बहुत बड़ी क्षति है. हमारा सारा काम छिन गया है. हम परेशान हैं. हमारी आय का साधन हमसे छीन लिया गया है. हम इन्साफ चाहते हैं….“
धारा 370 हटने के बाद जब बोला जा रहा था कि कश्मीर में पर्यटन को लगातार बढ़ावा मिल रहा है. ऐसे में इस घटना ने पर्यटन को एक बार फिर से प्रभावित किया है. आम कश्मीरी से उनका रोजगार छिन सकता है. हमले के तुरंत बाद, ट्रैवल एजेंटों को कश्मीर की आनें वाले यात्रा योजनाओं के लिए रद्दीकरण निवेदन मिलने लगे. पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले ने घाटी के पर्यटन क्षेत्र को प्रभावित किया है, जिसने 2018 से लगातार वृद्धि दिखाई है और इसे जम्मू और कश्मीर में सामान्य स्थिति का सबसे जरूरी संकेतक माना जाता है.
आतंकवादियों ने घाटी में पर्यटन के चरम मौसम को चुना, जब घास के मैदान और मुगल उद्यान वसंत का आनंद लेने के लिए हजारों आगंतुकों को आकर्षित करते हैं. यह एक ऐसे गंतव्य पर भी हुआ जो हर पर्यटक के यात्रा कार्यक्रम में शामिल है – दक्षिण कश्मीर में पहलगाम. पहलगाम कई कारणों से जरूरी है – यह अमरनाथ गुफा के लिए दो मार्गों में से एक के रूप में कार्य करता है, जो हर वर्ष लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है, और यह बैसरन देवदार के जंगल का घर है, जो एक लोकप्रिय ट्रैकिंग मार्ग है.
उद्योग के अंदरूनी सूत्रों का बोलना है कि इस हमले का इस क्षेत्र पर जरूरी असर पड़ेगा, जो धीरे-धीरे आतंकवादी हमलों की लंबी छाया से बाहर निकल रहा था. ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर के अध्यक्ष रऊफ ट्रंबू ने हमले को बहुत बड़ा झटका बताया. उन्होंने बोला कि पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र में “शांतिपूर्ण स्थिति” के कारण वृद्धि देखी गई, लेकिन अब “हमें व्यवसायों और उपभोक्ता भागीदारों से रद्दीकरण के बारे में पूछताछ प्राप्त हो रही है”.
सरकार जम्मू और कश्मीर को पर्यटन के अनुकूल गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने में एक्टिव रही है. मई 2023 में, श्रीनगर ने तीसरी जी20 पर्यटन कार्य समूह बैठक की मेजबानी की, जिसमें कम से कम 60 विदेशी प्रतिनिधियों ने भाग लिया. पिछले कुछ सालों में, कश्मीर में कार्यक्रमों की मेजबानी को प्रोत्साहित करने के लिए एक नयी नीति पेश की गई थी, और जम्मू और कश्मीर में फिल्मों की शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए एक फिल्म नीति विकसित की गई थी. लेफ्टिनेंट-गवर्नर मनोज सिन्हा ने भी पर्यटन संख्या को शांति का प्रमुख संकेतक कहा है. 19 अप्रैल को, उन्होंने श्रीनगर में बोला कि जम्मू और कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद का कोई भविष्य नहीं है. इससे पहले, उन्होंने बोला था, “जम्मू कश्मीर में अमन, चैन और शांति, पर्यटन के रास्ते ही बहाल हो सकती है.”