पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बताया, क्यों करते हैं हिंदू राष्ट्र की बात, बोले- मुस्लिमों से कोई प्रॉब्लम नहीं…
Bageshwar Dham: बागेश्वर धाम प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मीडिया के साथ खास वार्ता की। इस दौरान, उन्होंने हमसे विभिन्न विषयों पर बात की। बागेश्वरधाम से प्रश्न किया गया कि आपको सेकुलर से क्या प्रॉब्लम है। तो उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान में हिंदू घट रहा हैं, मुसलमान बढ़ रहे हैं क्योंकि इस राष्ट्र को प्रायोजित ढंग से सेकुलर बना दिया गया। हमको सेकुलर शब्द से प्रॉब्लम है, या तो आप इस ओर रहो या फिर उस ओर, आप या तो मेरा विरोध कर लो या मेरी प्रशंसा कर लो, बीच में रहने का क्या मतलब है।

धीरेंद्र शास्त्री ने आगे बोला कि हम मुसलमान समुदाय के एकदम भी विरोधी नहीं है। हम मुसलमान पक्ष के विरोधी होते तो हम कलाम जी के बारे में नहीं बताते, हम मुसलमान विरोधी होते तो रहीम रसखान के दोहे नहीं गाते। हम मुसलमान विरोधी होते तो हम इनके देवी-देवताओं पर टिप्पणी करते। हमने कभी ये मांग नहीं की कि राष्ट्र में केवल हिंदू रहें। हमारी परेशानी उनसे है, जिन्होंने मजहब के आधार पर पाक के लिए हिंदुस्तान में रहकर आवाज उठाई। लेकिन जब पाक अलग हो गया तो वे पाक गए क्यों नहीं।
सवाल- आप हिंदू देश क्यों बनाना चाहते हैं?
जवाब- वैचारिक एकता लाएंगे, जातिवाद से ऊपर उठाएंगे, गऊ माता को देश माता बनाएंगे, बूचड़खाने बंद करवाएंगे, रामचरितमानस को नहीं जलाने देंगे, गुरुकुलम की स्थापना होगी, हिंदू-मुस्लिम दंगा समाप्त हो जाएगा, हिंदू-मुस्लिम सब साथ में रहेंगे। हम कागजों में हिंदू देश नहीं चाहते, हम विचारों से हिंदू देश चाहते हैं। विचारों में हिंदू देश होगा तो हिंदू घटेगा नहीं। हिंदू पलायन नहीं करेगा। हिंदू धर्मांतरण नहीं करेगा। हिंदू मिटेगा नहीं। हम हिंदुओं में संस्कृति भरना चाहते हैं। हम उनमें संस्कार भरना चाहते हैं।
आप घोड़ी कब चढ़ेंगे?
इस प्रश्न पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- मैं आप लोगों को हंसते-खेलते अच्छा नहीं लगता क्या। हमसे पीएम मोदी ने भी बोला था कि वे हमारी विवाह में आएंगे। घरवाले विवाह के लिए कहते रहते हैं, हमने बोला देख लीजिए। लेकिन हमें कभी कभार डर लगता है। हम विवाह करेंगे ये तो पक्का है। विवाह में देरी होने के कारण वाले प्रश्न पर उन्होंने बोला कि कुछ ऐसे सपने हैं, जिन्हें हम जगते हुए देख रहे हैं। हम 2027 में हॉस्पिटल के उद्घाटन का सपना देख रहे हैं।

