बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे को लेकर आपस में भिड़ गई पार्टियां
बिहार में इस वर्ष के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के पुनरीक्षण के निर्णय ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है. आयोग ने जुलाई से मतदाता सूची को अपडेट करने का फैसला लिया है, लेकिन इस निर्णय पर विपक्ष ने गंभीर विरोध जताते हुए कई प्रश्न खड़े किए हैं.

विपक्षी नेताओं का विरोध
राजद नेता तेजस्वी यादव, जो इण्डिया गठबंधन के अहम चेहरा हैं, ने इस कदम को चुनावी राज्य में मतदाता हेरफेर का कोशिश करार दिया. तेजस्वी ने बोला वहीं, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इसे NRC जैसा कदम करार दिया और बोला क अब इस विरोध में AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े हैं. ओवैसी ने तीखा धावा बोलते हुए कहा:
निर्वाचन आयोग का पक्ष
हालांकि निर्वाचन आयोग ने अपने निर्णय को स्वाभाविक प्रक्रिया कहा है.
बिहार में इस बार का विधानसभा चुनाव काफी अहम बताया जा रहा है, क्योंकि एक ओर जहां एनडीए के योगदान से सीएम नीतीश कुमार फिर सत्ता में वापसी की प्रयास में हैं, वहीं दूसरी ओर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में इण्डिया गठबंधन एकजुट होकर मुकाबले में है. ऐसे में वोटर लिस्ट में संशोधन को लेकर भरोसे और पारदर्शिता का प्रश्न उठ गया है.

