पीएम मोदी ने राजा राममोहन राय से की खुद की तुलना, बोले…
सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के गढ़ रहे इटावा में पीएम मोदी ने एक बार फिर वंशवाद की राजनीति पर प्रहार करते हुए कहा कि राजा राममोहन राय ने जिस तरह सती प्रथा का अंत किया था वैसे ही उन्होंने भी राजघरानों की राजनीति वाली प्रथा समाप्त कर दी है. उन्होंने बोला कि पहले राज घरानों के लोग मुख्यमंत्री बन जाते थे लेकिन आज गरीब का बेटा भी ऐसे पद पर पहुंच सकता है. इटावा में पीएम मोदी मैनपुरी और कन्नौज की जनता को भी संबोधित कर रहे थे. वहीं तीनों ही सीटों के बीजेपी प्रत्याशी भी मंच पर उपस्थित थे.

बता दें कि मैनपुरी दिवंगत मुलायम सिंह यादव की लोकसभा सीट हुआ करती थी. इस बार यहां से उनकी बहू और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव मैदान में हैं. वहीं कन्नौज सीट से इस बार अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे थे. अब तक कन्नौज से डिंपल यादव सांसद थीं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से मुलायम सिंह यादव को भी याद किया और बोला कि 2019 के चुनाव से पहले उन्होंने संसद में जो आशीर्वाद दिया था वह वरदान बन गया. उन्होंने बोला था कि मोदी दोबारा पीएम बनेंगे. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, आज नेताजी हमारे बीच नहीं हैं. लेकिन संयोग देखिए कि आज उनके भाई बीजेपी की जीत के लिए अपील कर रहे हैं. उन्होंने आखिरकार अपनी दिली ख़्वाहिश जता दी. बता दें कि कुछ दिन पहले ही शिवपाल यादव की जुबान फिसल गई थी और उन्होंने एसपी की स्थान बीजेपी को वोट देने की बात कह दी थी.
प्रधानमंत्री ने कहा, जिस तरह कुछ लोग रायबरेली और अमेठी को अपनी प्रॉपर्टी मानते हैं उसी तरह ये लोग मैनपुरी, कन्नौज और इटावा को अपनी संपत्ति मान बैठे हैं. लेकिन मोदी गरीबों के बारे में सोचता है. मोदी की जिम्मेदारी हैकि राष्ट्र के हर माता और बहन को शौचालय मिले. दलितों और वंचितों को बिजली और पानी की सुविधा मिले. गरीबों को निःशुल्क में राशन मिले. मोदी की जिम्मेदारी सबके लिए हैं. क्या पता आपके बीच से ही कोई 2047 में पीएम और सीएम बन जाए. इस चायवाले ने उस प्रथा को समाप्त कर दिया जिसमें राजा का बेटा ही पीएम और मुख्यमंत्री बनता था.
उन्होंने कहा, जिस तरह से राजा राममोहन राय ने सती प्रथा का अंत किया था उसी तरह कभी चर्चा होगी कि एक चायवाला पीएम बना था. उसने ऐसी बुराई को समाप्त किया था कि आज गरीब का बेटा भी सीएम और पीएम की कुर्सी तक पहुंच सकता है.

