पीएम मोदी ने चीन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा…
अमेरिका के विलममिंग्टन डेलावेयर में आयोजित क्वाड शिखर सम्मेलन की आरंभ करते हुए पीएम मोदी ने चीन को सुना दिया है. उन्होंने बोला कि क्वाड लंबे समय तक टिकने और स्वीकार करने के लिए है. यह किसी के विरुद्ध नहीं है. पीएम ने बोला कि यह अंतर्राष्ट्रीय प्रबंध के लिए नियमों पर आधारित संगठन है और संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान और सभी मसलों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का समर्थन करता है.

संघर्षों का शांतिपूर्ण निवारण चाहता है क्वाड
पीएम मोदीन ने चीन को साफ संदेश देते हुए बोला कि यह संगठन चल रहे संघर्षों का शांतिपूर्ण निवारण चाहता है. उन्होंने कहा, ‘हमारी बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विश्व तनावों से घिरा हुआ है. ऐसे में साझा डेमोक्रेटिक वैल्यूज के आधार पर क्वाड का मिलकर साथ चलना इन्सानियत के लिए जरूरी है. हम किसी के विरुद्ध नहीं हैं. हम रूल बेस्ड इंटरनेशल ऑर्डर संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान और सभी मसलों के शांतिपूर्ण ढंग से हल निकालने का समर्थन करते हैं. फ्री, ओपन, इनक्लूजिव और समृद्ध हिंद प्रशांत ही हमारी साझा प्रतिबद्धता है. हमने मिलकर स्वास्थ्य, सुरक्षा, क्रिटिकल ऐंड इमर्जिंग टेक्नॉलजी, कपैसिटी बिल्डिंग, क्लाइमेट चेंज जैसे क्षेत्रों में कई सकारात्मक और समावेशी इनेशेटिव लिए हैं. हमारा संदेश साफ है क्वाड योगदान के लिए है . 2025 में क्वाड लीडर्स समिट का आयोजन हिंदुस्तान में करने में हमें खुशी होगी.‘
भारत की खूब हुई तारीफ
क्वाड के नेताओं ने हिंद महासागर में हिंदुस्तान की किरदार को लेकर पीएम मोदी और हिंदुस्तान की जमकर प्रशंसा की. जापान के पीएम किशिदा ने वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट के आयोजन का समर्थन करने की बात कही. वहीं ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बानीज ने बोला कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हिंद महासागर में महाशक्ति बनकर उभरा है. राष्ट्रपति बाइडेन ने बोला कि अमेरिका को भी हिंदुस्तान के अनुभवों से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्वाड को वैश्विक भलाई की शक्ति बताया. उन्होंने बोला कि क्वाड लंबे समय तक टिकने और स्वीकार किए जाने के लिए है.
चीन को उत्तर देने के लिए ही बना है क्वाड
बता दें कि इस वर्ष क्वाड लीडर्स समिट हिंदुस्तान में ही होने वाली थी लेकिन जो बाइडेन इसे अपना गृह प्रांत में करवाना चाहते थे. जो बाइडेन का कार्यकाल जल्द ही समाप्त होने वाला है. अमेरिका में नवंबर में ही राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं. बता दें कि इस चतुष्कोणीय गठबंधन का गठन ही चीन को उत्तर देने के लिए किया गया है. हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक रवैये को देखते हुए भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान साथ आए हैं. 2017 में चारों राष्ट्रों ने मिलकर संगठन बनाया और इस संगठन से चीन चिढ़ता है. क्वाड देशों, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, हिंदुस्तान और जापान ने एक स्वर में दक्षिण चीन सागर को लेकर चिंता जताई है. बीजिंग का बिना नाम लिए क्वाड के डेक्लेरेशन में बोला गया, पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर की स्थिति को लेकर पर हम गंभीर हैं.

