पुलिस ने किया वाहन चोर गैंग का भंडाफोड़, जब्त की 1 दर्जन से ज्यादा बाइकें
गाड़ी चोर गैंग को पुलिस ने पकड़ा है. गैंग ऑन डिमांड गाड़ी चुराती थी. आरोपी बस से गाड़ी चोरी करने इंदौर आते थे. चोरी के गाड़ी मैकेनिक की सहायता से ठिकाने लगा देते थे. आरोपियों के पास से पुलिस ने चोरी की एक दर्जन से अधिक बाइक बरामद की है.

संयोगितागंज थाना पुलिस को जानकारी मिली की देवास, शाजापुर, राजगढ़ से जुड़ी ऑन डिमांड गाड़ी चोर गैंग के चोर आकर विभिन्न जगहों पर गाड़ी चोरी कर रहे है. गैंग की धड़पकड़ के लिए टीम बनाई गई. टेक्नीकल सबूतों के आधार पर देवास में सामान्य लोगों की तरह रहकर पुलिस ने जानकारी जुटाई गई. चोरों को पकड़ने दबिश दी.
इस दौरान दीपक पिता पोपसिंह राजपूत निवासी नागपचलाना टोंकखुर्द देवास को पकड़ा. पूछताछ में उसने कहा कि गाड़ी चोरी करने के लिए देवास और राजगढ़ जिले से इंदौर बस से पहुंचते थे. सरवटे बस स्टैंड पर उतर नजदीकी स्थान पर जैसे दवाबाजार, चिड़ियाघर, नवलखा, गुरुवारिया हाट, एमवायएच असपताल को टारगेट करते.
फिर अपने साथी मैकेनिक धर्मसिंह पिता अमरसिंह जाटव निवासी ग्राम वाबडीखेड़ा थाना तलेन जिला राजगढ और दिनेश पिता प्रभुलाल नागर निवासी पचौर जिला राजगढ़ के साथ मिलकर गाड़ी चोरी करते.
आरोपी दीपक राजपूत से पुलिस ने चोरी की बाइक बरामद की है. आरोपी दिनेश नागर और धरमसिंह जाटव को भी दबिश देकर पुलिस ने पकड़ा.
दूसरों की गाड़ी में लगा देते चोरी के पार्ट्स
आरोपी धरमसिंह जाटव और दिनेश नागर मैकेनिक है. दोनों ने पुलिस को कहा कि जो गाड़ी उनके यहां सुधरने आती थी, उनमें चोरी की गाड़ी के पार्ट्स डाल देते थे. जबकि इंजन-चेचिस को कबाडी नजरुद्धीन निवासी शुजालपुर जिला शाजापुर को बेच देते थे. कबाड़ी नजरुद्दीन चेसिस और इंजन को काटकर नष्ट कर देता था.
3 गिरफ्तार, 1 आरोपी फरार
वाहन चोर दीपक राजपूत, मैकेनिक धरमसिंह नागर और दिनेश नागर से कुल 15 चोरी की बाईक बरामद की गई है. इंदौर शहर के विभिन्न इलाकों से ये गाड़ियां चुराई गई थी. क्राइम में कुल 3 आरोपी अरैस्ट किए गए हैं और 1 आरोपी फरार है. फरार कबाड़ी के बारे में पूछताछ की जा रही है.
ऐसे होती थी चोरी ऑन डिमांड
संयोगितागंज थाना प्रभारी सतीश पटेल ने कहा कि गाड़ी चोरी की शिकायतों के बाद संदिग्ध दीपक राजपूत से पूछताछ की गई थी लेकिन आरंभ में उसने गाड़ी चोरी कबूल नहीं की. बाद में जब सीसीटीवी में वो नजर आता तो दोबारा उसे पकड़ा गया. इसके बाद मुद्दे का खुलासा हुआ. आरोपियों ने कुछ गाड़ियां बेची है, जबकि कुछ गाड़ियों को मैकेनिक दोस्त धरमसिंह की सहायता से ठिकाने लगाई. धरमसिंह चोरी की गाड़ियों के पार्ट्स उसके यहां सुधरने आने वाली गाड़ियों में लगा देता था. उसके यहां जो गाड़ी सुधरने आती थी. उसमें जो पार्ट्स खराब रहते थे, उन्हें बदलने के लिए आरोपी दोस्तों से उसी कंपनी की गाड़ी चुराने के लिए कहता था. आरोपी साथी बाईक चुराने इंदौर आते थे. वहीं इंजन नंबर और चेचिस नंबर से पकड़े जाने के डर के कारण इस तरह गाड़ियों को ठिकाने लगाया जाता था.

