राष्ट्रीय

Dungarpur में गरमाई सियासत, रावत बोले- आदिवासी संस्कृति के खिलाफ…

उदयपुर से बीजेपी सांसद मन्नालाल रावत ने धर्मांतरण को लेकर बांसवाड़-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत पर निशाना साधा. उदयपुर से बीजेपी सांसद मन्नालाल रावत ने धर्मांतरण को लेकर सांसद राजकुमार रोत पर यह इल्जाम लगाया. उन्होंने रोत को ईसाइयों की विचारधारा पर चलने और आदिवासियों और उनकी संस्कृति का शत्रु बताया. रावत ने शनिवार को डूंगरपुर दौरे के दौरान यह इल्जाम लगाया.

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सांसद मन्नालाल रावत ने डूंगरपुर में GST को लेकर आयोजित कार्यशाला में भाग लिया. सांसद मन्नालाल रावत ने कहा- राष्ट्र की संसद में जब वक्फ संशोधन अधिनियम आया था तब राजकुमार रोत ने विरोध किया था. उस समय वे ओवैसी के साथ खड़े थे. वो आतंकियों को फंडिंग करने वाले एक एमपी राशिद के साथ खड़े थे. उस समय जनजातियों के अधिकार के विरोध में खड़े थे. उच्चतम न्यायालय ने कोटे में कोटा आरक्षण वाली प्रबंध करने के निर्देश दिए थे. गवर्नमेंट ये प्रबंध लागू कर रही थी, लेकिन वे भीलों के आरक्षण का भी विरोध कर रहे थे.

उन्होंने बोला कि राजस्थान विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी अधिनियम पेश किया गया तो बीएपी के विधायक विरोध करते नजर आए. ये समाज के ठेकेदार के नाम पर जनजातियों के शत्रु है. जनजातियों की संस्कृति के शत्रु है और नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. सांसद मन्नालाल के डूंगरपुर सर्किट हाउस पहुंचने पर बीजेपी जिलाध्यक्ष अशोक पटेल, विधायक शंकर डेचा, बंशीलाल कटारा समेत बीजेपी पदाधिकारियों ने स्वागत किया. इसके बाद बीजेपी कार्यशाला में सेवा पखवाड़ा के अनुसार आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर कार्यशाला में शामिल हुए.

आदिवासियों के आरक्षण का 72% फायदा धर्मांतरित लोग उठा रहे सांसद मन्नालाल रावत ने धर्मांतरण को लेकर बोला कि इसका सबसे बड़ा हानि आदिवासी समाज को हो रहा है. एसटी को मिलने वाले आरक्षण में से 72%, छात्रवृत्तियों का 70%, विकास आर्थिक सहायता का 68% धर्मांतरित लोग लाभ उठा रहे हैं, जो एसटी के नाम का है. ये अनैतिक कार्य ओर आदिवासियों के अधिकार को छिनने वाला है. उन्होंने बोला कि धर्मांतरण विरोध को लेकर 22 राज्यों में समाज आंदोलन कर रहा है. सभी चाहते हैं कि इसमें संशोधन हो उसे डी लिस्टिंग मूमेंट कहते हैं.

उन्होंने बोला कि एससी की तर्ज पर ही एसटी की परिभाषा होनी चाहिए और जल्द ही इसमें सुधार होगा, क्योंकि हिंदुस्तान का विचार भी बाबा साहब अंबेडकर ओर संविधान के विचार है. जो एससी है वहीं हिन्दू है तो जो हिंदू है वहीं एसटी होना चाहिए.

ईसाइयों के दबाव में आकर कांग्रेस पार्टी धर्मांतरण विरोधी बिल नहीं लाई सांसद मन्नालाल ने बोला कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर 1950 में जब केंद्र में विधि मंत्री थे तब 2 नोटिफिकेशन जारी किए थे. पहला अनुसूचित जनजातियों के बारे में. उन्होंने साफ लिखा जिसने सनातन छोड़ दिया है वो एससी नहीं है. बाबा साहब सबसे बड़े हिंदूवादी थे. उन्होंने सनातन संस्कृति, परंपरा का ध्यान रखा, लेकिन षड्यंत्र पूर्वक कुछ लोगों ने एसटी की परिभाषा को खुला रख दिया ओर उसमें ये कंडीशन नहीं डालने दी.

उस समय कांग्रेस पार्टी एक बड़े नेता कार्तिक बुरा ने ये प्रश्न इंदिरा गांधी के सामने रखा. उन्होंने लगातार संघर्ष किया, लेकिन इंदिरा गांधी ओर बाकी सब लोग जो इसाइयों के 50 प्रतिनिधि थे. नगालैंड और मेघालय के तत्कालीन सीएम के दबाव में आकर, उनकी धमकी से होने नहीं दिया. यदि एसटी धर्मांतरित लोग बाहर निकाल दिए तो अलग राष्ट्र की मांग करेंगे. इस धमकी के दबाव में आकर कांग्रेस पार्टी ने बड़ा पाप किया. जिसे जनजाति समाज आज भी भुगत रहा है.

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