प्रधानमंत्री जन धन योजना ने इस क्षेत्र में बढ़ाई भारत की प्राथमिकता
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन ए सिन्हा के अनुसार, पिछले एक दशक में पीएम जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) ने हिंदुस्तान में एक परिवर्तनकारी असर डाला है, जिसने महिलाओं, ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाली जनसंख्या के लिए वित्तीय समावेशन को एक नयी परिभाषा दी है.

एक मीडिया आर्टिकल में, सिन्हा ने कहा कि कैसे पीएमजेडीवाई हिंदुस्तान के सामाजिक-आर्थिक बदलाव की आधारशिला बन गई है और सभी के लिए बैंकिंग तक पहुंच में क्रांतिकारी परिवर्तन लाकर एक वैश्विक मानक स्थापित किया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अगस्त 2014 में प्रारम्भ की गई, पीएमजेडीवाई योजना का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से वंचित प्रत्येक परिवार को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाना है.
सिन्हा ने बोला कि पिछले 10 सालों में योजना ने बिना रुकावट सरकारी हस्तांतरण को संभव बनाया है, हाशिए पर रहने वाले समुदायों को सशक्त बनाया है और हिंदुस्तान के डिजिटल फाइनेंशियल इकोसिस्टम की नींव रखी है.
उन्होंने आगे कहा, इस पहल का सकारात्मक असर शुरुआती उम्मीदों से कहीं आगे तक पहुंचा है और वित्तीय समावेशन के मुद्दे में दुनिया के लिए एक उपयुक्त मानक स्थापित किया है.
पीएमजेडीवाई के सार्वभौमिक बैंकिंग पहुंच प्रदान करने के लक्ष्य को साहसिक बताते हुए, उन्होंने योजना के डिज़ाइन, जैसे शून्य-शेष खाते, न्यूनतम कागजी कार्रवाई और हादसा बीमा के साथ निःशुल्क रुपे डेबिट कार्ड को गरीब लोगों तक पहुंच बढ़ाने का श्रेय दिया.
पीएमजेडीवाई ने लैंगिक और क्षेत्रीय असमानताओं को पाटा है और आधार और मोबाइल नंबरों के साथ इसके सहमति-आधारित इंटीग्रेशन ने वित्तीय पहुंच के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है.
इस मॉडल ने अफ्रीका और दक्षिण एशिया के राष्ट्रों को हिंदुस्तान के वैश्विक डीपीआई रिपॉजिटरी के माध्यम से इसी तरह के मॉडल अपनाने के लिए भी प्रेरित किया है.
सिन्हा ने कहा, पिछले 10 सालों में पीएमजेडीवाई का प्रदर्शन इसके परिवर्तनकारी असर का प्रमाण है.
सिन्हा ने बोला कि अगस्त 2015 में 17.9 करोड़ पीएमजेडीवाई खातों से, अगस्त 2023 तक यह संख्या तिगुनी होकर 50.14 करोड़ हो गई. सिर्फ़ 8.2 फीसदी खाते शून्य-शेष राशि वाले हैं, जो एक्टिव इस्तेमाल को दर्शाता है और अगस्त 2022 तक 81.2 फीसदी चालू रहेंगे.
2015 और 2022 के बीच जमा राशि में भी 7.6 गुना वृद्धि हुई है, जो बढ़ी हुई वित्तीय भागीदारी को दर्शाती है.
इसी प्रकार, रुपे कार्ड और यूपीआई के कारण, डिजिटल लेनदेन में भी भारी वृद्धि हुई है, जो कि वित्त साल 2017-18 में 1,471 करोड़ से बढ़कर वित्त साल 2022-23 तक 11,394 करोड़ हो गया.
पीओएस और ई-कॉमर्स पर रुपे कार्ड से लेनदेन वित्त साल 2017-18 के 67 करोड़ से बढ़कर वित्त साल 2022-23 में 126 करोड़ हो गया, जबकि इसी अवधि में यूपीआई लेनदेन 92 करोड़ से बढ़कर 8,371 करोड़ हो गया.

