राष्ट्रीय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल अरेस्ट के मुद्दे पर लोगों को किया सावधान
भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 27 अक्टूबर के मन की बात के अपने हालिया एपिसोड के दौरान ‘डिजिटल अरेस्ट’ की ओर ध्यान आकर्षित किया और नागरिकों को घोटाले के बारे में चेतावनी दी. चौंकाने वाली बात यह है कि 2024 की पहली तिमाही में डिजिटल अरेस्ट घोटाले में हिंदुस्तानियों को 120.3 करोड़ रुपये से अधिक का हानि हुआ है.

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इतनी शिकायतें हो चुकी है
नेशनल साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) द्वारा सामने आए आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 30 अप्रैल, 2024 के बीच लगभग 0.74 मिलियन शिकायतें प्राप्त हुईं और 46 फीसदी शिकायतों में ट्रेडिंग घोटाले, निवेश घोटाले और डिजिटल गिरफ्तारियां शामिल थीं.
जालसाज पीड़ितों को वीडियो कॉल करते हैं और स्वयं को सरकारी अधिकारी बताते हैं. वे दबाव की रणनीति का इस्तेमाल करते हैं जैसे पीड़ित पर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का इल्जाम लगाना और उन्हें ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के अनुसार रहने के लिए कहना. वे यह सुनिश्चित करते हैं कि उनकी नकली पहचान असली लगे और पीड़ितों से कॉल बंद न करने और अपना घर छोड़ने के लिए कहें.
पीएम मोदी ने डिजिटल अरेस्ट पर क्या कहा?
मन की बात के अपने हालिया एपिसोड के दौरान, पीएम ने उल्लेख किया कि रुको, सोचो और एक्शन लो. इसके साथ ही पीएम ने बोला कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रबंध नहीं है. कोई भी जांच एजेंसी ना तो धमकी देती है और ना ही वीडियो कॉल पर पूछताछ करती है. उन्होंने आगे बोला कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर स्कैम चल रहा है इससे निपटने के लिए तमाम जांच एजेंसियां राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही हैं. आपको बता दें कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी मे डिजिटल अरेस्ट की एक पीड़ित का ऑडियों भी शेयर किया.
एपिसोड के दौरान डिजिटल अरेस्ट पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने शेयर किया कि घोटालेबाज अक्सर सीबीआई, नारकोटिक्स, आरबीआई या पुलिस का रूप धारण करते हैं और नकली ऑफिसरों के रूप में वार्ता करते हैं. उन्होंने यह भी बोला कि ‘मन की बात’ के श्रोताओं ने इस मामले पर चर्चा करने में रुचि दिखाई.
“हर वर्ग और उम्र वर्ग के लोग डिजिटल अरेस्ट के शिकार होते हैं. लोगों ने डर के कारण अपनी मेहनत से कमाए लाखों रुपये गंवा दिए हैं. जब भी आपके पास ऐसी कोई कॉल आए तो घबराएं नहीं. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, आपको पता होना चाहिए कि कोई भी जांच एजेंसी कभी भी टेलीफोन कॉल या वीडियो कॉल के जरिए इस तरह पूछताछ नहीं करती है.
एपिसोड के दौरान, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह भी बोला कि एजेंसियों ने हजारों वीडियो-कॉल आईडी, लाख से अधिक सिम कार्ड, मोबाइल टेलीफोन और बैंक खाते ब्लॉक कर दिए हैं.
उन्होंने बोला कि साइबर फर्जीवाड़ा से लोगों को बचाने के लिए एजेंसियां पुरजोर प्रयास कर रही हैं, लेकिन इन घोटालों से बचाव के लिए हर नागरिक को इनके बारे में सतर्क होना होगा. उन्होंने डिजिटल अरेस्ट या अन्य साइबर फर्जीवाड़ा के पीड़ितों से इन घोटालों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए इसे अधिक से अधिक लोगों के साथ साझा करने के लिए भी कहा.
क्या है डिजिटल अरेस्ट?
घोटालेबाज डिजिटल अरेस्ट की आरंभ एक मैसेज या टेलीफोन कॉल के जरिए करते हैं. डिजिटल अरेस्ट करने वाले ठग लोग टेलीफोन करके कहते हैं कि वे पुलिस विभाल या आयकर विभाग से बात कर रहे हैं. इतना ही नहीं, आपके पैन और आधार का इस्तेमाल करते हुए तमाम चीजें की खरीदी गई हैं या फिर मनी लॉनड्रिंग की गई है. हालांकि, कई बार दावा भी करते है कि वे कस्टम विभाग से बात कर रहे हैं और आपके नाम से पर्सल आया है इसमें ड्रग्स या प्रतिबंधित चीजें हैं. फिर वे लोग वीडियो कॉल के सामने बैठे रहने के लिए कहते हैं. इस दौरान आप किसी से बात नहीं कर सकते हैं. इसके बाद वे लोग पैसे भी मांगते हैं. इस तरह लोग अपने ही घर में औनलाइन कैद होकर रह जाते हैं और इसे ही डिजिटल अरेस्ट बोला जाता है.
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें
यदि आपके पास इस तरह की धमकी वाले टेलीफोन कॉल आते हैं तो आप डरे नहीं. इससे बचने के लिए आप तुरंत पुलिस में कम्पलेन करें. यदि आपके पास मैसेज या ई-मेल आता है उसे आप सबूत के तौर पर पुलिस को दें. यदि आप ने कॉल रिसीव किया है और आपको वीडियो कॉल पर कोई धमकी दे रहा है तो आप स्क्रीन रिकॉर्डिंग करके वीडियो कॉल को रिकॉर्ड करें और कम्पलेन करें. डरें नहीं और पैसे किसी को न दें.