राष्ट्रीय
Rahul Gandhi Press Conference: राहुल गांधी ने CEC को 10 तीखे सवालों के साथ कटघरे में घसीटा
Rahul Gandhi Press Conference: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर गंभीर इल्जाम लगाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार पर सीधे इल्जाम लगाते हुए बोला कि कांग्रेस पार्टी के बूथों से वोटरों के नाम काटे गए। यह काम सिस्टमेटिक ढंग से किया गया और मुख्य चुनाव आयुक्त ऐसा करने वालों को बचा रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ वोटरों को भी स्टेज पर बुलाया, जिनके नाम काट दिए गए थे। उन्होंने बोला कि सॉप्टवेयर के जरिए ये नाम काटे जा रहे हैं। ये पूरा खेल चुनाव आयोग के स्तर से हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बोला कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को उनके प्रश्नों के उत्तर देने होंगे।

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राहुल गांधी के सवाल
- लोकतांत्रिक प्रबंध में भागीदारी: राहुल गांधी ने बोला कि उनका काम लोकतांत्रिक प्रबंध में हिस्सा लेना और सच्चाई जनता के सामने लाना है।
- संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल: उन्होंने इल्जाम लगाया कि चुनाव आयोग और अन्य कानूनी संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रही हैं।
- वोट चोरी का आरोप: राहुल ने मतदाता सूची से वोटरों के नाम हटाए जाने को ‘वोट चोरी’ का उदाहरण बताया।
- चुनाव आयोग पर हमला: उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से एक हफ्ते के भीतर वोटर डिलीशन की पूरी जानकारी देने की मांग की, और बोला कि आयोग ‘लोकतंत्र के हत्यारों’ का बचाव कर रहा है।
- बड़े पैमाने पर डिलीशन: कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा और यूपी में लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा।
- कर्नाटक का उदाहरण: कर्नाटक के आलंद में 6,018 फर्जी डिलीशन आवेदन दाखिल किए गए, जो कांग्रेस पार्टी के गढ़ में मतदाताओं को निशाना बनाने के लिए थे।
- सुनियोजित साजिश: राहुल ने दावा किया कि वोट डिलीशन पर्सनल नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर के जरिए केंद्रीकृत और योजनाबद्ध ढंग से किया गया।
- अल्पसंख्यक और दलित निशाने पर: कुछ समूह लाखों मतदाताओं, खासकर अल्पसंख्यकों और दलितों, को व्यवस्थित रूप से निशाना बना रहे हैं।
- कर्नाटक सीआईडी की जांच: कर्नाटक सीआईडी ने वोटर डिलीशन की जांच प्रारम्भ की, लेकिन चुनाव आयोग ने अभी तक जानकारी नहीं दी।
- एच-बम की चेतावनी: राहुल ने बोला कि यह अभी हाईड्रोजन-बम नहीं है और बड़ा खुलासा अभी बाकी है।
- कानूनी प्रबंध की जिम्मेदारी: उन्होंने बोला कि कानूनी प्रबंध जैसे अन्य संस्थानों को भी इस मुद्दे में हस्तक्षेप करना चाहिए।

