राजा साधुखां: मोटे अनाज से दिल व स्वाद, दोनों होंगे सेहतमंद
आदिकाल से ही भारतवासी ज्वार, बाजरा जैसे मोटे अनाज का सेवन कर अपने शरीर को तंदरुस्त रखने की कला जानते थे। लेकिन पाश्चात्य जीवनशैली के राष्ट्र में प्रवेश करते ही हम उन अनाजों को भूलते चले गये। धन्य हैं प्रधानमंत्री, जिन्होंने इन मोटे अनाजों के चमत्कारी गुणों से देशवासियों को अवगत कराने के लिए साल 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स या मोटा अनाज साल के तौर पर घोषित किया। उक्त बातें होटल प्रबंधन, खानपान प्रौद्योगिकी और अनुप्रयुक्त संस्थान (आइएचएम कोलकाता) के प्रिंसिपल राजा साधुखां ने कहीं। वह मेक इन इण्डिया कार्यक्रम के अनुसार आइएचएम कोलकाता द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कुकिंग कांटेस्ट ””कहीं गुम ना हो जाये”” को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि संस्थान में मोटे अनाज को लेकर कई अध्ययन हो रहे हैं। फूड प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अध्ययन कर रहे संस्थान के विद्यार्थियों को ज्वार, बाजरा और सांवा जैसे पौष्टिक अनाजों से रेसिपी तैयार करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे हमारे राष्ट्र का दिल और स्वाद, दोनों स्वास्थ्य वर्धक होंगे। कार्यक्रम में राज्यभर से आये प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और मोटे अनाजों से पारंपरिक रेसिपी बनाकर लोगों को परोसा।
संस्थान द्वारा मोटे अनाजों से तैयार बेकरी उत्पाद जैसे ब्रेड, केक, कुकीज, सूप स्टिक, खाद्य बिस्किट कप, हेल्थ बार, स्प्रेड, मफिन आदि प्रदर्शित किये गये। आयोजन में आइएचएम कोलकाता का सहयोगी संस्थान लेट्स गिव बैक भी भागीदार रहा। कार्यक्रम में जहां गृहिणियों ने मोटे अनाजों से अपनी पाक कला को प्रदर्शित किया। वहीं, संस्थान के विद्यार्थियों के अभिभावकों ने भी राष्ट्रीय स्तर की कुकरी प्रतियोगिता में शिरकत की।
प्रतियोगिता में बतौर न्यायधीश आइएचएम कोलकाता के एचओडी अशोक कुमार प्रसाद, रीना मुखर्जी, सुमिता मुखर्जी और फूड कंसलटेंट सुलेखा भद्र रहे। बबीता परमानंदका को विजेता घोषित किया गया, जबकि प्रथम रनर अप के रूप में मनीषा चक्रवर्ती और द्वितीय रनर अप सिसिली बर्मन को घोषित किया गया। लेट्स गिव बैक की तरफ से कार्यक्रम में बबीता और कर्नल अतुल शामिल हुए। देशभर के आइएचएम संस्थानों में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय कुकिंग कांटेस्ट के विजेताओं को दिल्ली में आयोजित होनेवाली कुकिंग प्रतियोगिता में शिरकत करने का मौका मिलेगा।

