राष्ट्रीय

राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने डॉ. मनीष अग्रवाल को रिश्वत लेते किया ट्रैप

प्रदेश की राजधानी जयपुर का प्रतिष्ठित सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल, जो हाल ही में आग की घटना को लेकर चर्चा में था, अब एक बार फिर सुर्खियों में है — इस बार करप्शन के आरोपों को लेकर. राजस्थान करप्शन निरोधक ब्यूरो (ACB) ने हॉस्पिटल में बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑर्थोपेडिक विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डाक्टर मनीष अग्रवाल को घूस लेते हुए ट्रैप किया है.

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जानकारी के अनुसार, ACB को कम्पलेन मिली थी कि डाक्टर मनीष अग्रवाल रोगियों से ऑपरेशन और इलाज संबंधी प्रक्रियाओं में सहायता के नाम पर अनुचित फायदा (रिश्वत) की मांग कर रहे हैं. कम्पलेन की सत्यता जांचने के बाद ACB की टीम ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई. मंगलवार देर शाम जैसे ही डाक्टर अग्रवाल ने शिकायतकर्ता से तय धनराशि ली, टीम ने उन्हें मौके पर ही रंगे हाथ अरैस्ट कर लिया.

इस कार्रवाई के बाद हॉस्पिटल परिसर में हड़कंप मच गया. यह वही एसएमएस हॉस्पिटल है, जहाँ हाल ही में ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की घटना के बाद फायर सेफ्टी की ढिलाई को लेकर गंभीर प्रश्न उठे थे. अब करप्शन के इस नए मुद्दे ने हॉस्पिटल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर और भी गहरे प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं.

ACB ऑफिसरों के मुताबिक, आरोपी चिकित्सक को हॉस्पिटल परिसर में ही ट्रैप किया गया और बाद में उनके कार्यालय और आवास पर तलाशी ली गई. शुरुआती जांच में कई दस्तावेज़, नकद राशि और संदिग्ध रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं. एसीबी ने कहा कि आगे की जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या इस प्रकरण में अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल हैं.

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल में इस तरह का मुद्दा सामने आना न सिर्फ़ स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता पर प्रश्न उठाता है, बल्कि रोगियों के भरोसे को भी गहरा झटका देता है. जो हॉस्पिटल राज्यभर से आने वाले गरीब और जरूरतमंद रोगियों के लिए आशा की किरण माना जाता है, वही अब करप्शन के जाल में फँसता दिख रहा है.

अस्पताल प्रशासन ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए बोला है कि ACB की कार्रवाई के बाद विभागीय जांच भी प्रारम्भ कर दी गई है. साथ ही, आरोपी अधिकारी को तुरन्त असर से निलंबित (Suspend) किया जा सकता है.

वहीं, चिकित्सा जगत से जुड़े कई लोगों ने इस घटना पर गहरी निराशा व्यक्त की है. उनका बोलना है कि ऐसे मामलों से न सिर्फ़ सरकारी चिकित्सा संस्थानों की छवि धूमिल होती है, बल्कि जनसेवा की भावना को भी ठेस पहुँचती है.

गौरतलब है कि एसएमएस हॉस्पिटल में पिछले कुछ महीनों से फायर सेफ्टी, प्रबंधन की ढिलाई और अब करप्शन जैसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं. गवर्नमेंट ने संकेत दिया है कि हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली की संपूर्ण ऑडिट जांच कराई जाएगी ताकि ज़िम्मेदारी तय की जा सके.

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