रोहित पवार ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए दागा सवाल, कहा- सवालों का जवाब देने में असमर्थ…
एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के बयान पर पलटवार किया है, जिसमें कुमार ने दावा किया था कि हमारे लिए न कोई पक्ष और न विपक्ष है. सभी सियासी दल बराबर हैं. पवार ने आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाते हुए बोला कि रविवार को हुई प्रेस वार्ता को देखकर ऐसा प्रतीत हुआ मानो यह बीजेपी (भाजपा) की प्रेस वार्ता हो. उन्होंने इल्जाम लगाया कि आयोग की कार्यशैली से जनता में यह धारणा बन रही है कि वह बीजेपी के इशारों पर काम कर रहा है.

मीडिया से वार्ता के दौरान उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर इल्जाम लगाए. उन्होंने बोला कि आयोग एक कानूनी संस्था है, जिससे निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहा.
पवार ने दावा किया कि आयोग बीजेपी के विस्तारित विभाग की तरह काम कर रहा है और विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने में असमर्थ है. उन्होंने विशेष रूप से इल्जाम लगाया कि आयोग ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जिताने में सहायता की.
राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए बोला कि चुनाव आयोग एक कानूनी संस्था है, लेकिन वह निष्पक्षता के साथ काम नहीं कर रहा. उन्होंने बोला कि आयोग को विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए. आयोग के पास सबूत हैं तो हमारे पास भी सबूत हैं. राहुल गांधी और विपक्ष आयोग की धमकियों से डरता नहीं है. आयोग पर बीजेपी का असर है और वह उसके इशारों पर काम कर रहा है.
एनडीए की ओर से महाराष्ट्र के गवर्नर सीपी। राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने पर उन्होंने बोला कि ऐसा समझा जा रहा है कि वह आरएसएस और बीजेपी के बहुत करीब हैं, और उन्हें जानबूझकर महाराष्ट्र में हो रही या होने वाली अशांति को नियंत्रित करने या रोकने के लिए तैनात किया गया था. हम कह सकते हैं कि अब उन्हें उपराष्ट्रपति बनाया जा रहा है. हम सभी उन्हें इसके लिए शुभकामना देते हैं. लेकिन धनखड़ के साथ क्या हुआ? इस पर भी गौर किया जाना चाहिए.
धनखड़ ने विरोधी पक्ष के एक प्रस्ताव को गवर्नमेंट के इजाजत के स्वीकार किया था. उपराष्ट्रपति सभी के होते हैं, सत्ताधारी को लगता है कि वह उनकी कठपुतली है. सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया गया है, बीजेपी को लगता है कि वह उनकी सुनेंगे, ऐसा नहीं होना चाहिए. पूर्व राष्ट्रपति धनखड़ जब बाहर आएंगे तो वह क्या उत्तर देंगे देखने वाली बात होगी.
महाराष्ट्र गवर्नमेंट में मंत्री संजय शिरसाट पर करप्शन का इल्जाम लगाते हुए एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने बोला कि अंग्रेजों ने मराठा साम्राज्य के विरुद्ध अंग्रेजों की सहायता करने के लिए बिवलकर नामक एक परिवार को नवी मुंबई क्षेत्र में 4,000 एकड़ से अधिक जमीन दी थी. बाद के विभिन्न कानूनों, नियमों और निर्णयों के अनुसार, यह जमीन गवर्नमेंट को हस्तांतरित कर दी गई, लेकिन बिवलकर परिवार ने विभिन्न उपायों का सहारा लेकर इस जमीन को वापस पाने की लगातार प्रयास की. उस स्तर पर उन्हें अस्वीकार भी किया गया, लेकिन वर्तमान मंत्री संजय शिरसाट ने 2024 में सिडको के अध्यक्ष बनते ही सभी नियमों को ताक पर रखते हुए पहली बैठक में इस जमीन का लगभग 15 एकड़ हिस्सा बिवलकर परिवार को देने का निर्णय किया.
इस जमीन का बाजार मूल्य लगभग 5,000 करोड़ रुपये है और सिडको इस जमीन पर गरीबों के लिए लगभग 10,000 घर बना सकता था, लेकिन मंत्री ने गरीबों के अधिकार की जमीन बिवलकर परिवार के गले पर थोप दी. एक ओर, 5,000 से ज़्यादा क्षेत्रीय भूमिपुत्र सालों से ज़मीन के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उन्हें जमीन नहीं दी जा रही है, वहीं मराठा साम्राज्य के खिलाफ़ काम करने वाले बिवलकर परिवार को पहली ही बैठक में गैरकानूनी रूप से ज़मीन दी जा रही है, जो भूमिपुत्रों के साथ भी एक तरह का विश्वासघात है. इसलिए, गवर्नमेंट से निवेदन है कि बिवलकर परिवार को गैरकानूनी रूप से दी गई इस ज़मीन सहित राज्य की ऐसी सभी ज़मीनें वापस ली जाएं और मंत्री संजय शिरसाठ इस्तीफा

