राष्ट्रीय

कस्टम मिलिंग मामले में रोशन चंद्राकर की जमानत याचिका हुई खारिज

छत्तीसगढ़ के चर्चित घोटालों से जुड़े आरोपियों के लिए बुधवार अहम दिन रहा. रायपुर की न्यायालय में कस्टम मिलिंग, DMF मुद्दे में जमानत पर सुनवाई हुई. शराब घोटाला मुद्दे में रायपुर की कारावास में बंद पूर्व मंत्री कवासी लखमा से EOW के अधिकारी पूछताछ के लिए पहुंचे थे. कर

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अदालत में कस्टम मिलिंग मुद्दे में रोशन चंद्राकर की जमानत याचिका खारिज कर दी गई. DMF घोटाला मुद्दे में रानू साहू की जमानत याचिका भी खारिज की गई. न्यायालय ने सुनवाई के बाद मुद्दे में बोला कि DMF मुकदमा में पहले से ही रायपुर की कारावास में बंद रानू साहू, सौम्या चौरसिया, सूर्यकांत तिवारी, माया वारियर, मनोज द्विवेदी को 2 अप्रैल तक न्यायिक रिमांड पर ही रखा जाएगा. यानी कि इससे पहले इनके कारावास से बाहर आने की आसार नहीं है.

जेल में रही गहमा-गहमी रायपुर की कारावास में बुधवार के गहमा-गहमी का माहौल रहा. दरअसल यहां प्रवर्तन निदेशालय के शराब घोटाला मुकदमा में पूर्व मंत्री कवासी लखमा बंद हैं. इनसे मिलने प्रदेश कांग्रेस पार्टी प्रभारी सचिन पायलट पहुंचे थे. इसी समय EOW के अधिकारी भी पूछताछ के लिए लखमा से मिलने गए थे.

विभागीय सूत्रों के अनुसार शराब घोटाले में सरकारी ऑर्डर जारी करने, कमिशन का इस्तेमाल, पैसे किस ढंग से लिए जाते थे, किसे दिए जाते थे, अफसरों का क्या रोल था, मंत्री का क्या रोल था इस तरह के प्रश्न लखमा से पूछे गए. ज्यादातर उत्तर में लखमा पता नहीं-भूल गया ही कहते रहे. 12 बजे कारावास में घुसे EOW के अधिकारी शाम 5 बजे के इर्द-गिर्द बाहर आए. ईओडब्ल्यू की टीम को 19 और 20 मार्च को पूछताछ की इजाजत मिली है. 20 को फिर से पूछताछ के लिए टीम जा सकती है.

जानिए क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला ED ने कस्टम मिलिंग स्कैम में मार्कफेड के पूर्व MD मनोज सोनी सहित 5 पर FIR दर्ज कराई है. इल्जाम है कि 140 करोड़ रुपए की गैरकानूनी वसूली की गई. इसमें अफसरों से लेकर मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी तक शामिल हैं. भिन्न-भिन्न राइस मिलर्स के द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम और एफसीआई में कस्टम मिलिंग का चावल जमा किया जाता है. इस प्रकिया में करप्शन कर प्रति क्विंटल के हिसाब से गैरकानूनी राशि की वसूली की गई. जांच में पता चला है कि एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर लेवी वसूलते और अफसरों को जानकारी देते. जिनसे रुपए नहीं मिलते उनका भुगतान रोक दिया जाता.

DMF घोटाला क्या है प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120 बी 420 के अनुसार मुकदमा दर्ज किया है. मुकदमा में यह तथ्य निकाल कर सामने आए हैं कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से भिन्न-भिन्न टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितता पाई गई. टेंडर भरने वालों को गैरकानूनी फायदा पहुंचाया गया. प्रवर्तन निदेशालय की जांच के बाद अब EOW की टीम अपनी जांच तेज कर दी है. प्रवर्तन निदेशालय की जांच ने DMF घोटाले के नियमों का खुलासा किया है. इसमें यह बात सामने आई है कि ठेकेदारों के बैंक खाते में जमा की गई रुपए का बड़ा हिस्सा ठेकेदारों ने सीधे कैश में निकाल लिया है. जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने ठेकेदारों, सरकारी और उनके सहयोगियों के अगल-अगल ठिकानों पर रेड मारी थी.

क्या है शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मुद्दे में प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रही है. प्रवर्तन निदेशालय ने ACB में FIR दर्ज कराई है. दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले की बात कही गई है. प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश गवर्नमेंट के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और व्यवसायी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था.

ED की ओर से दर्ज कराई गई FIR की जांच ACB कर रही है. ACB से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से गैरकानूनी शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई. इससे शासन को करोड़ों के राजस्व का हानि हुआ है.

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