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आरएसएस राम माधव ने पाकिस्तानी असीम मुनीर द्वारा भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दिए जाने पर जताया कड़ा विरोध

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता राम माधव ने शनिवार को पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर द्वारा हिंदुस्तान को परमाणु युद्ध की धमकी दिए जाने पर कड़ा विरोध जताया और बोला कि इस तरह की धमकी से कोई नहीं डरता और हिंदुस्तान में ऐसी धमकियों का उत्तर देने की समझ है. कुछ दिन पहले अमेरिका यात्रा के दौरान मुनीर द्वारा की गई इस टिप्पणी का विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध किया था और नयी दिल्ली ने इस तरह की बयानबाजी जारी रखने पर भयावह रिज़ल्ट भुगतने की चेतावनी दी थी.

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आरएसएस नेता राम माधव ने एएनआई से बोला कि मुनीर की परमाणु धमकी से कोई डरने वाला नहीं है. पीएम ने इसका उचित उत्तर दिया है. परमाणु ब्लैकमेल से कोई भी हिंदुस्तान को नहीं डरा सकता. यदि नौबत आ गई तो क्या किया जाए? हिंदुस्तान की भी अपनी समझ है. इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कि क्या अमेरिका अप्रत्यक्ष रूप से ऐसी टिप्पणियों का समर्थन कर रहा है, आरएसएस नेता ने बोला कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उतने सहज नहीं हैं जितना पहले सोचा गया था, और वे बड़े लेन-देन वाले आदमी हैं. उन्होंने आगे बोला कि हिंदुस्तान को “भावुक” होने और ट्रंप के ढंग से निपटने की आवश्यकता नहीं है, जैसे दूसरे राष्ट्र भी अपने ढंग से निपटते हैं.
उन्होंने बोला कि हम बहुत भावुक लोग हैं, हम ट्रंप के ढंग को क्यों नहीं समझ पा रहे हैं? ट्रंप ने घातक उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन के साथ भी संपर्क बनाए रखा है, सिंगापुर में उनसे बात की है और बोला है कि वे दोस्त हैं. इसी वजह से उत्तर कोरिया और अमेरिका के रिश्तों में कोई परिवर्तन नहीं आया. बस यूँ ही, वह (डोनाल्ड ट्रंप) सोचते हैं कि बुरे लोगों के साथ काम करके मैं उन्हें ठीक कर दूँगा.

ट्रम्प द्वारा बार-बार टैरिफ लगाने की धमकी और भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम समझौते के झूठे दावों के बारे में माधव ने कहा, “ट्रम्प उतने सरल नहीं हैं जितना हम पहले सोचते थे. वह एक बड़े लेन-देनवादी आदमी हैं और उनके दिमाग में यह साफ है कि वह जो कुछ भी कर रहे हैं, वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ताकत बढ़ाने के लिए कर रहे हैं. यही उनका लक्ष्य है.” अफगानिस्तान में युद्ध के लिए अमेरिका ने पाक के पूर्व राष्ट्रपति परवेश मुशर्रफ से हाथ मिलाया था, इसका जिक्र करते हुए माधव ने कहा, “वह मुनीर के साथ ऐसा कर रहे हैं, हम इसका पूरी तरह विरोध करते हैं, लेकिन अमेरिका ने (परवेज़) मुशर्रफ के साथ भी यही राजनीति की थी, वह मुशर्रफ आतंकवाद का इतना समर्थन करते थे. अमेरिका ने अफगानिस्तान में युद्ध के लिए मुशर्रफ से हाथ मिलाया था, तब भी हमने इसका विरोध किया था. अपने हितों को सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका की एक खास शैली है.

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