उदयनिधि स्टालिन को SC ने सुनाई राहत वाली खबर
Supreme Court on Udhayanidhi Stalin: सुप्रीम न्यायालय ने गुरुवार को तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को बड़ी राहत दी है. शीर्ष न्यायालय ने निर्देश दिया हा कि उदयनिधि के सनातन धर्म संबंधी कथित टिप्पणी के लिए उनके विरुद्ध बिना अनुमति के कोई नयी प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी. उदयनिधि स्टालिन को यह राहत राष्ट्र के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने दी. साथ ही सनातन धर्म पर कथित टिप्पणी मुद्दे में शीर्ष न्यायालय ने उदयनिधि स्टालिन को बलपूर्वक कार्रवाई से संरक्षण देने के मुद्दे में अंतरिम आदेश की अवधि को भी बढ़ा दिया है.

उदयनिधि ने सनातन धर्म को लेकर दिया था विवादित बयान
बता दें कि सितंबर 2023 में चेन्नई में ‘सनातन उन्मूलन’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए द्रमुक नेता उदयनिधि ने बोला था कि सनातन धर्म सामाजिक इन्साफ और समानता के विरुद्ध है. इसे समाप्त कर दिया जाना चाहिए. उन्होंने सनातन धर्म की तुलना कोविड-19 वायरस, मलेरिया और डेंगू से करते हुए बोला था कि इसे समाप्त कर दिया जाना चाहिए. इस बयान के बाद महाराष्ट्र, बिहार, जम्मू और कर्नाटक सहित राष्ट्र के कई हिस्सों में उनके विरुद्ध कई एफआईआर दर्ज की गई हैं. बता दे कि स्टालिन ने पहले संविधान के अनुच्छेद 32 के अनुसार एक याचिका दाखिल की थी जिसमें उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का दावा किया गया था और कई राज्यों में उनके विरुद्ध लंबित एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग की गई थी.
सुप्रीम न्यायालय ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति संजय कुमार की सदस्यता वाली और हिंदुस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘हम यह उचित समझते हैं कि इस न्यायालय की अनुमति के बिना कोई और मुद्दा दर्ज नहीं किया जाएगा.’ पीठ ने कहा, ‘नए जोड़े गए प्रतिवादियों (राज्यों) को 15 दिनों के भीतर उत्तर दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई है और यदि कोई हो तो 15 दिनों के बाद उत्तर दाखिल किया जा सकता है. अंतरिम आदेश जारी रहेगा और संशोधित रिट याचिका में उल्लिखित मामलों पर समान रूप से लागू होगा.’ न्यायालय ने निजी शिकायतकर्ताओं से उत्तर मांगने के लिए मुद्दे को 21 अप्रैल से प्रारम्भ होने वाले हफ्ते में पोस्ट कर दिया.
उदयनिधि स्टालिन ने कही यह बात
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने बोला कि पिछले वर्ष नवंबर में न्यायालय ने सुझाव दिया था कि सभी मामलों को कर्नाटक में ट्रांसफर किया जा सकता है. तब से यानी सितंबर 2023 में ‘सनातन धर्म’ पर की गई टिप्पणी के संबंध में उनके विरुद्ध नए आपराधिक मुद्दे दर्ज किए गए हैं.
अभिषेक मनु सिंघवी ने दी यह दलील
नए मामलों में गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग करते हुए स्टालिन का अगुवाई कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और पी। विल्सन ने कहा कि उनके विरुद्ध पटना, जम्मू, बेंगलुरु, महाराष्ट्र और यूपी में मुद्दे लंबित हैं. सिंघवी ने कहा, ‘पिछली तारीख पर न्यायालय ने सभी मामलों को कर्नाटक स्थानांतरित करने का संकेत दिया था. पत्रकार अर्नब गोस्वामी और बीजेपी नेता नूपुर शर्मा से जुड़े पिछले मामलों में भी इस न्यायालय ने मामलों को एक ही स्थान पर स्थानांतरित करने के समान आदेश पारित किए थे. सिंघवी ने बोला कि स्टालिन के विरुद्ध बिहार में एक नया मुद्दा दर्ज किया गया था और लंबित याचिका में शिकायतकर्ताओं को पक्षकार बनाने के लिए संशोधन याचिका दाखिल की गई थी. उन्होंने बोला कि घटना से जुड़े मामलों को भिन्न-भिन्न जगहों पर जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती. नूपुर शर्मा के मुद्दे में शब्दों को बहुत अधिक आक्रामक माना जाता है और इस न्यायालय ने अन्य सभी मामलों को उस जगह पर स्थानांतरित कर दिया, जहां पहली बार एफआईआर दर्ज की गई थी. इस मुद्दे में का यही निवारण है.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कही यह बात
वहीं, महाराष्ट्र गवर्नमेंट की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय से बोला कि यह ‘सनातन धर्म उन्मूलन’ सम्मेलन था, जहां उपमुख्यमंत्री ने बोला था कि सनातन धर्म को मलेरिया, कोरोना, डेंगू आदि की तरह समाप्त किया जाना चाहिए. कृपया इस बात पर गौर करें कि यदि किसी दूसरे राज्य का सीएम किसी खास धर्म जैसे कि इस्लाम के बारे में ऐसी ही बातें कहता है, तो क्या इसे बर्दाश्त किया जाएगा? केवल इसलिए कि कोई समुदाय हिंसक प्रतिक्रिया नहीं करता. यह सज्जन उपमुख्यमंत्री हैं और ये गैर-जिम्मेदाराना शब्द हैं. मेहता ने बोला कि उच्चतम न्यायालय नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े एक और मुद्दे की सुनवाई कर रहा है, जिसमें पिछले आदेशों में मुसलमान समुदाय के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा, ‘इस मुद्दे की सुनवाई उस मुद्दे के साथ ही होनी चाहिए.’
पीठ ने मेहता से बोला कि ‘हम मुद्दे के गुण-दोष में नहीं जा रहे हैं. सिर्फ़ एक प्रश्न यह है कि क्या इसे एक स्थान स्थानांतरित किया जाना चाहिए.’ मेहता ने बोला कि केवल इसलिए कि हिंदुओं ने प्रतिक्रिया नहीं दी, नेता को ऐसा कहने की अनुमति नहीं दी जा सकती. सीजेआई ने कहा, ‘हम नहीं चाहेंगे कि सर्वोच्च कोर्ट किसी भी शब्द पर टिप्पणी करे, उनका मुकदमे पर असर पड़ता है.’

