शादियों तक भी पहुंचा घोटाला, सुपरवाइजर और कार्यकर्ता ने दोबारा कराए विवाह…
जिले में स्त्री बाल विकास विभाग के अधिकारी, सुपरवाइजर और कार्यकर्ता ने ढिलाई करते हुए शादीशुदा जोड़ों की फिर से सामूहिक सीएम कन्या शादी में विवाह करा दी गई, जबकि शादीशुदा जोड़ों का सामूहिक कन्या शादी में विवाह नहीं हो सकती है। बता दें कि शहर के पीजी कॉलेज ग्राउंड में शासन की महत्वाकांक्षी सामूहिक सीएम कन्या शादी योजना के अनुसार 362 जोड़ों का विधि विधान पूर्वक मंत्रोच्चार के बीच सामूहिक शादी संपन्न हुआ, जिसमें ग्राम पंचायत के कार्यकर्ता के माध्यम से सुपरवाइजर और स्त्री बाल विकास कार्यालय तक फॉर्म पहुंचा।

इसमें बड़ी ढिलाई बरतते हुए शहर से लगे ग्राम पंचायत कुल्हाड़ी खास में तीन शादीशुदा जोड़ों का पुनः सामूहिक शादी में फॉर्म भरकर विवाह कर दी गई, जिसके बाद विभाग द्वारा दूल्हा-दुल्हन को दिया हुआ 36 हजार का चेक की राशि को होल्ड करा दिया गया है और बाकी के सामान की राशि जो लगभग 14 हजार हो रही है, उसके लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। बड़ी बात यह है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने अपने ही शादीशुदा बेटे और बहू की विवाह करा दी। वहीं इस योजना के अनुसार किसी भी शादीशुदा आदमी को शासन की किसी योजना का फायदा नहीं मिलता है।
शादीशुदा जोड़े को नहीं मिलता कोई लाभ
जिला कार्यक्रम अधिकारी अतुल परिहार ने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी योजना सीएम कन्या शादी योजना के अनुसार 362 जोड़ों का सामूहिक शादी संपन्न हुआ, जिसमें पता चला कि कुछ जोड़ों की पहले से विवाह हो चुकी है उनके द्वारा दोबारा विवाह कराई गई है। जांच के बाद शासन से मिलने वाले पैसे को होल्ड कर दिया गया है। शादीशुदा किसी भी जोड़े को शासन की किसी योजना का फायदा नहीं मिला है पूरे मुद्दे में जांच कर आगे के कार्रवाई करने की बात कही है।
मुख्यमंत्री कन्या शादी की नियम और शर्ते
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सीएम कन्या शादी का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में ऐसे जोड़ों को शामिल किया जाता है जिनका पहले शादी न हुआ हो, वर की उम्र 21 वर्ष से अधिक और वधु की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो। आवेदकों से नियमानुसार 50/- के स्टाम्प पेपर में शपथ पत्र लिया जाता है कि उनका प्रथम शादी है और उनकी उम्र शासन के द्वारा निर्धारित उम्र के मापदंड को पूरा करे और उनके माता-पिता की सहमति रहती है। इसका सत्यापन संबंधित ग्राम के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम पंचायत के सरपंच के द्वारा कराया जाता है। प्राप्त आवेदन पत्र की जांच नियमानुसार संबंधित पर्यवेक्षक से कराकर प्रकरण परियोजना कार्यालय में जमा कराया जाता है, जिसके बाद संबंधित जोड़ा को आयोजित कार्यक्रम में शामिल कराने की सूचना संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/पर्यवेक्षक को दी जाती है

