भारत के इस जिले में दूध बेचना है पाप, जाने वजह
हिंगोली: प्रत्येक साल भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। सनातन धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का अत्याधिक महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन प्रभु श्री कृष्ण तका जन्म हुआ था। प्रभु कृष्ण विष्णु जी के 8वें अवतार माने जाते हैं। जन्माष्टमी के दिन मंदिर से लेकर हर घर में कृष्ण जन्म और पूजा की विशेष तैयारी की जाती है। वही इस बार जन्माष्टमी का त्योहार 6 सितंबर और 7 सितंबर दोनों ही दिन मनाया जाएगा। ऐसे आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे बताएंगे जहां दूध बेचना पाप माना जाता है। महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में एक गांव है जिसका नाम गवली है। यहां के लोग स्वयं को श्रीकृष्ण का वंशज मानते हैं इसलिए वो दूध बेचना पाप समझते हैं।

इस गांव में गाय को सर्वश्रेष्ठ जगह दिया जाता है, यहां पर कोई भी परिवार गाय का दूध नहीं बेचा जाता है। गांव में जितना भी दूध निकलता है उसका मक्खन, घी, छाछ बनाया जाता है। लोग दूध से बनी इन चीजों को जरूरतमंद लोगों के बीच फ्री में बाँटते हैं। दूध से बनी चीजों को खाने की वजह से यहां के वृद्ध आज भी बहुत निरोग हैं। यहां दूसरे धर्म के लोग भी इस नियम का पालन करते हैं तथा वो भी दूध नहीं बेचते हैं। इस गांव में प्रभु श्रीकृष्ण का मंदिर हैं, यहां हर वर्ष जन्माष्टमी के दिन बड़ा उत्सव मनाया जाता है, गांव के मंदिर में लोग श्रीकृष्ण की कथा का पाठन करते हैं तथा भजन गाते है।
वही ईश्वर की कही गई बातों को लोग अपने ढंग से मानते हैं मगर इस गांव में मथुरा के गोकुल नगरी की भांति खुशहाल और निरोग रहने के लिए आज भी यहां के लोग ईश्वर श्रीकृष्ण के द्वारा दिए हुए उपदेशों को मानते हैं। इस प्रथा को लेकर मंदिर के पुजारी ने कहा, गांव के सभी लोग ईश्वर श्रीकृष्ण की भक्ति करते हैं, यहां दूध बेचना पाप माना जाता है। गांव की स्त्री सरपंच जयाजी मंदाड़े नें बोला, हम गो पालन करते हैं, गाय का निकला दूध, मक्खन और दूध से बनी अन्य चीजें गांव में बांटते हैं। सही दूध पीने के कारण गांव के लोग बहुत निरोग हैं।

