पंजाब में सालों बाद देखने को मिला ऐसा मंजर, निचले इलाकों में जारी हुआ बाढ़ का रेड अलर्ट
पंजाब के निवासी भयंकर बाढ़ का सामना कर रहे हैं, अधिकारी इस स्थिति को अभूतपूर्व बता रहे हैं और 37 वर्ष पहले इस क्षेत्र में आई विध्वंसक बाढ़ की यादें ताज़ा कर रहे हैं. भारी मानसूनी बारिश के बाद नदियों के उफान पर होने से कई जिलों में कृषि भूमि और घरों को व्यापक हानि पहुँचा है. पंजाब के सीएम भगवंत मान ने बोला कि वह “प्राकृतिक आपदा” के कारण राज्य में सामने आ रही स्थिति की नियमित नज़र कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी ने इसे “मानव निर्मित” करार दिया और आप पर समय पर कार्रवाई करने में विफल रहने का इल्जाम लगाया.

पंजाब के कई जिलों, खासकर सीमावर्ती गुरदासपुर जिले में बाढ़ के कारण सैकड़ों गाँव प्रभावित हुए हैं, और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए युद्धस्तर पर निकासी अभियान चलाया जा रहा है. भारतीय सेना, बीएसएफ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ-साथ पंजाब पुलिस और स्वयंसेवकों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से 6600 लोगों को निकाला है.
राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष नंबर 0181-224-00-64 प्रभावित लोगों के लिए 24×7 काम कर रहा है. राज्य में 830 से ज़्यादा गाँव प्रभावित हुए हैं. सबसे ज़्यादा 202 गाँव गुरदासपुर में और 107 कपूरथला के साथ-साथ अमृतसर, पठानकोट, फिरोजपुर, फाजिल्का, होशियारपुर और कुछ अन्य जिलों में हैं. बचाए गए लोगों में से एक सेंचुरियन बचन सिंह भी शामिल है, जिसे कल कपूरथला के एक गाँव से निकाला गया था, जब उसके परिवार ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर डायल किया था.
पटियाला जिला प्रशासन ने जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के बाद घग्गर नदी के आसपास के कई निचले इलाकों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया है. राजपुरा के उप-मंडल मजिस्ट्रेट अविकेश गुप्ता के अनुसार, ऊंटसर, नन्हेड़ी, संजरपुर, लाछड़ू, कमालपुर, रामपुर, सौंटा, माड़ू और चमारू गांवों के निवासियों को सावधान रहने और नदी के पास जाने से बचने की राय दी गई है. लोगों से किसी भी आपात स्थिति में राजपुरा बाढ़ नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने के लिए बोला गया है.
पंजाब 1988 के बाद सबसे भयंकर बाढ़ का सामना कर रहा
पंजाब 1988 के बाद सबसे भयंकर बाढ़ का सामना कर रहा है. सतलुज, ब्यास और रावी नदियों के साथ-साथ कई छोटी नदियां भी उफान पर हैं, जिससे बड़े पैमाने पर फसलें और गांव जलमग्न हो गए हैं. हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में कई दिनों हुई तक भारी बारिश के कारण यह स्थिति बनी है.
प्रदेश में पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, होशियारपुर और अमृतसर जिलों के गांव बाढ़ के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं.
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जिला ऑफिसरों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. वह शुक्रवार को चंडीगढ़ में एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे, जिसमें बाढ़ की स्थिति की समीक्षा और राहत कार्यों की प्रगति का आकलन किया जाएगा.
इसी बीच, पटियाला के दूधन साधा के उप-मंडल मजिस्ट्रेट कृपालवीर सिंह ने भसमड़ा, जलाहखेड़ी और राजू खेड़ी गांवों के निवासियों को सावधान रहने की राय दी है. पटियाला की उप-मंडल मजिस्ट्रेट हरजोत कौर मावी ने हडाणा, पुर और सिरकप्पड़ा गांवों के लिए भी परामर्श जारी किया है.
पटियाला जिला नियंत्रण कक्ष को एक्टिव कर दिया गया है, और किसी भी सहायता के लिए लोग हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं.
प्रशासन ने निवासियों से अपील की है कि वे अफवाहें न फैलाएं और न ही उन पर विश्वास करें. जलस्तर में किसी भी वृद्धि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें.
पटियाला में 1993 में भी भयंकर बाढ़ आई थी, जिसमें राजपुरा और समाना के बड़े हिस्से डूब गए थे और हजारों लोग विस्थापित हुए थे. 2023 में भी भारी मानसूनी बारिश के कारण पटियाला के कई गांवों में बाढ़ आई थी, जिससे फसलों, घरों और बुनियादी ढांचे को व्यापक हानि हुआ था.
अधिकारियों का बोलना है कि वर्तमान में बाढ़ नियंत्रण प्रणाली पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है, लेकिन जान-माल के हानि से बचने के लिए समय पर सतर्कता और सावधानी अत्यंत जरूरी है.

