राष्ट्रीय

मुख्यमंत्री के बयान पर भड़क गया सुप्रीम कोर्ट, जानें वजह

कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामलों में बीआरएस नेता के कविता को दी गई जमानत पर तेलंगाना के सीएम की टिप्पणियों से उच्चतम न्यायालय नाराज दिखा रेड्डी ने कविता की जमानत के लिए बीजेपी और बीआरएस के बीच कथित सौदेबाजी की ओर इशारा किया था उनके इस बयान पर नाराज़गी जताते हुए शीर्ष न्यायालय ने बोला कि ऐसे बयानों से लोगों के मन में आशंकाएं पैदा हो सकती हैं

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न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने रेड्डी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा, ‘क्या आपने अखबार में पढ़ा कि उन्होंने क्या कहा? बस इतना पढ़िए कि उन्होंने क्या कहा एक उत्तरदायी सीएम का यह कैसा बयान है? इससे लोगों के मन में आशंकाएं पैदा हो सकती हैं क्या एक सीएम को ऐसा बयान देना चाहिए? कानूनी पद पर आसीन आदमी इस तरह से बोल रहे हैं?’

रेड्डी ने मंगलवार को पत्रकारों से बोला था कि विधान परिषद सदस्य कविता को पांच महीने में जमानत मिलने पर शक है, जबकि आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को 15 महीने बाद जमानत मिली और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को अब तक जमानत नहीं मिली है उन्होंने इल्जाम लगाया, ‘यह सच है कि बीआरएस ने 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की जीत के लिए काम किया ऐसी भी चर्चा है कि कविता को बीआरएस और बीजेपी के बीच समझौते के कारण जमानत मिली

शीर्ष न्यायालय ने बोला कि संस्थाओं के प्रति परस्पर सम्मान रखना बुनियादी कर्तव्य है और एक दूसरे के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए पीठ ने कहा, ‘हम हमेशा कहते हैं कि हम विधायिका में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तो उनसे भी यही अपेक्षा की जाती है क्या हम सियासी विचारों के आधार पर आदेश पारित करते हैं?’ पीठ में न्यायमूर्ति पी के मिश्रा और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन भी शामिल हैं

शीर्ष न्यायालय 2015 के ‘नकद के बदले वोट’ घोटाला मुद्दे में मुकदमे को राज्य से भोपाल स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रेड्डी एक आरोपी हैं सुबह शीर्ष न्यायालय ने बोला था कि वह 2015 के ‘नकद के बदले वोट’ घोटाला मुद्दे की सुनवाई के लिए विशेष अभियोजक नियुक्त करेगा दोपहर में जब मुद्दे की सुनवाई हुई तो कोर्ट ने संभावित नामों पर चर्चा की जिनमें वकील सुरेंद्र राव और ई उमा महेश्वर राव के नाम शामिल थे मुद्दे में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील ने रेड्डी के बयानों का हवाला दिया और बोला कि पीठ को पुलिस से बोलना चाहिए कि वह नकद के बदले वोट मुद्दे में अपनी जांच की प्रगति के बारे में सीधे न्यायालय को रिपोर्ट करे, न कि सीएम को रेड्डी के पास गृह विभाग भी है

पीठ ने टिप्पणी की, ‘आपने (रेड्डी) जो बयान दिया, उसका तरीका देखिए एक सीएम द्वारा इस तरह के बयान!’ और रोहतगी से बयान को देखने को कहा रोहतगी ने रेड्डी की ओर से माफी मांगी और कहा, ‘मुझे अपनी गलती सुधारने दीजिए और मुद्दे को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दीजिए‘ नाराज दिख रही पीठ ने रोहतगी से कहा, ‘अगर आप सुप्रीम कोर्ट का सम्मान नहीं करते हैं तो सुनवाई कहीं और करवा लीजिए‘ पीठ ने मुद्दे को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया

सुनवाई की आरंभ में हिंदुस्तान देश समिति (बीआरएस) के नेता एवं विधायक जी जगदीश रेड्डी और तीन अन्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी आर्यमा सुंदरम ने मुकदमे को स्थानांतरित किए जाने का निवेदन करते हुए बोला कि तेलंगाना के सीएम इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बयान दे रहे हैं पीठ ने कहा, ‘केवल संभावना के आधार पर हम कैसे (याचिका पर) विचार कर सकते हैं… यदि हम ऐसी याचिकाओं पर विचार करेंगे तो यह अपने न्यायिक ऑफिसरों पर विश्वास नहीं करने जैसा होगा

सुंदरम ने बोला कि तेलंगाना के सीएम स्वयं गृह मंत्री हैं उन्होंने कहा, ‘स्वाभाविक इन्साफ का नियम है कि किसी भी आदमी को अपने मुद्दे में स्वयं न्यायाधीश नहीं होना चाहिए’ तेलुगु देशम पार्टी के नेता के तौर पर रेवंत रेड्डी को 31 मई 2015 को करप्शन निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अरैस्ट किया था, जब विधान परिषद चुनाव में तेदेपा उम्मीदवार वेम नरेन्द्र रेड्डी का समर्थन करने के लिए मनोनीत विधायक एल्विस स्टीफेंसन को 50 लाख रुपये की घूस दे रहे थे

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