राष्ट्रीय
chai par sameeksha : जानें, हरियाणा में किसका तीर लगेगा निशाने पर…
प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस हफ्ते हमने जम्मू कश्मीर और हरियाणा चुनाव के साथ-साथ कर्नाटक में मचे राजनीतिक उठापटक पर भी चर्चा की है. हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी. हरियाणा को लेकर नीरज कुमार दुबे ने बोला कि कहीं ना कहीं बीजेपी कांग्रेस पार्टी के बीच टफ फाइट है. बीजेपी ने अपनी आशा नहीं छोड़ी है. बीजेपी पूरी मेहनत कर रही है. वहीं कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है. कांग्रेस पार्टी इस चुनाव को पूरी ढंग से भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में लड़ रही है जिसकी वजह से सैलजा और सूरजेवाला अब भी नाराज है. दूसरी ओर जम्मू कश्मीर को लेकर नीरज दुबे ने बोला कि वहां लोकतंत्र मजबूत हुआ है. मतदान की फीसदी यह बता रहे हैं कि वहां लोग लोकतंत्र में विश्वास करने लगे हैं.

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जम्मू कश्मीर के बारे में बात करते हुए नीरज कुमार दुबे ने बोला कि यदि देखा जाए तो जम्मू क्षेत्र में पिछले तीन-चार चुनाव में बीजेपी का असर सर्वश्रेष्ठ रहा है. वहीं कश्मीर में अभी भी बीजेपी अपना खाता खोलने के लिए संघर्ष कर रही है. हालांकि डीडीसी चुनाव में बीजेपी के एक उम्मीदवार ने जीत जरूर हासिल की थी. उन्होंने बोला कि जम्मू कश्मीर को लेकर जो लोग कहते थे कि लोकतंत्र नहीं है, उसके मुंह पर इस बार करारा तमाचा लगा है. जम्मू कश्मीर के लोग जिस ढंग से लोकतंत्र को देखकर उत्साह दिखा रहे हैं, वह कहीं ना कहीं हिंदुस्तान के लिए अच्छी समाचार है. जम्मू कश्मीर लगातार विकास के रास्ते पर चल रहा है. जम्मू कश्मीर के सुदूर इलाकों में विकास हो रहे हैं. वहां भी चुनाव को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है, जहां हाल में भी आतंकवादी हमले हुए थे.
हरियाणा में माहौल
नीरज दुबे ने बोला कि पिछले 15 दिनों से हरियाणा में घूमने के बाद कह सकता हूं कि दिल्ली नगर निगम चुनाव की तरह ही हरियाणा में आश्चर्यजनक नतीजे आने वाले हैं. दिल्ली नगर निगम चुनाव में बीजेपी का सूपड़ा साफ होने की भविष्यवाणी की गई थी लेकिन वह नजदीकी मुकाबले में केवल कुछ सीटों से पिछड़ गई थी. उन्होंने बोला कि कांग्रेस पार्टी आ रही है, यह हवा चलाई गई, लेकिन इसका हानि यह हुआ है कि जनता सावधान हो गई है और कांग्रेस पार्टी से बचने की प्रयास कर रही है. जनता को पता है कि यदि कांग्रेस पार्टी आई तो निश्चित रूप से हुड्डा को कमान सौंपी जाएगी जिससे हुड्डा अपने आलाकमान को खुश रखने के लिए प्रदेश के संसाधनों का दुरुपयोग करते रहेंगे.
नीरज दुबे ने बोला कियह भी याद रखना चाहिए कि तीन महीने पहले लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी और कांग्रेस पार्टी में मुकाबला बराबरी पर खत्म हुआ था. जितनी ताकत राज्य में बीजेपी लगा रही है उतनी ही कांग्रेस पार्टी भी. यदि बीजेपी के वोटर लोकसभा चुनावों की तरह घर पर बैठने की बजाय इस बार मतदान केंद्र तक पहुंचे तो कोई ताकत बीजेपी को तीसरी बार गवर्नमेंट बनाने से नहीं रोक सकती. एक बात और, ये जो छोटे छोटे दल गवर्नमेंट बनाने की चाभी अपने हाथ में आने के दावे कर रहे हैं वो सब खारिज होने वाले हैं. इस बार चाभी किसी के पास आएगी तो वो अभय चौटाला हो सकते हैं. उनकी पार्टी के पास चार से पांच सीट आ सकती हैं. ऐसा लग रहा है जैसे पिछली बार उनका भतीजा दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री बना था उसी तर्ज पर इस बार उपमुख्यमंत्री पद अभय सिंह चौटाला के हाथ लग सकता है.