राष्ट्रीय

चंडीगढ़ में लापता हुई कंपनियाँ, प्रशासन के फैसले का नहीं है कोई आधार

चंडीगढ़ में एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है. प्रशासन द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस (शो कॉज़ नोटिस) तक वापस लौट रहे हैं, क्योंकि जिन पते पर ये कंपनियाँ अपने कार्यालय होने का दावा करती हैं, वहाँ कोई कार्यालय उपस्थित ही नहीं है. 14 अक्तूबर को प्रशासन ने सभी एग्रीगेटर कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों को बैठक के लिए बुलाया था.

Cb05bddd e9f9 4927 9201 ea4d3c1c4bba 1731664861239

WhatsApp Group Join Now

 

 

इस बैठक की अध्यक्षता सचिव, परिवहन विभाग, दिप्रवा लाकड़ा (आईएएस) ने की. लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि किसी भी एग्रीगेटर कंपनी का प्रतिनिधि बैठक में पहुँचा ही नहीं.
यह स्थिति साफ़ तौर पर दर्शाती है कि एग्रीगेटर कंपनियाँ न तो प्रशासन को गंभीरता से ले रही हैं, और न ही बनाए गए नियमों और कानूनों का कोई सम्मान करती हैं.

प्रशासन के आदेशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है, जबकि प्रशासन सिर्फ़ नोटिस भेजने तक ही सीमित दिखाई दे रहा है.
बैठक में चंडीगढ़ ट्राइसिटी कैब ड्राइवर यूनियन की ओर से प्रधान – अमनदीप सिंह, उपप्रधान – सुरेंद्र खालसा,

महासचिव – राजिंदर भट्टी तथा यूनियन के पूर्व समन्वयक और सामाजिक कार्यकर्ता सुमित छाबड़ा अपने साथियों सहित उपस्थित रहे. इसके अतिरिक्त ट्राइसिटी कैब एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया और एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी के विरुद्ध कड़ा विरोध जताया.

प्रशासन ने एग्रीगेटर कंपनियों को 25 अक्तूबर तक उत्तर देने की आखिरी तिथि निर्धारित की है. हालांकि, वर्तमान परिस्थिति यह संकेत दे रहे हैं कि ये कंपनियाँ प्रशासन के आदेशों को लगातार नज़रअंदाज़ कर रही हैं. यदि अब भी प्रशासन ने सख़्त कदम नहीं उठाए, तो शहर के कैब ड्राइवरों का आक्रोश सड़कों पर उतरना तय बताया जा रहा है.

Back to top button