विवादित बिल को मिला एनडीए नेताओं का समर्थन, बोले- सोचा नहीं होगा कि…
केंद्र गवर्नमेंट ने संसद के मानसून सत्र में बुधवार को तीन बिल पेश किए. इसमें से एक कानूनी पद पर बैठे व्यक्तियों की गिरफ्तारी से जुड़ा है. इसके प्रावधानों के भीतर कानूनी पद पर बैठा कोई आदमी एक महीने तक कारावास में रहता है तो उसे अपने पद से त्याग-पत्र देना पड़ेगा. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेता इस बिल का स्वागत कर रहे हैं.

जनता दल (यूनाइटेड) से सांसद संजय कुमार झा ने इस बिल का स्वागत किया. उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि जिन लोगों ने संविधान बनाया है, उन्होंने कभी सोचा नहीं होगा कि ऐसा एक दिन आएगा, जब सीएम कारावास जाएगा और तिहाड़ से जाकर शासन चलाएगा. लेकिन ऐसे नेता आए, जिन्हें न्यायालय ने कारावास भेज दिया, और उसके बावजूद वे सीएम पद पर बने रहे. ऐसे में गवर्नमेंट का यह बिल एक स्वागतयोग्य कदम है.
उन्होंने कहा, सीएम को न्यायालय ने कारावास भेजा. यदि विपक्ष को चुनाव आयोग के बाद न्यायिक प्रणाली पर भी भरोसा नहीं है, तो क्या बोला जा सकता है? कारावास गवर्नमेंट नहीं, बल्कि न्यायालय भेजती है. हम पीएम को धन्यवाद देते हैं कि वो ऐसे बिल लेकर आ रहे हैं, जिससे लोगों का भरोसा राजनीति से जुड़े लोगों पर बढ़ेगा.
भाजपा विधायक हरीश खुराना ने कहा, हमारा हिंदुस्तान करप्शन से मुक्त होना चाहिए, और पीएम इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध और दृढ़ हैं. संविधान निर्माताओं ने कभी नहीं सोचा था कि कोई आदमी त्याग-पत्र दिए बिना कारावास से शासन करेगा.
भाजपा विधायक सतीश उपाध्याय ने कहा, करप्शन पूरी तरह समाप्त होना चाहिए और पीएम करप्शन के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति रखते हैं.
बता दें कि बुधवार को गवर्नमेंट ने संसद में तीन अहम बिल पेश किए. इसमें एक बिल गंभीर आपराधिक मुद्दे वाले राजनेताओं को उनके कानूनी पद से हटाए जाने से संबंधित है. दूसरा सरकार ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025 और तीसरा जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025 है.

