सिंधु जल समझौता: भारत के चाहने मात्र से ही तमाम समस्याओं के हवाले हो सकता है पाकिस्तान
पहलगाम की बैसनर घाटी में हुए कायराना आतंकवादी हमले के बाद हिंदुस्तान ने पाक को उत्तर देने के लिए कई कड़े तरीकों का घोषणा किया है। इनमें सिंधु नदी जल समझौते को रोकना भी शामिल है। इससे पाक में गर्मियों में पानी की कमी होने की संभावना जताई गई है। इस मुद्दे पर एक्सपर्ट्स ने भी अपनी राय जाहिर की है। इंडस कमीशन के पूर्व कमिश्नर और सेंट्रल वाटर कमीशन के पूर्व चेयरमैन कुशविंदर वोहरा से जब ये प्रश्न पूछा गया कि सिंधु जल समझौते को लेकर क्या हिंदुस्तान गवर्नमेंट पाक को तबाह कर सकता है? तो उन्होंने इस मामले पर चौंकाने वाला बयान दिया।

कुशविंदर वोहरा ने बोला कि सिंधु जल समझौते पर वर्ल्ड बैंक का बहुत सीमित रोल है। ये हिंदुस्तान और पाक के बीच समझौता है। इसमें कोई तीसरा राष्ट्र हिंदुस्तान पर दबाव नहीं बना सकता है। मित्रवत और आपसी रजामंदी के आधार पर ये समझौता है। गुडविल और दोस्ती के आधार पर ये समझौता हुआ था। जब आतंकवादी घटना को अंजाम दिया गया तो किस बाद का गुडविल? हिंदुस्तान गवर्नमेंट के पास अधिकार है, जिससे वो चाहे तो पानी रोक सकता है।
कुशविंदर वोहरा ने हिंदुस्तान गवर्नमेंट कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करके पाक जाने वाला पानी इस्तेमाल कर सकता है। इससे वेस्टर्न रीवर से पाक का ज्यादातर हिस्सा जो सिंध तक है, वहां तक पानी की कमी हो जाएगी। इस समझौते को तोड़ने के लिए ऐसी स्थिति पाक ने पैदा किया है। इसके अतिरिक्त हिंदुस्तान गवर्नमेंट चाहे तो बाढ़ की पूर्व सूचना देना बंद कर दे तो पाक में बाढ़ से तबाही आ जाएगी। इस तरह देखा जाए तो हिंदुस्तान गवर्नमेंट चाहे तो पाक में पानी को लेकर तबाही के हालात हो जायेंगे।

