27 साल से लंबित महिला आरक्षण का रास्ता हुआ साफ
महिला आरक्षण विधेयक: करीब 27 वर्ष से लंबित स्त्री आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में स्त्री आरक्षण बिल को केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति सूत्रों के हवाले से यह समाचार सामने आई है। 2008-2010 में स्त्रियों को आरक्षण देने का कोशिश किया गया लेकिन वह विफल रहा। इससे पहले 1996, 1998 और 1999 में भी इसी तरह के बिल पेश किए गए थे। लेकिन फिर भी स्त्री आरक्षण को स्वीकृति नहीं मिली। लेकिन 70 वर्ष बाद स्त्री आरक्षण को हरी झंडी मिल गई है। पिछले कुछ दिनों से विपक्षी दल भी स्त्री आरक्षण को लेकर सुर बदल रहे थे। चूंकि लोकसभा और राज्यसभा में स्त्री आरक्षण का विरोध होने की आसार कम है, इसलिए आम सहमति से स्त्री आरक्षण का रास्ता साफ हो सकता है।
ऐसा देखा जा रहा है कि स्त्री अगुवाई की वर्तमान स्थिति अच्छी नहीं है। लोकसभा में स्त्री सांसदों की संख्या 15 प्रतिशत से भी कम है। मौजूदा लोकसभा में 78 स्त्री सदस्य चुनी गईं। यह आंकड़ा कुल 543 के 15 प्रतिशत से भी कम है। राज्यसभा में भी स्त्रियों का अगुवाई लगभग 14 फीसदी है। चूंकि कई राज्यों की विधानसभाओं में उनका अगुवाई 10 फीसदी से भी कम था, इसलिए स्त्री आरक्षण की जोरदार मांग उठी।
10 फीसदी से कम अगुवाई वाले राज्य:
आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, ओडिशा, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा सहित राज्य विधानसभाओं में स्त्रियों का अगुवाई 10 फीसदी से कम है। पुडुचेरी।
ज्यादातर स्त्री विधायक…
बिहार, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली में 10-12 फीसदी स्त्री विधायक हैं। सबसे अधिक स्त्री विधायक छत्तीसगढ़ में हैं। इसका आंकड़ा महज 14.44 प्रतिशत है। जबकि पश्चिम बंगाल में 13.7 प्रतिशत और झारखंड में 12.35 प्रतिशत स्त्री विधायक हैं।
इस बीच यदि मोदी गवर्नमेंट लोकसभा, विधानसभा में स्त्रियों के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का बिल लाती है तो यह एक ऐतिहासिक कदम होगा। निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन को लेकर कुछ प्रश्न हैं, मौजूदा समय सीमा 2026, क्या चुनाव आयोग इतने कम समय में पुनर्गठन करेगा कि इसे अगले चुनाव में लागू किया जाएगा। संसद के 75 वर्ष पूरे होने पर बोलते हुए पीएम मोदी ने बोला था कि अब तक करीब 7500 सांसद संसद का अगुवाई कर चुके हैं, जिनमें से 600 महिलाएं थीं। इससे यह चर्चा प्रारम्भ हो गई कि स्त्री आरक्षण विधेयक लाया जाएगा।

