राष्ट्रीय

भारत के इस जगह पर है त्रेता युग की झील

करीबन 1 किमी दूर तक फैली ये झील चमोली से 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है हाथी पर्वत के तल पर उपस्थित इस झील का पानी हल्के रंग का है, जिसे देखने के बाद हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है ये झील विश्व धरोहर साइट नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व में स्थित है, जिसका रास्ता कांकुल पास से होकर जाता हैये झील इसलिए भी खास है, क्योंकि इसका इतिहास रामायण काल से कहा जा रहा है ऐसा माना जाता है कि रामयण के एक पात्र काकभुशुण्डि ने यहां कौवे का रूप लेने के बाद गरुड़ को रामायण कथा सुनाई थी इसी वजह से झील को काफी पवित्र माना जाता है Newsexpress24. Com images 2 7

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कहा जाता है कि यहां नहाने से पाप धूल जाते हैंग्रंथों में भी इस बात का जिक्र है कि लोमेश ऋषि के श्राप से काकभुशुण्डि कौवा बन गए थे, जिस वजह से उन्होंने अपना पूरा जीवन कौवे के ही रूप में गुजारा था कहते हैं कि काकभुशुण्डि ने वाल्मीकि से भी पहले गरुड़ को रामायण इसी झील पर सुनाई थी कहते हैं कि जब राम मेघनाद से युद्ध कर रहे थे, तो उस दौरान ईश्वर को नागपाश से बांध दिया गया था, तब गरुड़ ने ईश्वर राम को मुक्त किया थाएक माना जाता है कि कौवे मरने के लिए इस झील की ओर आते हैं झील के चारों ओर कौवे के टूटे हुए पंख देखे जा सकते हैं लेकिन यहां किसी ने कभी किसी कौवे को मरते नहीं देखाअगर इस झील की खूबसूरत महिमा के बारे में जानना चाहते हैं, तो हम आपको बता दें, ये झील उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में उपस्थित है यहां से दो रास्ते जाते हैं, एक भुइंदर गांव से घांघरिया के पास से और दूसरा सरा गोविंद घाट से जोशीमठ पहुंचने के लिए आप देहरादून की फ्लाइट ले सकते हैं यहां से बस और ट्रेन सर्विस से भी सरलता से पहुंचा जा सकता है देहरादून पहुंचने के बाद आप प्राइवेट टैक्सी या कार से भी जा सकते हैं

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