दिल्ली विश्वविद्यालय के UG कोर्सेज में आए ये बड़े बदलाव
Delhi University Class Promotion: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) अंडर ग्रेजुएट कोर्सेज में एक क्लास से दूसरे क्लास में प्रमोशन के लिए महत्वपूर्ण क्रेडिट में परिवर्तन कर सकता है। इसके लिए डीयू ने अंडर ग्रेजुएट कोर्सेज के प्रथम साल में उत्तीर्ण होने और दूसरे साल में प्रमोमशन होने के लिए विद्यार्थी के लिए क्रेडिट की जरूरत को 22 क्रेडिट से बढ़ाकर 28 क्रेडिट करने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) में निर्धारित विद्यार्थी लक्ष्यों के साथ “संरेखित” करने के लिए उठाया गया है।
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यह कदम एनईपी की कमियों को दूर करने के लिए उठाया गया है। इसके अनुसार प्रत्येक सेमेस्टर में सात पेपर होते हैं, जिसमें चार मुख्य विषय-विशिष्ट पेपर होते हैं, जिनमें प्रत्येक में चार क्रेडिट और चार अतिरिक्त पेपर जनरल इलेक्टिव, वैल्यू एडेड कोर्स, स्किल एन्हांसमेंट कोर्स और एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स होते हैं। इसमें प्रत्येक सेमेस्टर में दो क्रेडिट होते हैं।
विश्वविद्यालय द्वारा गठित 12-सदस्यीय समिति का हिस्सा रहे पूर्व एग्जाम कंट्रोलर ने बोला है कि यदि हम दूसरे साल में पदोन्नत होने के लिए विद्यार्थी के लिए बुनियादी आवश्यकताओं के रूप में 44 में से पहले के 22 क्रेडिट के साथ चलते हैं, तो एक विद्यार्थी जो पहले सेमेस्टर में सभी विषयों में उत्तीर्ण होता है, वह पहले सेमेस्टर में ही जरूरी क्रेडिट अर्जित कर लेगा और दूसरे सेमेस्टर में उतना एक्टिव नहीं होगा जितना उसे होना चाहिए। यही कारण है कि हमने इसे बढ़ाकर 28 क्रेडिट करने का प्रस्ताव दिया है ताकि विद्यार्थी अपने द्वारा चुने गए पाठ्यक्रम के पर्याप्त अनुशासन-विशिष्ट (DSC) पेपरों में अच्छा परफॉर्म कर सकें।
समिति की बैठक के विवरण में बोला गया है कि हालांकि, सेमेस्टर पास करने के लिए न्यूनतम क्रेडिट प्राप्त करने के लिए मुख्य शैक्षणिक विषयों को लेने की कोई बाध्यता नहीं है। इससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को हानि हो रहा है और NEP 2020 में निर्धारित लक्ष्यों को हराया जा रहा है। समिति की सिफारिशों में आगे बोला गया है कि विद्यार्थी को अगले साल में पदोन्नति के लिए दोनों सेमेस्टर के कुल क्रेडिट में से कम से कम 28 क्रेडिट हासिल करने चाहिए। हालांकि, खेल/पाठ्येतर गतिविधियों/एनसीसी/एनएसएस आदि में दिल्ली यूनिवर्सिटी का अगुवाई करने वाले विद्यार्थियों को सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के अधीन इस जरूरत से छूट दी जा सकती है।

