राष्ट्रीय

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने पर किए जाएंगे ये बड़े बदलाव

मणिपुर में बीते 21 महीनों से जारी अत्याचार और अशांति के बीच आखिरकार केंद्र गवर्नमेंट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है. सीएम एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को गवर्नर को अपना त्याग-पत्र सौंप दिया था, जिसके चार दिन बाद यह कदम उठाया गया. बीते एक वर्ष में मणिपुर जातीय संघर्ष की भट्टी में झुलसता रहा है.

Nbirensingh

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3 मई 2023 से प्रारम्भ हुई अत्याचार ने सैकड़ों जानें ले लीं और हजारों लोगों को बेघर कर दिया है. मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने इस्तीफे से पहले बोला था, “पूरा वर्ष बहुत दुर्भाग्यपूर्ण रहा. इस अत्याचार से मुझे बहुत दुख है. मैं मणिपुर के लोगों से माफी मांगता हूं.” हालांकि, उनके इस्तीफे के बावजूद हालात में कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा है. मणिपुर की वर्तमान अत्याचार की जड़ में एक बड़ा टकराव है, मैतई समुदाय को न्यायालय द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देना. इस निर्णय का विरोध कुकी समुदाय ने हिंसक प्रदर्शन करके किया.

दरअसल, मणिपुर का 90% क्षेत्र पहाड़ी इलाकों में आता है, जहां सिर्फ़ ST श्रेणी में आने वाले समुदायों को बसने और व्यापार करने का अधिकार है. मैतई समुदाय, जो मणिपुर की 53% जनसंख्या है, सिर्फ़ 10% मैदानी इलाकों में रहने को विवश था. न्यायालय ने इसी असमानता को देखते हुए मैतई समुदाय को ST का दर्जा दिया था, ताकि वे भी पहाड़ी इलाकों में बस सकें. लेकिन कुकी समुदाय को यह निर्णय मंजूर नहीं था, क्योंकि इससे उनका एकाधिकार समाप्त होने का खतरा था. भारी विरोध और अत्याचार के बाद यह दर्जा वापस ले लिया गया, लेकिन आग तब तक भड़क चुकी थी.

इस अत्याचार के पीछे केवल जातीय संघर्ष नहीं, बल्कि कुछ बड़े सियासी और धार्मिक कारण भी जुड़े हुए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुकी-जो समुदाय के अधिकतर लोग धर्मांतरण कर अब ईसाई बन चुके हैं और अब वे मणिपुर से अलग एक नया राज्य ‘कुकीलैंड’ बनाने की मांग कर रहे हैं. इस अलगाववादी मांग को कथित रूप से विदेशी संगठनों और ताकतों से भी समर्थन मिल रहा है.

दूसरी तरफ, बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद बीजेपी नेतृत्व नया सीएम तय करने में असमर्थ रहा. बीजेपी के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा ने विधायकों से कई दौर की चर्चा की, लेकिन कोई सर्वसम्मति नहीं बन पाई. अब, राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य की पूरी जिम्मेदारी केंद्र गवर्नमेंट पर आ गई है. इस बीच, मणिपुर में सुरक्षा बलों ने तीन प्रतिबंधित संगठनों के छह आतंकवादियों को अरैस्ट किया है.

इनमें कांग्लेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (KCP), प्रेपाक और KCP (सिटी मैतेई) के सदस्य शामिल हैं. इसके अलावा, फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड एक्टिवेट करने के मुद्दे में भी एफआईआर दर्ज की गई है. अब बड़ा प्रश्न यह है कि राष्ट्रपति शासन के बाद मणिपुर में शांति लौटेगी या नहीं? केंद्र गवर्नमेंट अब कितनी तेजी से हालात सुधारने के लिए कदम उठाएगी, यह देखने लायक होगा.

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