राष्ट्रीय

1 जुलाई से देश में ये तीन नए कानून होंगे लागू

अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा कानून और इसी धाराओं में किया गया परिवर्तन 1 जुलाई से लागू हो जाएगा. इसके लिए रविवार को पुलिस कंट्रोल रूम में पुलिस ऑफिसरों का प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुरुआत किया गया. 1 जुलाई से पुराने कानून IPC, CRPC और साक्ष्य अधिनिय

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अब तक पुलिस कार्रवाई में फारसी और उर्दू के 69 प्रचलित शब्दों को चिह्नित कर उनकी स्थान हिंदी शब्दों के प्रयोग का फरमान भी पहले ही आ चुका है. अब कानून और पुलिस कार्रवाई में परिवर्तन होने जा रहा है. कानून की कुछ अहम धारा जो अधिक प्रचलन में है. उनमें भी परिवर्तन हो रहा है. ऐसे में अब कानून से जुड़े पेशे के लोगों को क्राइम से जुड़ी नयी धाराओं को याद करना होगा.

इन धाराओं में हो रहा बदलाव

लंबे समय से चले आ रहे कानून की धाराओं में परिवर्तन किया गया है . जहां मर्डर के लिए धारा 302 लगाई जाती है वहां नए कानून के भीतर मर्डर के मुद्दे में धारा 101 का इस्तेमाल करना होगा. वहीं धारा 302 को अब चैन स्नैचिंग की धारा माना गया है. छेड़छाड़ की धारा 354 की पहचान अब मानहानि की धारा के तौर पर होगी.

पहले मानहानि की धारा को 499 के तौर पर जाना जाता था. फर्जीवाड़ा से मुद्दे में धारा 420 की स्थान अब धारा 316 की धारा लगाई जाएगी . एक जुलाई ने बदला हुआ कानून प्रचलन में होगा . पुलिस अधिकरियो को इसी के लिहाज से प्रशिक्षण दिया जा रहा है .

डिजिटल साक्ष्य भी मान्य होंगे

भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की स्थान भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 नया कानून होगा. नए कानून में 170 धाराएं हैं. जबकि 1872 के कानून में 167 धाराएं थीं. इस कानून के अनुसार अब न्यायालय में इलेक्ट्रोनिक और डिजिटल साक्ष्य पेश किए जा सकेंगे. विदेशों की तर्ज पर न्यायालय अब क्रिमिनल को समाजसेवा से जुड़ी सजा सुना सकता है. साफ-सफाई, वृद्धाश्रम और हॉस्पिटल में सेवा कार्य और पौधा रोपण जैसे काम सजा के तौर पर सुनाने का प्रावधान किया गया है.

रेप के मामलों की धारा भी बदलावसड़क हादसा से जुड़े हिट एंड रन मुद्दे में अब गुनेहगार को 10 वर्ष तक की सजा भुगतनी होगी. पहले केवल दो वर्ष की सजा होती थी. जिसे बढ़ाकर 10 वर्ष कर दिया है. नए कानून में 18 साल से कम उम्र की लड़कियों से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामलों का भी जिक्र है. नए कानून के अनुसार अब ऐसे मामलों में जीवन भर जेल या मृत्युदंड का भी प्रावधान किया गया है. गैंगरेप के मामलों में बीस वर्ष की कैद या जीवन भर जेल की सजा का प्रावधान किया गया है.

इसके अतिरिक्त नए कानून के अनुसार स्त्री के साथ हुए बलात्कार की घटना किसी भी राज्य में जीरो पर मुकदमा दर्ज करा सकेगी. दुष्कर्म के जो मुद्दे अभी तक 376 के भीतर आते हैं वे अब 1 जुलाई से धारा 63 के भीतर आएंगे और सामूहिक बलात्कार के मुद्दे अब धारा 70 के भीतर आएंगे.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाह नए कानूनों के अनुसार पीड़ितों और गवाहों की समस्याओं को ध्यान में रखकर कई प्रावधान किए गए हैं. अब किसी मुद्दे में कोई गवाह घर बैठकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज करा सकेगा न्यायालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी. 7 वर्ष से अधिक सजा के मुद्दे में पुलिस हथकड़ी लगाने के लिए स्वतंत्र रहेगी.

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