मणिपुर के सीएम बीरेन सिंह का आया ये बड़ा बयान
इम्फाल: मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह ने बोला कि म्यांमार से 5,800 से अधिक गैरकानूनी प्रवासियों ने मणिपुर में प्रवेश किया है और जिले के कामजोंग में शरण ली है. रविवार को इंफाल में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम ने बोला कि म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध के कारण 5,800 से अधिक गैरकानूनी प्रवासी मणिपुर में प्रवेश कर गए हैं और कामजोंग जिले के आठ गांवों में शरण ली है. उन्होंने कहा, ”इनमें से 15 की प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई और 359 लोग म्यांमार लौट गए हैं.” उन्होंने बोला कि म्यांमार में स्थिति सुधरने पर उन्हें निर्वासित कर दिया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने यह भी बोला कि मणिपुर में प्रवेश करने वाले सभी “अवैध प्रवासियों” को मुनासिब कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उनके संबंधित राष्ट्रों में भेज दिया जाएगा, उन्होंने बोला कि स्वदेशी लोगों की रक्षा करना उनकी गवर्नमेंट के लिए सर्वोपरि है. उन्होंने कहा, “हमारे पास मौजूद आंकड़े बताते हैं कि गैरकानूनी प्रवासन के कारण राज्य में 996 नए गांव पैदा हुए हैं.” सिंह ने कहा, “उनके नामित शिविर क्षेत्रीय लोगों से मिलने से रोकने के लिए क्षेत्रीय बस्तियों से दूर स्थित हैं.” उन्होंने बोला कि गांव की क्षेत्रीय समिति और जिला प्रशासन ज्यादातर नामित शिविरों के आवास और रखरखाव का प्रबंधन कर रही है और जरूरी चीजें उन्हें प्रदान की जा रही हैं.
उन्होंने आगे बोला कि आप्रवासियों को प्रशासन द्वारा आईडी प्रूफ प्रदान किए जाते हैं और हर दूसरे दिन गिनती की जाती है. सीएम ने बोला कि, “उनमें से कई लोग म्यांमार वापस जाने के इच्छुक हैं क्योंकि खेती का मौसम प्रारम्भ हो गया है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में म्यांमार सेना द्वारा बमबारी के कारण वे झिझक रहे हैं.” उन्होंने बोला कि जिले में सुरक्षा तैनाती मजबूत करने के अलावा, प्रशासन ने गैरकानूनी प्रवासियों के बायोमेट्रिक्स को रिकॉर्ड करना और इसे गृह मंत्रालय के पोर्टल पर अपलोड करना भी प्रारम्भ कर दिया है. उन्होंने कहा, 284 लोगों के बायोमेट्रिक्स अभी तक दर्ज नहीं किए गए हैं.
राज्य के लोगों से घबराने या झूठी अफवाहें न फैलाने का आग्रह करते हुए, सिंह ने एक गैर सरकारी संगठन, इंटरनेशनल कमेटी ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ) द्वारा की गई अपील को खारिज कर दिया, जिसमें हिंदुस्तान से म्यांमार के शरणार्थियों के निर्वासन को रोकने का आग्रह किया गया था. उन्होंने कहा, “इस संगठन को मणिपुर की जमीनी हकीकत की साफ समझ नहीं है.” उन्होंने कहा, “हम सामान्य परिस्थितियों में गैरकानूनी अप्रवास से नहीं निपट रहे हैं. मणिपुर के मूल लोगों की जनसांख्यिकी, इतिहास और पहचान को खतरा हो रहा है.” सीएम ने बल देकर बोला कि हमारे स्वदेशी समुदायों की सुरक्षा केंद्र और राज्य गवर्नमेंट दोनों की अहमियत है.
मुख्यमंत्री ने बोला कि, “दुर्भाग्य से, ये तथाकथित अधिकार कार्यकर्ता और अंशकालिक सामाजिक कार्यकर्ता कुछ समूहों के साथ निकटता से जुड़े हुए हैं जो राज्यों में अधिक शत्रुता और विभाजन पैदा करने का कोशिश कर रहे हैं. उनका काम लोगों और देश के व्यापक भलाई के विरुद्ध है और ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है.”

