‘राइजिंग भारत समिट 2025‘ में PM मोदी के संबोधन की ये है 10 बड़ी बातें
नई दिल्ली: ‘राइजिंग हिंदुस्तान समिट 2025’ के मंच से पीएम मोदी ने वक्फ के मसले पर खुलकर बात की। पीएम ने बोला कि पहले का वक्फ कानून ऐसा था कि उसका नोटिस आते ही लोग डर के मारे कागज ढूंढने में लग जाते थे। उन्होंने बोला कि 2013 में वक्फ अधिनियम में संशोधन का उद्देश्य मुसलमान कट्टरपंथियों और भू-माफियाओं को खुश करना था। पीएम ने बोला कि ‘नया वक्फ कानून वक्फ की पवित्रता और मुसलमान संप्रदाय के गरीबों, पिछड़ों एवं स्त्रियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।’ मोदी ने यह भी बोला कि ‘हमारी गवर्नमेंट ने इस साल के शुरुआती 100 दिनों में भविष्य के लिए मजबूत नींव रखी है, हिंदुस्तान अब रुकने वाला नहीं है।’ पीएम ने ‘विकसित भारत’ के लिए मंत्र भी दिया- Delay is the enemy of development। उन्होंने बोला कि उनकी गवर्नमेंट ने विकास प्रोजेक्टस को तेजी से पूरा किया है।

‘राइजिंग हिंदुस्तान समिट 2025‘ में पीएम मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें
- इस वर्ष की आरंभ में, विवेकानंद जी की जयंती के दिन, इसी हिंदुस्तान मंडपम में विकसित हिंदुस्तान यंग लीडर्स डायलॉग का आयोजन हुआ था। उस समय मैंने युवाओं की आंखों में जो देखा — वह था सपनों की चमक, संकल्प की शक्ति और हिंदुस्तान को विकसित देश बनाने का जुनून। 2047 तक हिंदुस्तान को जिन ऊंचाइयों तक ले जाना है, और जिस रोडमैप पर हम चल रहे हैं, यदि उसके हर कदम पर मंथन हो, तो निश्चित ही अमृत निकलेगा।
- वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, हिंदुस्तान ने तेज़ी से प्रगति की और मात्र एक दशक में अपनी अर्थव्यवस्था को दुगुना कर दिया। जो लोग सोचते थे कि हिंदुस्तान धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा, वे अब एक तेज़ और निडर हिंदुस्तान को देख रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि हिंदुस्तान जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। और इस असाधारण विकास का नेतृत्व कौन कर रहा है? हिंदुस्तान के युवा, उनकी महत्वाकांक्षाएं और आकांक्षाएं… आज दुनिया की नज़र भी हिंदुस्तान पर है और दुनिया की आशा भी हिंदुस्तान से है। कुछ ही सालों में हिंदुस्तान 11वीं से 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन गया है। और इसमें कोई शक नहीं है कि हिंदुस्तान को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना तय है। पिछले 10 सालों में मुद्रा योजना के अनुसार बिना गारंटी के 52 करोड़ लोन दिए गए। यह स्केल और गति अभूतपूर्व है। मुद्रा योजना की बदौलत 11 करोड़ लोगों को पहली बार स्वरोज़गार के लिए लोन मिला।
- हमने अपनी नीतियों के माध्यम से नयी संभावनाओं के द्वार खोले हैं। अब 12 लाख रुपये तक की आय टैक्स-फ्री है। इस परिवर्तन से युवा प्रोफेशनल्स और उद्यमियों को भारी फायदा मिलेगा। जिस तरह हमने स्पेस सेक्टर को खोला, उसी तरह अब न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को भी निजी उद्यमों के लिए खोल दिया गया है। गिग इकोनॉमी से जुड़े लोगों को अब सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिलेगा। जो लोग पहले नीतियों से अदृश्य थे, अब वही नीतियों के केंद्र में हैं। एससी, एसटी और स्त्रियों के लिए 2 करोड़ रुपये तक के टर्म लोन की सुविधा दी जा रही है। समावेशिता अब केवल वादा नहीं है, यह नीति है।
- भारत अब न झुकने वाला है और न ही थमने वाला। इन 100 दिनों में, हिंदुस्तान दुनिया का चौथा ऐसा राष्ट्र बना जिसने सैटेलाइट की डॉकिंग और अनडॉकिंग की क्षमता हासिल की। हिंदुस्तान ने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण भी किया। पिछले 100 दिनों में सेना के लिए मेड इन इण्डिया लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर की खरीदी को हरी झंडी दी गई और वक्फ कानून में संशोधन का विधेयक पास हुआ। यानी, सामाजिक इन्साफ की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया। ये 100 दिन 100 फैसलों से भी आगे की बात है। यह 100 संकल्पों की सिद्धि का समय है। परफॉर्मेंस का यही मंत्र… राइजिंग हिंदुस्तान की वास्तविक ताकत है।
- अभी दो दिन पहले मैं रामेश्वरम में था, जहां मुझे ऐतिहासिक पंबन ब्रिज के लोकार्पण का अवसर मिला। करीब 125 वर्ष पहले अंग्रेजों ने वह पुल बनवाया था। उस पुल ने इतिहास देखा, तूफान झेले। एक बार एक साइक्लोन ने उसे बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। वर्षों तक राष्ट्र इंतज़ार करता रहा, जनता मांग करती रही, लेकिन पहले की सरकारें सोती रहीं। जब हमारी गवर्नमेंट आई, तो नए पंबन ब्रिज का काम प्रारम्भ हुआ और अब राष्ट्र को अपना पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज मिल गया है।
- परियोजनाओं को लटकाकर राष्ट्र नहीं चलता। राष्ट्र तभी चलता है जब काम समय पर पूरा हो। Delay is the enemy of development. और हमने इस शत्रु को हराने की ठान ली है। बोगीबील ब्रिज की नींव 1997 में पूर्व पीएम देवगौड़ा जी ने रखी थी, और वाजपेयी गवर्नमेंट के समय इसका काम प्रारम्भ हुआ। लेकिन कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट आने पर यह अटक गया। अरुणाचल प्रदेश और असम के लोग वर्षों तक परेशान होते रहे, लेकिन तब की गवर्नमेंट ने परवाह नहीं की। 2014 में जब हमें सेवा का अवसर मिला, तो हमने इसका काम फिर से प्रारम्भ किया और मात्र चार सालों में, 2018 में ब्रिज पूरा कर दिया।
- देश के 125 से ज़्यादा जिले कभी नक्सलवाद से प्रभावित थे। जहां-जहां नक्सलवाद था, गवर्नमेंट की पहुंच वहीं तक सीमित थी। इसका सबसे अधिक असर युवाओं पर पड़ा, और हमने उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार कोशिश किए। पिछले 10 सालों में 8,000 से अधिक उग्रवादियों ने अत्याचार छोड़ दी है। आज नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 20 से भी कम रह गई है। इसी तरह पूर्वोत्तर हिंदुस्तान भी अलगाववाद और अत्याचार से जूझ रहा था। पिछले दशक में हमारी गवर्नमेंट ने 10 बड़े शांति समझौतों को पूरा किया, जिससे 10,000 से अधिक लोग हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे।
- दशकों तक हिंदुस्तान में डर, भय और आतंक का माहौल बढ़ता गया। इसका सबसे बड़ा खामियाजा युवाओं को भुगतना पड़ा। अत्याचार और अलगाववाद की आग में सबसे अधिक युवा झुलसे। जम्मू और कश्मीर में अनेक पीढ़ियों के युवा बम, बंदूक और पत्थरबाज़ी में खप गए। लेकिन दशकों तक शासन करने वालों में इस आग को बुझाने का साहस नहीं था। हमारी गवर्नमेंट की मजबूत सियासी इच्छाशक्ति के कारण आज वहां हालात बदल गए हैं। आज जम्मू और कश्मीर का युवा विकास की धारा से जुड़ गया है।
- 2013 में वक्फ कानून संशोधन कट्टरपंथियों और भू-माफियाओं को खुश करने की प्रयास थी. कानून ऐसा बना कि लोगों को अपनी ही ज़मीन के लिए डर लगने लगा. क्या यही इन्साफ है? तुष्टिकरण की राजनीति से कांग्रेस पार्टी को सत्ता मिली, कुछ कट्टरपंथी नेताओं को सम्पत्ति मिली। लेकिन प्रश्न ये है कि आम मुस्लिम को क्या मिला? गरीब पसमांदा मुस्लिम को क्या मिला? उसे मिला उपेक्षा, अशिक्षा और बेरोजगारी। मुसलमान स्त्रियों को मिला शाहबानो जैसा अन्याय। मैं राष्ट्र की संसद को, सर्वसमाज और मुसलमान समाज के भलाई में एक ऐतिहासिक कानून पारित करने के लिए शुभकामना देता हूं। अब वक्फ की पवित्र भावना की रक्षा भी होगी और गरीब-पसमांदा मुसलमान, महिलाएं और बच्चे – सबके अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।
- वक्फ बिल पर बहस संसद के इतिहास की दूसरी सबसे लंबी बहस रही। दोनों सदनों में इस पर 16 घंटे चर्चा हुई, संसद की संयुक्त समिति (JPC) की 38 बैठकें हुईं, कुल मिलाकर 128 घंटे की चर्चा हुई। देशभर से लगभग 1 करोड़ औनलाइन सुझाव भी प्राप्त हुए। यह बताता है कि लोकतंत्र सिर्फ़ संसद की चार दीवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनभागीदारी से और अधिक मजबूत और समृद्ध हो रहा है।

